क्या निर्भया के इंसाफ पर आपके सब्र का बांध टूट चुका है? Missed Call देकर ZEE NEWS की इस मुहिम का हिस्सा बनें

देश को दहला देने वाले निर्भया केस (Nirbhaya Case) में न्याय का इंतजार 7 साल से भी लंबा हो चुका है.

क्या निर्भया के इंसाफ पर आपके सब्र का बांध टूट चुका है? Missed Call देकर ZEE NEWS की इस मुहिम का हिस्सा बनें

नई दिल्ली: क्या आपको लगता है कि निर्भया (Nirbhaya Case) को इंसाफ का इंतजार बहुत लंबा हो गया है? क्या निर्भया के इंसाफ पर आपके सब्र का बांध टूट चूका है? हमारा मकसद है कि अब निर्भया के कातिलों को फांसी में एक पल की भी देरी नहीं होनी चाहिए. आप भी हमारी इस मुहिम से जुड़ सकते हैं. इसके लिए आपको 7834998998 पर मिसकॉल देनी है.  इसके अलावा आप.. #MaaKaSandesh पर Tweet करके भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं.  खबर लिखे जाने तक 7834998998 नंबर पर 4 लाख 16 हजार से ज्यादा मिस कॉल आ चुकी है. 

देश को दहला देने वाले निर्भया केस (Nirbhaya Case) में न्याय का इंतजार 7 साल से भी लंबा हो चुका है. इस कड़ी में निर्भया की मां आशा देवी आज ZEE न्यूज़ के शो DNA में राष्ट्र के नाम अपना संदेश दिया ( #MaaKaSandesh). निर्भया ने 16 दिनों तक मौत से संघर्ष किया था. इन 20621 दिनों में शायद ही कोई ऐसा दिन रहा होगा. साल वर्ष 2 महीनों और 4 दिन से अपनी बेटी के लिए न्याय का इंतजार कर रही है. 

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अगर हमारे देश का कानून और सिस्टम सही ढंग से काम करता तो आज तक निर्भया के दोषियों को फांसी हो चुकी होती. निर्भया की मां का हौंसला अब टूटने लगा है. फिलहाल नए डेथ वारंट के मुताबिक 3 मार्च को फांसी दी जाएगी. लेकिन अभी तक के रिकार्ड को देखते हुए ये फांसी इस दिन होगी इस पर भी शंका है.  आज देश की हर लड़की ये पूछ रही है कि आखिर मैं क्यों मरूं, अपराधी क्यों नहीं मरे? 

निर्भया की मां ने ज़ी न्यूज पर कहा, 'दोषियों के वकील ने जब सिस्टम के साथ मजाक करना शुरू किया तो मुझे लगा कि मुझे और संघर्ष करना है. मैं सर्घष कर रही हूं और करती रहूंगी. मुझे मेरी लड़ाई लड़ने के लिए कसूरवार साबित करने में लोग लगे हैं. मुझे कोसा जाता है.'

निर्भया की मां ने कहा, 'वो मुजरिम है उन्हें सजा जरूर मिलेगी. लेकिन उससे भी गुनहगार हमारा सिस्टम है. निर्भया के बाद से अब तक कितनी ही घटनाएं हो गई हैं लेकिन 2018 में जेल मैन्यूअल बन रहा है. ये जेल मैन्यूअल क्लियर हो, वो क्लियर हो उसमें विक्टिमों को राइट हो. तीनों अदालतों में केस घूम रहा है. सब लोग अपने हाथ बांधकर खड़े हैं कि हम कानून से बंधे हैं. मैं पूछना चाहती हूं कि क्या इन 4 दरिदों ने कानून का पालन किया था. जब भी डेथ वारंट जारी होता है तो हमें यह सुनाया जाता है कि यह महात्मा गांधी का देश है अंबेडकर का देश है. क्या हमारे बापू ने ऐसा कहा था कि आप महिलाओं के साथ अत्याचार करो और आपको बचाने के लिए कानून खड़ा है...

...मैं सरकार से कहना चाहती हूं कि जो भी कानून में लू पोल्स है उसे सुधारिए. कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है मैं कोर्ट से अनुरोध करना चाहती हूं कि देश के कानून पर विचार करे. निर्भया के दोषियों को 3 मार्च को फांसी हो और समाज में एक संदेश जाए. मैं सात साल से देख रही हूं, मैंने सुना था कि सुनवाई के तारीख मिलती है लेकिन मैंने कभी नहीं सुना था कि फांसी टालने के लिए भी तारीख पर तारीख मिलती है....

...फांसी तो कोर्टों में सुना दी जाती है लेकिन फांसी होती नहीं है. आप लोग देख रहे हैं कि मैं निर्भया के दोषियों को फांसी दिलाने के लिए कितना संघर्ष कर रही हूं. आज भी मुझे मेरी बेटी की चीख सुनाई देती है. उसका कटा हुआ शरीर मुझे दिखाई देता है. मैं अपने देश की बेटियों से कहना चाहती हूं. कि इंसाफ हमें मांगने से नहीं मिलेगा. हम इंसाफ छीन कर लेंगे...

...मैं आप सभी देशवासियों से अपील करती हूं कि जिस तरह से आपने निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए साथ दिया उसी तरह देश की सभी बेटियों को इंसाफ दिलाने की लड़ाई भी लड़नी होगी. अगर निर्भया के दोषियों को फांसी नहीं होती है तो देश में किसी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा. मैं सरकार और कोर्ट से प्रार्थना करती हूं कि कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है कोई नई गाइडलाइन ना आए और कोई ऐसा नियम ना आए जिससे निर्भया के दोषियों को सजा देने में और देरी हो. '