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मैं इस तरह से कर्नाटक का किंग नहीं बनना चाहता था: एचडी कुमारस्‍वामी

कर्नाटक चुनावों में भले ही बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन अंतिम रूप से तीसरे नंबर पर रहने वाली जेडीएस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर बाजी मारी और अब इस पार्टी के नेता एचडी कुमारस्‍वामी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बनने जा रहे हैं.

मैं इस तरह से कर्नाटक का किंग नहीं बनना चाहता था: एचडी कुमारस्‍वामी
एचडी कुमारस्‍वामी बुधवार को कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेंगे.(फाइल फोटो)

कर्नाटक चुनावों से पहले जेडीएस नेता एचडी कुमारस्‍वामी ने कहा था कि वह चुनाव बाद किंगमेकर नहीं किंग बनेंगे. चुनाव हुए और भले ही बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन अंतिम रूप से तीसरे नंबर पर रहने वाली जेडीएस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर बाजी मारी और अब इस पार्टी के नेता एचडी कुमारस्‍वामी राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बनने जा रहे हैं.

इसी कड़ी में द इकोनॉमिक टाइम्‍स को दिए एक इंटरव्‍यू में जब उनसे पूछा गया कि आखिर उनकी बात सच निकली कि वह किंगमेकर नहीं किंग बनेंगे तो इसका जवाब देते हुए एचडी कुमारस्‍वामी ने कहा कि मैं जनादेश से कर्नाटक का किंग बनना चाहता था, इस तरह से नहीं. पहली बार 2006 में राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से मैं पहली बार मुख्‍यमंत्री बना था. अब इस वक्‍त मेरी परिस्थिति फिर वैसी ही है. जनता के आशीर्वाद से ऐसा नहीं हो रहा है. कर्नाटक के लोग ये क्‍यों नहीं सोचते कि मैं कैसा महसूस करता हूं? वे लोग मुझ पर भरोसा क्‍यों नहीं करते? मैं राजनेता नहीं हूं...मैं एक भावुक व्‍यक्ति हूं. मैं लोगों की परेशानियां और अपेक्षाएं समझता हूं. लोगों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही देख लिया है...मैंने सोचा था कि लोग मुझे अबकी बार चांस देंगे लेकिन मुझे अबकी पिछली बार की तुलना में भी कम सीटें मिलीं.

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इस पर जब कुमारस्‍वामी से पूछा गया कि फिर आपने इस गठबंधन को क्‍यों स्‍वीकार किया? इसका जवाब देते हुए जेडीएस नेता ने कहा कि दरअसल ये मेरा कोई निजी विकल्‍प नहीं है. इस वक्‍त देश में एक नए बदलाव की बात की जा रही है, एक तबका इसकी अपेक्षा कर रहा है. विपक्ष के कई नेता भी ऐसा सोच रहे हैं कि देश और समाज विभाजित हो रहा है और इसमें बदलाव की जरूरत है. इस लिहाज से वे आपस में हाथ मिलाकर इसको दुरुस्‍त करना चाहते हैं. मैंने इस भावना को समझते हुए देश को एक राजनीतिक संदेश देने का काम किया है.

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गुलाम नबी आजाद का फोन
कुमारस्‍वामी से जब पूछा गया कि कांग्रेस(78) के पास जेडीएस(38) से ज्‍यादा नंबर थे, तो फिर आपने इसकी अगुआई का आग्रह क्‍यों किया? इसका जवाब देते हुए उन्‍होंने कहा कि मैंने इसकी मांग नहीं की थी. कांग्रेस खुद ही इस ऑफर के साथ मेरे पास आई. गुलाम नबी आजाद ने मुझे फोन कर पांच साल के टर्म के लिए बिना शर्त समर्थन की पेशकश की. मैंने उनसे समय मांगा लेकिन उन्‍होंने कहा कि आपको इसी वक्‍त हां या ना में जवाब देना होगा. मैंने अपने पिता(पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा) से विमर्श किया और उन्‍होंने जो कहा, उसका अनुकरण किया.

डिप्‍टी सीएम पद पर पेंच!
इस बीच बुधवार को कांग्रेस-जेडीएस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और जी परमेश्वर को दिल्ली आने से मना कर दिया है. पहले कर्नाटक कांग्रेस के सभी सीनियर नेता दिल्ली आकर राहुल गांधी से मंत्रियों के नाम और विभाग और बंटवारे पर बातचीत करना चाहते थे. लेकिन राहुल गांधी ने कह दिया है कि पहले कांग्रेस-जेडीएस विश्वास मत हासिल कर ले, उसके बाद आगे की चीजें तय होंगी.

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इसका कारण ये है, क्योंकि कांग्रेस और JDS गठबंधन में मंत्रियों के नाम विभाग और उपमुख्यमंत्री को लेकर विवाद शुरू हो गया है. कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ वित्त मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, PWD और गृह मंत्रालय खुद अपने पास रखना चाहते हैं. वहीं कांग्रेस पार्टी उपमुख्यमंत्री के अलावा गृह मंत्रालय ऊर्जा मंत्रालय और तमाम महत्पूर्ण विभाग को अपने पास रखना चाहती है.