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ZEE Jankari: आज क्‍यों रईसों का शौक बन चुका है चोरी!

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो Viral हो रहा है. ये वीडियो इंडोनेशिया के बाली का है. इस वीडियो में एक Hotel के कर्मचारी कुछ मेहमानों के सामान की तलाशी ले रहे हैं. तलाशी के दौरान ज्यादातर Bags से होटल से चुराई गई चीज़ें निकल रही हैं.

ZEE Jankari: आज क्‍यों रईसों का शौक बन चुका है चोरी!

भारत हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म की जन्मस्थली है. इन तीनो ही धर्मों में चोरी को पाप माना गया है. भगवान महावीर के पांच महाव्रतों में अस्तेय यानी चोरी ना करना शामिल है. इसी प्रकार बौद्ध धर्म के पंचशील सिद्धांतों में भी चोरी को धर्म के विरुद्ध माना गया है. भारत में मां बाप अपने बच्चों को जो सबसे जरूरी शिक्षाएं देते हैं, उनमें चोरी ना करना सबसे अहम है. यानी ईमानदारी और अच्छे आचरण के संस्कार बचपन से ही भारतीयों के मन में भर दिए जाते हैं. लेकिन आज के दौर में ईमानदारी एक दुर्लभ गुण है. पुराने ज़माने में चोर शब्द को गाली समझा जाता था. यहां तक कि हमने ऐसे किस्से भी सुने हैं, जिनमें लोग अपने घरों में ताले नहीं लगाते थे.. क्योंकि उन्हें चोरी का डर नहीं था. लेकिन अब सिर्फ गरीब लोग चोरी नहीं करते, बल्कि ये कई रईसो का भी शौक बन चुका है. इसलिए आज हम चोरी करने वाली सोच का 100 प्रतिशत ईमानदार विश्लेषण करेंगे.

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो Viral हो रहा है. ये वीडियो इंडोनेशिया के बाली का है. इस वीडियो में एक Hotel के कर्मचारी कुछ मेहमानों के सामान की तलाशी ले रहे हैं. तलाशी के दौरान ज्यादातर Bags से होटल से चुराई गई चीज़ें निकल रही हैं. जिस परिवार के सामान की तालाशी ली जा रही है, वो एक भारतीय परिवार है. इस तलाशी के दौरान लगभग हर Bag से Hotel से जुड़ा कुछ ना कुछ सामान बरामद किया गया. इनमें तौलिए, Soap Dispenser, Hangers, शीशे, और Showpiece शामिल थे. इस 140 Seconds के वीडियो ने 135 करोड़ भारतीयों का सिर शर्म से झुका दिया है.

तलाशी की शुरुआत में ये भारतीय परिवार चोरी की बात मानने से इनकार करता रहा. इस दौरान परिवार के कुछ सदस्य होटल कर्मचारियों को धौंस दिखाने की कोशिश भी करते हैं. लेकिन जैसे-जैसे Bags से चुराई गई चीज़ें बाहर निकलती हैं, इस परिवार के सुर बदलने लगते हैं. आखिर में परिवार के लोग Hotel वालों को पैसे चुकाने की बात कहते हैं. माफी भी मांगते हैं. लेकिन Hotel का स्टाफ भी साफ कर देता है कि बात पैसे की नहीं है, बल्कि बाली के सम्मान की है. यानी Hotel के ये कर्मचारी नुकसान की भरपाई के लिए ये तलाशी नहीं ले रहे थे, बल्कि वो अपने देश का सम्मान बचाने की कोशिश कर रहे थे.

हम ये बिल्कुल नहीं कह रहे हैं कि एक परिवार की हरकत की वजह से पूरे देश के लोगों पर सवाल उठाए जाएं, लेकिन भारत से बाहर गया एक-एक व्यक्ति भारतीय परंपरा और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है. इसलिए आज इस चोरी वाली मानसिकता की गहराई तक जाना ज़रूरी है. पहले आप ये वीडियो देखिए फिर हम इस विश्लेषण को आगे बढ़ाएंगे.

हमने इस वीडियो में दिख रहे भारतीय परिवार के सदस्यों के चेहरे छिपा दिए हैं. क्योंकि इनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं. हमें लगता है कि इनके चेहरे पहचानने से ज्यादा ज़रूरी है, इस मानसिकता का विश्लेषण करना.

भारत, राजा हरिशचंद्र की भूमि है, जिनके लिए सत्य और ईमानदारी से बढ़कर कुछ नहीं था. रामायणकाल में राम के छोटे भाई भरत ने सिंहासन पर खड़ाऊ रखकर राम के वनवास से लौटने का इंतज़ार किया था. 14 वर्षों के दौरान कभी भरत के मन में सत्ता हड़पने का विचार नहीं आया. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक Fiat कार खरीदने के लिए बैंक से Loan लिया था. लेकिन पूरा लोन चुकाने से पहले ही ताशकंद में उनका निधन हो गया. इसके बाद उनकी पत्नी ने अपनी पेंशन के पैसों से वो Loan चुकाया.

लेकिन ऐसा लगता है कि भारत में ईमानदारी का युग बीत चुका है और अब चोरी और बेइमानी हमारे समाज का अभिन्न अंग बन चुकी है. चोरी की ये घटनाएं सिर्फ Hotels में ही नहीं घटतीं, बल्कि trains और हवाई जहाज़ से भी हर साल यात्री लाखों रुपये की कीमत का सामान चुरा लेते हैं.

भारतीय रेलवे के मुताबिक साल 2018 में ट्रेनों से 2 लाख तौलिए, 81 हज़ार चादरें और 7 हज़ार कंबल चुरा लिए गए थे. इससे रेलवे को करीब 2 करोड़ 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ था. इतना ही नहीं Western Railway के मुताबिक यात्री हर साल औसतन 200 Mug, 1 हज़ार नल और यहां तक कि 300 Flush Pipes भी चुरा लेते हैं.
 
इसी तरह Hotels से भी लोग तौलिए, प्लेट, चम्मच, Bowls, हेयर ड्रायर और चाय की कैटल तक चुरा लेते हैं. कुछ Hotels ने तो इन वस्तुओं से Logos तक हटाने शुरू कर दिए हैं, ताकि चुराने वाले को उसकी कीमत का अंदाज़ा ना हो पाए और वो उसे सस्ता समझकर वहीं छोड़ दे. होटलों से ऐसी चोरी सिर्फ भारत में ही नहीं होती. American Hotel & Lodging Association के मुताबिक ग्राहकों द्वारा की गई चोरी की वजह से Hotels को हर साल 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो जाता है.

कुछ लोगों के लिए चोरी एक बीमारी होती है. जिसका इलाज किया जा सकता है. लेकिन जब किसी देश के लोगों को चोरी की लत लग जाती है.. तो फिर वो महामारी में बदल जाती है. इसलिए आज हम चोरी वाले इस संक्रामक रोग का इलाज ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. जनवरी 2018 में भी भारत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी ही खबर आई थी. लेकिन तब होटल से किसी भारतीय परिवार ने चोरी नहीं की थी. बल्कि देश के बड़े बड़े पत्रकारों और संपादकों ने ऐसा किया था.
 
ये घटना London के एक आलीशान होटल में घटी थी. इस होटल में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कार्यक्रम चल रहा था. इस कार्यक्रम में मौजूद कुछ भारतीय पत्रकारों ने चांदी के चम्मच और दूसरी Cutlery पर हाथ साफ कर दिया था. पत्रकारों को लगा था कि उन्हें कोई नहीं देख रहा, लेकिन ये सब होटल के CCTV में रिकॉर्ड हो रहा था. उस वक्त चोरी में शामिल एक पत्रकार को 50 Pounds का जुर्माना भी चुकाना पड़ा था.

यानी चोरी, सिर्फ गरीब लोग और अपराधी प्रवत्ति के लोग नहीं करते बल्कि अब अमीरों को भी इसमें किसी रोमांच का एहसास होने लगा है. दुनिया भर के होटलों से लोग ऐसी-ऐसी चीज़ें चुरा लेते हैं,  जिनकी List आपको हैरान कर देगी. ब्रिटेन के एक अखबार ने कुछ वक्त पहले Hotels में हुई बड़ी चोरियों पर एक List जारी की थी जिसके मुताबिक Hong Kong के एक होटल से 2 करोड़ रुपये कीमत की एक पेंटिंग चुरा ली गई थी.

अमेरिका के एक होटल से Concord Plane का 12 Foot लंबा एक मॉडल चुरा लिया गया था. बर्लिन के एक होटल के एक कमरे से एक मेहमान ने Bathroom से लगभग सभी नल, Shower Unit, टॉयलेट सीट और Sink तक चुरा ली थी. दुबई के एक होटल से एक मेहमान ने Minibar fridge और सोफा चुरा लिया था.

ये होटलों से चोरी के कुछ बड़े मामले हैं, इसके अलावा शैंपू, साबून, टॉयलेट पेपर्स, और शेविंग किट जैसी चीज़ें तो अक्सर लोग बड़े आराम से चुरा लेते हैं. चोरी चाहे एक रुपये की हो या लाखों की, ये भारतीय संस्कारों के खिलाफ है. लेकिन ऐसा लगता है कि भारत के लोग भ्रष्टाचार को स्वीकार कर चुके हैं. चोरी और भ्रष्टाचार को अब हमारे देश में बुरा नहीं माना जाता. बल्कि बड़े चोर और बड़े भ्रष्टाचारी.. आराम की जिंदगी बिताते हैं. इसलिए आज भारत के इस चोरी वाले चरित्र का विश्लेषण करना ज़रुरी है.

जब हम इस विश्लेषण के लिए रिसर्च कर रहे थे, तब हमें इंटरनेट पर एक वीडियो मिला, इस वीडियो में मज़ाकिया अंदाज़ में समझाया गया है कि Hotel से क्या क्या नहीं चुराना चाहिए. लेकिन इसमें एक गहरा संदेश भी छिपा है. पहले आप ये वीडियो देखिए फिर हम आपको चोरी और बेइमानी वाली समस्या के समाधान के बारे में बताएंगे.

ये विश्लेषण देखकर कुछ लोगों को शर्म आ रही होगी, तो कुछ लोगों को गुस्सा आ रहा होगा. लेकिन हम गुस्से और शर्म से आगे बढ़कर इसके समाधान की बात करेंगे. हमें लगता है कि देश के लोगों में संस्कार डालने के लिए हमें नैतिक शिक्षा पर ज़ोर देना होगा. स्कूलों में नैतिक शिक्षा को एक अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए. इसके लिए परीक्षा भी होनी चाहिए,और Practical के ज़रिए छात्रों के नैतिक चरित्र को आंका जाना चाहिए.

दूसरी बात ये है कि कानूनों का उल्लंघन करने वाले लोगों को नज़र अंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. ऐसा करने वालों का बाकायदा एक Data Base होना चाहिए. ताकि बार बार ऐसे अपराध करने वालों की पहचान की जा सके. अक्सर लोग पुलिस वालों और अधिकारियों को रिश्वत देकर बच निकलते हैं. इसलिए कानूनों का पालन भी सख्ती से कराए जाने की ज़रूरत है.

तीसरी और सबसे अहम बात ये है कि हमारे समाज में ऐसे अपराधों को लेकर ज़ीरो टोलरेंस होनी चाहिए. ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए. असहिष्णुता गैंग को ऐसे अपराधों के प्रति असहनशील होना चाहिए. क्योंकि जब किसी समाज में संस्कारों वाले ये छोटे छोटे बीज अंकुरित होते हैं तो वो समाज एक दिन नैतिकता के रास्ते पर खड़ा बरगद बन जाता है.

जब आप बतौर भारतीय नागरिक कोई खराब व्यवहार करते हैं तो देश की छवि भी बिगाड़ते हैं. जब कोई ऑटो वाला या टैक्सी वाला अपने कस्टमर से बदसलूकी करता है. जब कोई दुकानदार किसी पर्यटक के साथ बेईमानी करता है. जब आप सड़क पर, या किसी tourist place पर कोई गैरजिम्मेदार हरकत करते हैं तो आप अपने देश का नाम बदनाम करते हैं. भारत सरकार ने ''अतुल्य भारत'' नाम से एक कैंपेन चला रखा है. हर नागरिक को इसमें योगदान करना चाहिए.

वर्ष 2018 में भ्रष्टाचार को लेकर देशों की एक Ranking जारी की गई थी. इसमें पहले नंबर पर डेनमार्क, दूसरे नंबर पर न्यूजीलैंड और तीसरे नंबर पर फिनलैंड था. जबकि भारत को इसमें 78वां स्थान हासिल हुआ था. जबकि वर्ष 2019 में जारी की गई Global Competetiveness Report के मुताबिक सबसे सुरक्षित देशों में फिनलैंड सबसे ऊपर है. फिनलैंड में संगठित अपराध और आतंकवाद के बहुत कम मामले सामने आते हैं. फिनलैंड की पुलिस को भी बहुत भरोसेमंद माना गया है.

हम DNA में इन देशों के बारे में इसलिए बताते हैं क्योंकि इन देशों की छवि भी वहां के नागरिकों ने बनाई है. यहां तक कि जब भारतीय में भी इन देशों में जाकर बस जाते हैं तो वो पूरी सख्ती के साथ वहां के नियमों का पालन करते हैं. यानी संस्कारों का पालन करने वाला नागरिक तैयार करने की जिम्मेदारी सिर्फ परिवार की नहीं बल्कि देश की भी होती है.

कहते हैं फिल्में समाज का आईना होती हैं। फिल्मों में भी सामाजिक बुराइयों को प्राथमिकता से दिखाया जाता है. चोरी एक ऐसी ही समाजिक बुराई है. आप में से बहुत से लोगों ने 1975 में आई मशहूर फिल्म दीवार ज़रूर देखी होगी. उस फिल्म के अभिनेता के हाथ पर कुछ लोग ये लिख देते हैं कि उसका बाप चोर है. यानी चोरी को हमारे समाज में हमेशा हिकारत की नज़र से देखा जाता है.