विदेशी फूड पर क्यों करें जेब खाली, जब आपके किचन में ही छुपे हों सुपरफूड्स

हम भारतीयों के खाने में जब तक घी, तेल, नमक, मिर्च, हल्दी आदि ना हो तब तक स्वाद नहीं आता है. मसाले और जायके से भरपूर इंडियन खाना दुनियाभर में मशहूर है और आप घी और चावल से परहेज करते हैं.

विदेशी फूड पर क्यों करें जेब खाली, जब आपके किचन में ही छुपे हों सुपरफूड्स

नई दिल्ली: हम भारतीयों के खाने में जब तक घी, तेल, नमक, मिर्च, हल्दी आदि ना हो तब तक स्वाद नहीं आता है. मसाले और जायके से भरपूर इंडियन खाना दुनियाभर में मशहूर है और आप घी और चावल से परहेज करते हैं. आपको लगता है कि जरा-सा भी घी ज्यादा हो गया तो मोटे हो जाएंगे. ये केवल मिथ है जबकि चावल और दही ऐसे सुपरफूड हैं जिन्हें ना सिर्फ खाने से ही नहीं लाभ पहुंचता है बल्कि इनको चेहरे पर लगा लीजिए तो यह फेस पैक का भी काम करेगा. जानिए भारतीय पारंपरिक सुपरफूड्स के फायदे-

चावल
चावल को कूलिंग फूड भी कहा जाता है. ये पेट को ठंडा रखता है और खाने में भी बहुत हल्का होता है. चावल की सबसे बड़ी खासियत है कि ये एक प्री बायोटिक है. ध्यान रहे कि प्री बायोटिक और प्रो बायोटिक दोनों ही अलग चीजे हैं. इन्हें साथ में लिया जाए तो ये कई तरह के लाभ पहुंचाता है. आपको बता दें कि प्रो बायोटिक एक तरह का बैक्टीरिया है. जितनी भी चीजों को खमीर करके बनाया जाता है वे सभी प्रो बायोटिक होती हैं. जबकि प्रो बायोटिक को पोषित करने के लिए प्री बायोटिक लिया जाता है इसीलिए गर्मियों में दही-चावल लेना सबसे हल्का पौष्टिक आहार होता है.

देसी गाय का घी
देसी गाय का दूध, घी, मू़त्र और उसके गोबर को थेराप्यूटिक माना जाता है. इसमें मौजूद एसिड घी को लायकोफिट (Lycofit) बनाता है. घी कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है. इनफर्टिलिटी और पीसीओडी में ये लाभ पहुंचाता है. घी में विटामिन ए और विटामिन डी होता है.

दही
सही मायने में भारत का कोई पारंपरिक प्रो बायोटिक है तो वो दही है. ये हमारी आंतों के लिए अच्छा होता है. कैंसर और डाइबिटीज के मरीजों के लिए प्रो बायोटिक अच्छा है. वजन कम करना हो तो प्रो बायोटिक जरूर लें. डिप्रेशन में दही काफी फायदेमंद साबित होता है. दही सेरोटीन नामक हार्मोन के स्राव को बढ़ाता है, इसे हैप्पी हार्मोन भी कहते हैं.

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नारियल
नारियल का पानी हो या मलाई दोनों खाने से हमें लाभ मिलता है. इसमें मीडियम चेन फैटी एसिड होता है जो फैट की तरह शरीर में जमा नहीं रहता है. पेट में जाने के बाद ये तुरंत बर्न हो जाता है. नारियल में लॉरिक एसिड (Lauric acid) होता है. ये भी एक तरह का फैटी एसिड है जो वजन कम करता है. ये हार्ट डिजीज और डिप्रेसन के रिस्क को कम करता है.

सब्जा
ये मीठी तुलसी के बीज होते हैं, इसे मीठी तुलसी भी कहा जाता है. इनमें फाइबर प्रचूर मात्रा में पाया जाता है. सब्जा के बीज, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन ए, विटामिन के, कार्बोहइड्रेट, गुणकारी ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई खनिज तत्वों से युक्त ठंडी तासीर वाले होते हैं. सब्जा के बीज में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण होता है. ये वजन कम करने में मदद करता है. ये शरीर को ठंडा रखता है इसीलिए गर्मियों में इसे खासतौर पर खाना चाहिए.

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