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कर्नाटक के मामले में यथास्थिति रहेगी बरकरार, 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई

सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने व्‍यवस्‍था देते हुए कहा कि मौजूदा हालात के मद्देनजर पर ‘Status Quo’ यानी यथास्थिति बरकरार रखी जाए. यानी स्पीकर न तो बागी विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेंगे और न ही अयोग्यता के मसले पर.

कर्नाटक के मामले में यथास्थिति रहेगी बरकरार, 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई
कर्नाटक मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी.(फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: कर्नाटक के बागी विधायकों की याचिका पर जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो उनके वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि स्पीकर इस्तीफ़े मंज़ूर न करके उन्हें अयोग्य घोषित करना चाह रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि इस्तीफे पर फैसला लेने का विधानसभा में स्पीकर के अधिकार क्षेत्र से कोई लेना देना नहीं है. स्पीकर का मकसद इस्तीफे को लंबित रखकर विधायकों को अयोग्य करार देने का है ताकि ऐसे में इस्तीफे निष्प्रभावी हो जायें. अगर स्पीकर इस्तीफे पर फैसला नहीं लेते तो ये सीधे-सीधे अदालत की अवमानना है.

स्पीकर की तरफ़ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील देनी शुरू की तो चीफ जस्टिस ने पूछा क्या सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं स्पीकर?  इस पर वकील सिंघवी ने कहा कि विधायकों के इस्तीफे देने का मकसद अयोग्य करार दिए जाने की कार्रवाई से बचना है. 1974 में संविधान संशोधन के जरिये ये साफ कर दिया गया था कि इस्तीफे पर फैसला लेने से पहले ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है वो सही है या नहीं.

सुनवाई में तीसरे नंबर पर कर्नाटक चीफ मिनिस्टर की तरफ़ से वकील राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा कि आखिर किस आधार पर संविधान के आर्टिकल 32 का हवाला देकर ये याचिका दायर की गई है? कैसे सुप्रीम कोर्ट के दखल का औचित्य बनता है? जो वजह विधायकों की ओर से बताई गई है, वो तो इस दायरे में नहीं आती. ये स्पीकर का दायित्व है कि वो ये सुनिश्चित करे कि इस्तीफे सही हैं या नहीं.

राजीव धवन ने जिरह करते हुए कहा कि बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट से क्‍या अपेक्षा रखते हैं? वे कहते हैं कि सरकार विफल हो गई तो क्‍या वे चाहते हैं कि इसको और फेल करने में हमारी मदद कीजिए? वे राजनीतिक मामले में कोर्ट को बेवजह घसीट रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि स्पीकर ने खुद साफ किया है कि वो विधायकों के इस्तीफे और उन्हें अयोग्य करार दिए जाने की मांग पर जल्द से जल्द फैसला लेंगे, इसमे कोर्ट के आदेश की कोई ज़रूरत नहीं है.

सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने व्‍यवस्‍था देते हुए कहा कि मौजूदा हालात के मद्देनजर पर ‘Status Quo’ यानी यथास्थिति बरकरार रखी जाए. यानी स्पीकर न तो बागी विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेंगे और न ही अयोग्यता के मसले पर. 16 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई होगी और कोर्ट संवैधानिक मुद्दों पर विचार करेगा.

कर्नाटक के बागी विधायकों के खिलाफ 400 कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, बोले- 'हमें भी सुनें'

400 कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने दाखिल की याचिका
इससे पहले कर्नाटक में गहराए सियासी संकट के बीच शुक्रवार को फिर एक नया मोड़ आया. शुक्रवार को करीब 400 कांग्रेसी कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और उन्होंने कर्नाटक के बागी विधायकों के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी. याचिका में जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोर्ट से कहा, 'हमें भी सुना जाए.' सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जवाब देते हुए कहा, 'पहले बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई होगी, तब आपको भी सुन लेंगे.'

स्‍पीकर का रुख
बता दें कि कर्नाटक के 10 बागी विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों को शाम छह बजे तक स्‍पीकर के सामने पेश होने को कहा था. साथ ही स्‍पीकर को कोर्ट ने निर्देश दिया था कि उसके बाद वह इस्‍तीफे पर फैसला लें और फैसले की कॉपी कोर्ट में सौंपे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्नाटक विधानसभा स्पीकर ने शीर्ष अदालत से अपने आदेश को वापस लेने की मांग की थी. स्पीकर ने कहा था कि कोर्ट इस तरह का आदेश पारित नहीं कर सकता.स्पीकर की तत्काल सुनवाई की मांग गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी थी.हालांकि कोर्ट ने स्पीकर को याचिका दायर करने की इजाजत दे दी थी.

(इनपुट: सुमित कुमार के साथ)