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Exclusive: 'हिन्दू टेरर' पर बड़ा खुलासा, गृह मंत्रालय की एक मीटिंग के दस्तावेजों ने खोले अहम राज

'हिन्दू आतंक', 'हिन्दू टेरर' और 'भगवा आतंकवाद' जैसे शब्दों पर जी मीडिया ने एक बड़ा खुलासा किया है

Exclusive: 'हिन्दू टेरर' पर बड़ा खुलासा, गृह मंत्रालय की एक मीटिंग के दस्तावेजों ने खोले अहम राज
हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद ब्लास्ट में मुख्य आरोपी थे स्वामी असीमानंद (फाइल फोटो)

नई दिल्ली (मनीष शुक्ला): 'हिन्दू आतंक', 'हिन्दू टेरर' और 'भगवा आतंकवाद' जैसे शब्दों पर जी मीडिया ने एक बड़ा खुलासा किया है. जी मीडिया की पड़ताल में वह सच सामने आया है जो बताता है कि देश की सरकारें बदलने के साथ कैसे आतंकवाद का रंग भी बदल जाता है. हिन्दू टेरर पर जी मीडिया के इस खुलासे में यह भी पता चला है कि कैसे देश में लगातार सरकार सीबीआई और एनआईए जैसी महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए कर रही थीं. इसके लिए जी मीडिया ने गहरी पड़ताल की और उसके बाद जो सच सामने आया वह यह बताने के लिए काफी था कि यूपीए और एनडीए सरकारों ने हिन्दू टेरर और इस्लाम टेरर कार्ड क्यों खेले. और यह भी पता लगा कि धार्मिक आतंक की लड़ाई में अगर कुछ हारा है तो वह है सिर्फ और सिर्फ हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा.

यूं हुआ खुलासा
जी मीडिया के हाथ गृह मंत्रालय में अक्टूबर 2007 के अंत में आयोजित एक शीर्ष सुरक्षा मीटिंग के एजेंडे दस्तावेज लगे हैं. उस उच्चस्तरीय बैठक में 12 आतंकवादी हमलों के बारे में चर्चा हुई थी जिन्होंने राष्ट्र को हिलाकर रख दिया था, जिसमें 5 जुलाई 2005 को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद, अयोध्या पर अटैक से लेकर 14 अक्टूबर 2007 को लुधियाना के शिंगार सिनेमा हॉल में हुए बम विस्फोट तक की घटनाएं शामिल थीं. इस मीटिंग में 4 कथित हिन्दू आतंक के मामलों पर भी चर्चा की गई थी. लेकिन जी मीडिया को पड़ताल में मीटिंग के दस्तावेज में कहीं भी 'हिंदू आतंक' का का उल्लेख नहीं मिला. इससे भी ज्यादा उलझन भरा सच यह है कि दस्तावेज कहता है कि इन हमलों में पाकिस्तान के और पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी संगठन शामिल थे.

दस्तावेज से...
1- मालेगांव ब्लास्ट- 8/9/2006
9 गिरफ्तार व्यक्तियों ने कबूल किया कि वे सिमी से जुड़े हुए थे. उन्हें हथियार विदेश से मिला था. दो गिरफ्तार आरोपी शबीर मसिउल्लाह और शेख मोहम्मद अली आलम शेख 2006 में पाकिस्तान में हथियार प्रशिक्षण के लिए गए थे.

2- समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट- 18/2/2007
समझौता एक्सप्रेस विस्फोट और मक्का मस्जिद विस्फोट के बीच समानताएं हैं. दोनों में 6 वोल्ट की बैट्रियों और कच्चे लोहे की पाइप का इस्तेमाल किया गया. (मक्का मस्जिद विस्फोट एलईटी, जेईएम और बांग्लादेश स्थित इस्लामिक आतंकवादियों का काम है)

3- मक्का मस्जिद ब्लास्ट- 18/5/2007
जांच से पता चला है कि हमले के पीछे हैदराबाद का रहने वाला मोहम्मद शाहिद बिलाल था जो लश्कर ए तैयबा/जैश ए मोहम्मद कार्यकर्ता है. बमों को रखने का काम हमजा, कंचन, शरीफुद्दीन, और एक बांग्लादेशी ने किया था जो दिल्ली पुलिस के एक मामले में भी वांटेड है. स्थानीय पुलिस को संदेह है कि इस बम विस्फोट में स्थानीय तत्वों की मदद से बांग्लादेश स्थित इस्लामी आतंकवादियों का हाथ है.

4- अजमेर शरीफ दरगाह ब्लास्ट
सईद सलीम नाम का एक मृतक जो हैदराबाद से 7-8 साल पहले अजमेर आया था, जो एक पासपोर्ट एजेंट की तरह काम कर रहा था, एक संदिग्ध माना जा रहा है. इस विस्फोट और हैदराबाद में मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को हुए विस्फोट के बीच डिवाइस/सेलफोन और विस्फोटक, अखबार का एक टुकड़ा जिसमें डिवाइस लपेटा गया था और ब्लास्ट न होने वाली डिवाइस आदि के संदर्भ में बहुत सारी समानताएं हैं. संकेत हैं कि इन दोनों विस्फोटों में शाहिद बिलाल शामिल है, जो एक एलईटी/हूजी कार्यकर्ता है जो हैदराबाद का रहने वाला है और माना जा रहा है कि वर्तमान में कराची में है और इसके साथ लश्कर और हुजी-बीडी के आतंकवादी भी इन धमाकों में शामिल है.