ZEE जानकारी: SPG का मतलब Special Protection For Gandhis तो नहीं हो गया

ऐसा लगता है कि हमारे देश के नेता VIP CULTURE को छोड़ना नहीं चाहते हैं. इसलिए उन्हें देश की महिलाओं से ज्यादा अपनी सुरक्षा की चिंता है. 

ZEE जानकारी: SPG का मतलब Special Protection For Gandhis तो नहीं हो गया

देश कैसे गुस्से से उबल रहा है ये आपने अभी देखा लेकिन अब हम आपको बताएंगे कि इस गुस्से की असली वजह क्या है. इस गुस्से की वजह ये है कि आप जिस हवा में सांस लेते हैं वो सुरक्षित नहीं है. आप जो पानी पीते हैं वो भी ज़हरीला है. आप अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं. आप अपना इलाज भी प्राइवेट अस्पताल में ही कराते हैं. अपने घरों की और दफ्तरों की सुरक्षा करने के लिए आप Private Security Guards रख लेते हैं. यानी सरकारें आपको हवा, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दे पा रहीं हैं.
 
आपके टैक्स के जिस पैसे से आपको ये सुविधाएं मिलनी चाहिए थी. उसका एक बड़ा हिस्सा VIPs की सुरक्षा पर खर्च हो रहा हैं. देश की महिलाएं घरों से बाहर निकलने में भी डरती हैं, क्योंकि हमारे देश में 521 लोगों की सुरक्षा के लिए सिर्फ एक पुलिसकर्मी है.

6 दिन पहले ही हैदराबाद में एक महिला की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी. इस वारदात को लेकर पूरा देश गुस्से में है. देश के हर शहर में महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं, धरना दे रही हैं और अपनी सुरक्षा की मांग कर रही हैं. लेकिन आज हमारे देश की संसद में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नहीं बल्कि गांधी परिवार की सुरक्षा पर बहस हुई. जिसे देखकर सवाल उठता है कि SPG का मतलब Special Protection For Gandhis तो नहीं हो गया है.

आज राज्यसभा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा में सेंध का मुद्दा उठा और कांग्रेस सांसदों ने इसे लेकर जमकर हंगामा किया. जबकि SPG सुरक्षा हटने के बाद भी प्रियंका गांधी की सुरक्षा में 80 से 100 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. ऐसे माहौल में अगर गांधी परिवार ये कहता कि हमारी सुरक्षा हटाकर देश की महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दीजिए तो पूरा देश उनका सम्मान करता. लेकिन ऐसे माहौल में भी कांग्रेस पार्टी के नेता सिर्फ गांधी परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. देश की महिलाओं की सुरक्षा पर बहस करने की बजाय वो आज भी SPG सुरक्षा पर बहस करते रहे.  क्योंकि पुलिस सुरक्षा हमारे देश के बड़े-बड़े नेताओं के लिए Status Symbol बन गया है. देश के ज्यादातर नेताओं को आपकी नहीं..सिर्फ अपनी सुरक्षा की परवाह है . इसलिए आज... जब राज्यसभा में SPG Ammendment Bill पेश किया गया तो इस पर जमकर हंगामा हुआ.  इस बिल के मुताबिक किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार को पद छोड़ने के बाद सिर्फ 5 वर्षों तक ही SPG सुरक्षा दी जाएगी. वो भी तब..जब पूर्व प्रधानमंत्री और उनका परिवार सरकार द्वारा आवंटित किए गए घर में रह रहे हों.

लेकिन ऐसा लगता है कि हमारे देश के नेता VIP CULTURE को छोड़ना नहीं चाहते हैं. इसलिए उन्हें देश की महिलाओं से ज्यादा अपनी सुरक्षा की चिंता है.  Bureau of Police Research and Development के मुताबिक भारत में 17 हज़ार 468 VIPS की सुरक्षा में 56 हज़ार 933 पुलिस कर्मी तैनात हैं. यानी हर VIP की सुरक्षा कम से कम तीन या उससे ज्यादा पुलिसकर्मी कर रहे हैं.

इसी संस्था के मुताबिक भारत में एक लाख लोगों की सुरक्षा के लिए सिर्फ 192 पुलिस कर्मी हैं. यानी एक पुलिस वाले के ऊपर 521 लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. जबकि संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक प्रति एक लाख लोगों पर कम से कम 222 पुलिसकर्मी होने चाहिए. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश भर की पुलिस फोर्स में सिर्फ 7.8 प्रतिशत.. महिला पुलिसकर्मी हैं.

इसके बावजूद हमारे देश में एक परिवार की सुरक्षा के लिए संसद में हंगामा किया जाता है. कांग्रेस के सांसद बिल के विरोध में वॉक आउट करने लगते हैं और गांधी परिवार के सदस्य आरोप लगाते हैं कि उनकी सुरक्षा बदले की कार्रवाई के तहत हटाई गई है. कांग्रेस के हंगामे का आधार 25 नवंबर को घटी एक घटना है. जब एक कार प्रियंका गांधी के घर में दाखिल हो गई थी. इस कार में सवार महिलाएं और बच्चे प्रियंका गांधी के साथ Selfie लेने की जिद कर रहे थे.

कांग्रेस के आरोपों का जवाब आज देश के गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में दिया. अमित शाह ने कहा कि गांधी परिवार की सुरक्षा इस बिल को पेश करने से पहले ही हटा ली गई थी. इसलिए इसे बदले की कार्रवाई कहना सही नहीं है. अमित शाह ने ये भी कहा कि जब वर्तमान प्रधानमंत्री अपना पद छोड़ेंगे तो पांच वर्षों के बाद उनकी SPG सुरक्षा भी हटा ली जाएगी.

पिछले कुछ दिनों से मीडिया के एक हिस्से के ज़रिए भी ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि गांधी परिवार की SPG सुरक्षा हटाने का फैसला गलत है. मीडिया का ये हिस्सा बार बार ये साबित करने की कोशिश कर रहा है कि गांधी परिवार की सुरक्षा में चूक हो रही है. जबकि सच ये है कि SPG की सुरक्षा हटने के बाद भी गांधी परिवार के सदस्य Z PLus सुरक्षा घेरे में रहेंगे. इस सुरक्षा घेरे में भी उनकी हिफाज़त के लिए 80 से 100 सुरक्षा कर्मी मौजूद रहेंगे.

एक अनुमान के मुताबिक भारत में आम लोगों की सुरक्षा पर..प्रति व्यक्ति तीन रुपये प्रतिदिन खर्च किए जाते हैं, जबकि एक VIP की सुरक्षा पर 4 हज़ार 500 रुपये प्रतिदिन खर्च होते हैं. यानी आम आदमी के मुकाबले 1500 गुना ज्यादा. फिर भी एक परिवार देश के लोगों की नहीं बल्कि सिर्फ अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है.
 
कुल मिलाकर ऐसा लगता है कि महिला सुरक्षा की बातें करना देश के नेताओं की मजबूरी है. जबकि असल में उन्हें सिर्फ अपनी सुरक्षा की चिंता है. उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आज की तारीख में देश की महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी अपनी जान हथेली पर लेकर निकलते हैं. क्योंकि सड़क पर किसका सामना किस खतरे से हो जाए..ये कोई नहीं जानता.

भारत में जब आम लोगों को सुरक्षा नहीं मिलती तो कोई सवाल नहीं उठाता..लेकिन हमारे देश में कुछ दिनों पहले इस विषय पर बहस हो रही है कि लोकतंत्र खतरे में है. आजकल पूरे देश में डर पर चर्चा Trend कर रही है. कुछ लोगों का मानना है कि देश में डर का माहौल है. लोगों में सरकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं है. कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि सरकार से कोई सवाल नहीं पूछ सकता है. इस पूरे मामले पर बहस तब शुरू हुई. जब पिछले हफ्ते उद्योगपति राहुल बजाज ने गृह मंत्री अमित शाह से ये सवाल पूछा कि आखिर उनकी सरकार के खिलाफ लोगों को कुछ भी बोलने में डर क्यों लगता है? आइए सबसे पहले हम उद्योगपति राहुल बजाज का सवाल और गृह मंत्री अमित शाह का जवाब सुनते हैं.