ट्विन्स प्रेगनेंसी में चाहते हैं नार्मल डिलीवरी तो बातों का रखें ख्याल

जुड़वा बच्चों (Twins) के साथ नार्मल डिलीवरी (Normal Delivery) होना थोड़ा हैरान करने वाली बात लगती है. मगर ये इतना मुश्किल भी नहीं है. सही जानकारी और उचित देखभाल के साथ ये संभव है.

ट्विन्स प्रेगनेंसी में चाहते हैं नार्मल डिलीवरी तो बातों का रखें ख्याल
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली: जुड़वा बच्चों (Twins) के साथ नार्मल डिलीवरी (Normal Delivery) होना थोड़ा हैरान करने वाली बात लगती है. मगर ये इतना मुश्किल भी नहीं है. सही जानकारी और उचित देखभाल के साथ ये संभव है. कई महिलाओं ने नार्मल डिलीवरी से जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है. यदि आप बहुत जल्द जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली हैं तो आप इस बात ध्यान रखें कि ट्विन प्रेगनेंसी कोई हाई रिस्क प्रेगनेंसी नहीं होती है जब तक कि डॉक्टर आपको प्रेगनेंसी हटाने के लिए ना कहें. हां ये जरूर है कि इस प्रकार की प्रेगनेंसी थोड़ी चैलेंजिंग होती है. कई हॉस्पिटलों में नार्मल डिलीवरी करवाने की कोशिश की जाती है भले ही वो ट्विन प्रेगनेंसी ही क्यों ना हो.

जुड़वा बच्चों के साथ गर्भवती होने का मतलब सी-सेक्शन (C-section) होता है. छठे सप्ताह में पहला अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) होता है, जिसमें पता चलता है कि प्रेगनेंसी सिंगल है ट्विन्स. ट्विन्स होने पर डॉक्टर सबसे पहले ये देखते हैं कि ये किस तरह की ट्विन्स प्रेगनेंसी है. यदि दोनों बच्चों का सैक और प्लेसेंटा दोनों ही अलग-अलग हैं तो ये खबर मां के लिए ही नहीं बल्कि डॉक्टर के लिए भी खुशखबरी से कम नहीं होती है.

ट्विन्स प्रेगनेंसी तीन तरह की होती है
-पहली जिसमें की सैक (Sac) और प्लेसेंटा (Placenta) दोनों एक होते हैं. ये सबसे रिस्की प्रेगनेंसी मानी जाती है. इसमें अक्सर एक ही भ्रूण के बच पाने की संभावना रहती है.

-दूसरी ट्विन्स प्रेगनेंसी में सैक अलग-अलग होते हैं लेकिन प्लेसेंटा एक होता है. इसमें दोनों ही भ्रूण सुरक्षित रहते हैं लेकिन इन्हें सी-सेक्शन द्वारा ही बाहर निकाला जा सकता है.

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-तीसरी प्रेगनेंसी में सैक और प्लेसेंटा दोनों ही अलग-अलग होते हैं. इसे सबसे सुरक्षित ट्विन्स प्रेगनेंसी माना जाता है.

यदि मां पूरी तरह स्वस्थ है और उसे प्री-एक्लेमप्सिया (Preeclampsia) और डाइबिटीज (Diabetes) नहीं है तो प्रसव पीड़ा में मां को ज्यादा दिक्कत नहीं आती है. दोनों बच्चों के सिर नीचे हों, जिसे वर्टेक्स कहा जाता है. ये सबसे अनुकूल स्थिति है. कभी-कभी पहला बच्चा वर्टेक्स होता है लेकिन दूसरा ब्रीच होता है, ऐसे में नार्मल डिलीवरी मुश्किल हो जाती है.

अगर आप ट्विन्स प्रेगनेंसी के तीसरी स्थिति में हैं तो आपकी नार्मल डिलीवरी की संभावना है. आप नार्मल डिलीवरी के लिए कमोड की जगह इंडियन टॉयलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं मगर तभी जब आपका डॉक्टर आपको इसकी सलाह दे, वॉक जरूर करें.

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