Zee जानकारी: राष्ट्रगान का सम्मान क्यों जरूरी?

National Flag यानी राष्ट्रीय ध्वज और National Anthem यानी राष्ट्रगान। किसी भी देश की पहचान होते हैं लेकिन ये पहचान इतनी आसानी से नहीं मिलती, इस पहचान को पाने के लिए खून बहाना पड़ता है, कुर्बानियां देनी पड़ती है, भयानक अत्याचार सहने पड़ते हैं, सर्वोच्च बलिदान करना पड़ता है। अंग्रेज़ों के अत्याचार के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद भारत को स्वतंत्रता और दुनिया में अपनी अलग पहचान मिली थी लेकिन आज आज़ादी के 68 साल गुज़र जाने के बाद हमारे ही देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं। जिन्हें भारत की इस पहचान से नफरत है। ये वो लोग हैं जिन्हें लगता है कि राष्ट्रगान को गाना एक गुनाह है। वो राष्ट्रगान, जो किसी देश की सभ्यता, संस्कृति और संघर्ष की व्याख्या करता है। वो राष्ट्रगान, जो हर देशवासी में राष्ट्रप्रेम की भावना को अभिव्यक्त करता है, जिसे गाकर हर भारतीय को गर्व होता है। उस राष्ट्रगान से कुछ लोगों को परहेज़ है। सवाल ये है कि जिन्हें राष्ट्रगान से चिढ़ है, उन्हें देश पर गर्व कैसे हो सकता है?  

Zee जानकारी: राष्ट्रगान का सम्मान क्यों जरूरी?

नई दिल्ली: National Flag यानी राष्ट्रीय ध्वज और National Anthem यानी राष्ट्रगान। किसी भी देश की पहचान होते हैं लेकिन ये पहचान इतनी आसानी से नहीं मिलती, इस पहचान को पाने के लिए खून बहाना पड़ता है, कुर्बानियां देनी पड़ती है, भयानक अत्याचार सहने पड़ते हैं, सर्वोच्च बलिदान करना पड़ता है। अंग्रेज़ों के अत्याचार के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद भारत को स्वतंत्रता और दुनिया में अपनी अलग पहचान मिली थी लेकिन आज आज़ादी के 68 साल गुज़र जाने के बाद हमारे ही देश में कुछ लोग ऐसे भी हैं। जिन्हें भारत की इस पहचान से नफरत है। ये वो लोग हैं जिन्हें लगता है कि राष्ट्रगान को गाना एक गुनाह है। वो राष्ट्रगान, जो किसी देश की सभ्यता, संस्कृति और संघर्ष की व्याख्या करता है। वो राष्ट्रगान, जो हर देशवासी में राष्ट्रप्रेम की भावना को अभिव्यक्त करता है, जिसे गाकर हर भारतीय को गर्व होता है। उस राष्ट्रगान से कुछ लोगों को परहेज़ है। सवाल ये है कि जिन्हें राष्ट्रगान से चिढ़ है, उन्हें देश पर गर्व कैसे हो सकता है?  

ज़रा सोचिए कि क्या ये किसी और देश में हो सकता है कि राष्ट्रगान गाने पर किसी की पिटाई कर दी जाए। क्या ये किसी और देश में हो सकता है कि राष्ट्रगान गाने को धर्म के खिलाफ बता दिया जाए? लेकिन भारत में ऐसा हुआ है। हमारे पास पश्चिम बंगाल से एक शिक्षक की पिटाई की ख़बर आई है। इस शिक्षक की पिटाई सिर्फ़ इस वजह से कर दी गई कि वो अपने छात्रों को राष्ट्रगान सिखा रहा था ये घटना पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की है। जहां एक मदरसे के शिक्षक को कट्टरपंथियों का निशाना बनना पड़ा। क्योंकि वो शिक्षक मदरसे में आधुनिक शिक्षा और राष्ट्रप्रेम को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा था। काज़ी मासूम अख़्तर नाम के इस टीचर के खिलाफ स्थानीय मौलाना ने फतवा जारी कर दिया और ये कहा कि राष्ट्रगान एक हिंदूवादी गीत है और ये इस्लाम के खिलाफ है।

सवाल ये है कि क्या राष्ट्रगान का भी कोई धर्म होता है? ये कौन से लोग हैं जिन्हें राष्ट्रगान से भी चिढ़ होती है? जिन्हें राष्ट्रगान से जलन होती है और जो राष्ट्रगान को भी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। ये कैसी विडंबना है कि जिन रबींद्र नाथ टैगोर ने वर्ष 1911 में जन गण मन की रचना की और जिनके जन गण मन को वर्ष 1950 में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया। उनकी ही धरती पर जन गण मन को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। टैगोर की धरती पर ही राष्ट्रगान का अपमान किया जा रहा है। गौर करने वाली बात ये है कि रबींद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखा गया एक और गीत 'अमार शोनार बांग्ला', बांग्लादेश का राष्ट्रगान है यानी मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में राष्ट्रगान से किसी को परहेज़ नहीं है लेकिन भारत में कुछ कट्टरपंथी लोग राष्ट्रगान को भी धर्म की लकीरों से विभाजित कर रहे हैं। ये एक चिंताजनक ख़बर है। इसीलिए हम इस ख़बर का गहरा विश्लेषण कर रहे हैं। हमें पूरा यकीन है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी हमारी ही तरह राष्ट्रभक्त हैं और उन्हें भी इस घटना से तकलीफ होगी और हमें लगता है कि उन्हें खुद इस घटना का संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए और ये देखना चाहिए कि कैसे उनकी नाक के नीचे राष्ट्रगान का अपमान किया गया।

68 वर्ष पहले इस देश का हर नागरिक चाहे वो किसी भी धर्म का हो, किसी भी वर्ग का हो, किसी भी जाति का हो। कंधे से कंधे मिलाकर देश की आज़ादी मांग रहा था लेकिन पिछले 68 वर्षों में ये देश उस मकाम पर पहुंच गया है। जहां कुछ लोग राष्ट्रगान से आज़ादी मांगने लगे हैं। ऐसे लोगों को हम कुछ याद दिलाना चाहते हैं। इन लोगों को हम जंग ए आज़ादी के नायक शहीद अशफाक उल्ला खान के बारे में बताना चाहते हैं। जो वर्ष 1927 में देश के लिए हंसते हंसते फांसी पर चढ़ गए थे। ऐसे लोगों को हम वीर अब्दुल हमीद के बारे में बताना चाहते हैं। जो वर्ष 1965 की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना के पैटन टैंकों को ध्वस्त करते हुए शहीद हो गए थे और इस सर्वोच्च बलिदान के लिए वीर अब्दुल हमीद को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से नवाज़ा गया था। यानी देशभक्ति का कोई धर्म नहीं होता। शहादत का कोई धर्म नहीं होता और इसी तरह राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का भी कोई धर्म नहीं होता

राष्ट्रगान के सम्मान को लेकर बने कानून के बारे में जानकारी, जिसे हर भारतीय को पता होना चाहिए...
* भारतीय संविधान के भाग-4 में नागरिकों की Fundamental Duties यानी मूल कर्तव्यों के तहत राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के सम्मान
का ज़िक्र है
* संविधान के भाग-4 के अनुच्छेद 51 A में लिखा है कि  "ये भारत के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वो संविधान का पालन करे। संविधान के आदर्शों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे"
* इसके अलावा The Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के मुताबिक सार्वजनिक जगह या ऐसी किसी जगह, जो public view के दायरे में आती है, वहां पर राष्ट्रीय ध्वज या भारत के संविधान या इसके किसी हिस्से के प्रति किसी भी तरीके से अपमान करने या असम्मान दिखाने पर तीन वर्ष की सज़ा और ज़ुर्माने का प्रावधान है
* इसी कानून के भाग 3 में राष्ट्रगान को लेकर स्पष्ट निर्देश हैं, जिसके मुताबिक जन गण मन को गाने से जानबूझकर रोकने या फिर किसी सभा में जन गण मन गाए जाने के दौरान रुकावट डालने पर तीन वर्ष की सज़ा और ज़ुर्माने का प्रावधान है। यानी जिन लोगों ने राष्ट्रगान को गाये जाने में रुकावट डाली वो अपराधी है।

 

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