ZEE NEWS की नई पेशकश REGIMENT, जानें भारतीय सेना की हर रेजिमेंट की पूरी कहानी

गणतंत्र दिवस पर ZEE NEWS आपके लिए विशेष सीरीज 'रेजिमेंट' लाया है. जानें रेजिमेंट की शुरुआत कैसे हुई और सेना में रेजिमेंट क्यों बनाई गई?

ZEE NEWS की नई पेशकश REGIMENT, जानें भारतीय सेना की हर रेजिमेंट की पूरी कहानी
आखिर रेजिमेंट सिस्टम कहां से आया, जानें इस सीरीज में...(प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: जिनका वस्त्र एक, शस्त्र एक है. जिनका प्रशिक्षण एक, परंपरा एक, जिनका युद्धघोष एक और उद्देश्य एक है, उसे रेजिमेंट कहते हैं. अगर भारतीय सेना एक विराट वृक्ष है तो रेजिमेंट उस वृक्ष की मजबूत शाखाएं. भारतीय सेना की हर रेजिमेंट गौरव और बहादुरी की मिसाल है. हर रेजिमेंट की गर्व करने वाली अपनी यात्रा है. हर रेजिमेंट का अपना गौरवशाली इतिहास है. हर रेजिमेंट की अपनी विशेष पहचान है.

यश, कीर्ति और पराक्रम से भरी सेना की अलग-अलग रेजिमेंट के सुनहरे अतीत, चमकते वर्तमान और बुलंद भविष्य को अब आप ZEE NEWS पर देखेंगे. ज़ी न्यूज़ दिखाएगा भारतीय सेना की हर रेजिमेंट की वो कहानी जो अब तक आपने ना सुनी होगी और ना ही देखी होगी. हम जानते हैं कि आपको अपनी सेना पर गर्व है और अगर आप सेना के पराक्रम, परंपरा और देशप्रेम के अलग-अलग अंदाज़ को देखना चाहते हैं. उनसे सीखना चाहते हैं और उनकी चुनौतियों को महसूस करना चाहते हैं तो ZEE NEWS की ये विशेष सीरीज रेजिमेंट आपके लिए है. 

अनेकता में एकता भारत की विशेषता है. यहां सबसे ज्यादा धर्मों के लोग हैं. 3000 से ज्यादा जातियां हैं. 19 हज़ार से ज्यादा भाषाएं और बोलियां हैं. कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को जीवंत करती हैं और विविधता में एकता के दर्शन में भारतीय सेना भी कदमताल करती है. आपको ये जानकर गर्व होगा कि भारतीय सेना में भी हर धर्म, हर जाति, हर राज्य और हर भाषा के जवानों की शक्ति के संगम की गंगा बहती है. आपको ये जानकर गर्व होगा कि भारतीय सेना करीब 13 लाख जवानों के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है. जिस तरह 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग हैं, ठीक उसी तरह भाषा, क्षेत्र और धर्म के आधार पर बने 31 इंफेंट्री रेजिमेंट्स भारतीय सेना के अभिन्न अंग हैं. 
 
भारतीय सेना की हर रेजिमेंट की कहानी देखने से पहले अब आपके लिए रेजिमेंट का इतिहास समझना जरूरी है. आपने सिख रेजिमेंट...गोरखा रेजिमेंट...राजपूताना राइफल्स रेजिमेंट...जाट रेजिमेंट...मराठा रेजिमेंट समेत कई रेजिमेंट की बहादुरी के अनगिनत किस्से सुने होंगे लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि रेजिमेंट शब्द आखिर आया कहां से? रेजिमेंट फ्रेंच भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है, किसी खास इलाक़े से भर्ती किए सैनिकों का संगठन। अब सवाल ये उठता है. 

आखिर रेजिमेंट सिस्टम कहां से आया? भारत में रेजिमेंट की शुरुआत कैसे हुई? अलग-अलग रेजिमेंट की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? जाति-भाषा और क्षेत्र के आधार पर रेजिमेंट आखिर क्यों बनाई गई ? रेजिमेंट का अलग-अलग युद्धघोष क्यों होता है? 

इन सारे सवालों के जवाब के लिए आपको इतिहास में 16वीं शताब्दी का पन्ना पलटना होगा. 16 शताब्दी तक यूरोप में ज्यादातर सेनाएं छोटी होती थीं जो राजा के नियंत्रण में काम करने वाले बड़े जमींदारों के अधीन होती थीं. इनमें पेशेवर सैनिकों के साथ ऐसे भी सैनिक होते थे जो किसी खास मिशन या खास समय के लिए सेना में शामिल होते थे और फिर अपने पुराने व्यवसाय में लग जाते थे.

17 वीं शताब्दी से सेना के संगठित स्वरूप की शुरूआत हुई. इस दौरान किसी खास इलाक़े से भर्ती हुए सैनिकों के छोटे दस्ते बनाए गए. एक दस्ते में सैनिकों की संख्या 1000 तक होती थी. इन्हें साथ में प्रशिक्षित किया जाता था, वेतन मिलता था और इस दस्ते का नाम अक्सर भर्ती वाली जगहों या उस अधिकारी के नाम पर होता था जो इनकी भर्ती और प्रशिक्षण का ज़िम्मेदार होता था. 17वीं शताब्दी में भारत के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग राजाओं का राज हुआ करता था और हर राजा की अपनी सेना हुआ करती थी. कुछ राजाओं की सेनाएं बहुत छोटी और कई राजाओं की सेनाएं बहुत विशाल हुआ करती थीं. जैसे मराठों की सेना, निजाम की सेना और मुगलों की सेना. इनमें सबसे बड़ी तादाद मुगल फौजों की थी. 

भारत में रेजिमेंट सिस्टम की शुरुआत अंग्रेजों ने की। ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत आकर अपनी सेना तैयार की जो रेजिमेंट सिस्टम पर आधारित थी. शुरुआत में इस रेजिमेंट में सिर्फ यूरोपीय सैनिक होते थे लेकिन बाद में उनमें भारतीय सैनिक शामिल होते गए. अब सवाल ये उठता है कि अंग्रेजों ने रेजिमेंट में भारतीय सैनिक को शामिल करने का फैसला क्यों किया? जानकारों की मानें तो इसके पीछे अंग्रेजों की सोची-समझी रणनीति थी. ताकतवर से दोस्ती करो, उसे अपनी सेना में शामिल करो और जरूरत पड़ने पर भारतीयों को भारतीयों के खिलाफ ही इस्तेमाल करो. इसी मकसद के साथ अंग्रेज जिस भी राज्य से संधि करते उस राज्य के सैनिकों से रेजिमेंट बना लेते. 

भारतीय सेना की पहली रेजिमेंट मद्रास रेजिमेंट को माना जाता है. भारत में ब्रिटिश सेना के अधिकारी मेजर स्ट्रिंगर लॉरेंस ने वर्ष 1758 में मद्रास रेजिमेंट को दो बटालियन के साथ शुरू किया. मेजर स्ट्रिंगर लॉरेंस को भारत में ब्रिटिश काल का पहला कमांडर इन चीफ कहा जाता है. इसके ठीक 3 साल बाद वर्ष 1761 में पंजाब रेजिमेंट अस्तित्व में आई. वर्ष 1778 में राजपूत रेजिमेंट की पहली बटालियन  और वर्ष 1795 में जाट रेजिमेंट की नींव पड़ी. इस तरह भारतीय सेना में रेजिमेंट्स की शुरूआत हुई और उनमें से कई रेजिमेंट्स आज भी भारतीय सेना की हिस्सा हैं. 

ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) चितरंजन सावंत का कहना है, "एक स्थान के लोग जिनका हित एक बात पर हुआ करता था. उन सबको गठित करके इकट्ठा किया और उनकी एक सेना बनाई गई. पहले इसे वाहिनी कहा जाता था. बाद में जब अंग्रेज आए तब उसे जाति और क्षेत्र के आधार पर गठित किया और उद्देश्य के आधार पर गठित किया और इसलिए नाम रखा रेजिमेंट. जैसा कि हम आपको पहले बता चुके हैं कि रेजिमेंट्स का नाम खास इलाक़ों, धर्म और जाति के नाम पर रखा गया. जैसे मद्रास रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट, महार रेजिमेंट. 

भारतीय सेना में गार्ड्स जैसी रेजिमेंट भी हैं जो कि किसी इलाक़े या धर्म के नाम पर नहीं हैं. वहीं ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट भी भारतीय सेना की हिस्सा है जिसका नाम एक हथियार के नाम पर है. सिग्नल, एयर डिफेंस, आर्डिनेंस, इंजीनियर जैसी रेजिमेंट भी भारतीय सेना की अहम अंग है. हर रेजिमेंट का अपना इतिहास तो है ही अलग-अलग पहनावा, भाषा, परंपराएं हैं, खानपान की आदतें हैं. यहां तक कि हर रेजिमेंट की वर्दी में भी कुछ अलग विशेषता है और वो दूसरे से कुछ अलग है. 

हर रेजिमेंट का अपना आदर्श वाक्य यानी Motto होता है और हर रेजिमेंट का अपना युद्धघोष यानी War Cry होता है. युद्धघोष से रेजिमेंट के जवानों में नये जोश, जज्बा और ऊर्जा का संचार होता है. युद्धघोष रेजिमेंट के पराक्रम और आक्रामकता की पहचान है तो आदर्श वाक्य से रेजिमेंट के उद्देश्य का पता चलता है. सावंत के मुताबिक, "हर सैनिक के लिए रेजिमेंट उसका परिवार है. एक परिवार की तरह ही रेजिमेंट का हर सैनिक अपने साथी सैनिकों के सुख-दुख का साथी होता है. हर सैनिक देश का सम्मान, अपनी सेना का सम्मान और अपनी रेजिमेंट की प्रतिष्ठा के लिए जीता और शहीद होता है."