मुंह में दिखे ये सामान्य लक्षण तो हल्के में ना लें, आ सकता है Heart Attack
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मुंह में दिखे ये सामान्य लक्षण तो हल्के में ना लें, आ सकता है Heart Attack

हार्ट अटैक की कई वजह हो सकती हैं, उसमें से एक आपके मुंह से भी जुड़ी हुई है. एक शोध में यह पाया गया है कि मसूड़ों की सूजन और आर्टरियल इनफ्लेमेशन के बीच एक मजबूत कनेक्शन है, जो हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल से जुड़ी दूसरी बीमारियों का कारण हो सकता है.

मुंह में दिखे ये सामान्य लक्षण तो हल्के में ना लें, आ सकता है Heart Attack

वॉशिंगटन: हार्ट अटैक (Heart Attack) आजकल एक आम बीमारी बन गई है. युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आने लगे हैं. हालांकि यदि समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. आमतौर पर हार्ट अटैक के लिए हाई ब्लड प्रेशर, हाई कॉलेस्ट्रोल, जेनेटिक डिसॉर्डर या बढ़ती उम्र जैसे कारणों को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन कुछ ऐसे भी संकेत हैं जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर हमारा उन पर ध्यान ही नहीं जाता. 

दोनों बीमारियों के बीच मजबूत कनेक्शन

एक स्टडी के मुताबिक, मुंह के अंदर नजर आने वाले कुछ लक्षण भी हार्ट अटैक के चेतावनी संकेत हो सकते हैं. फोरसिथ इंस्टिट्यूट और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा कंडक्ट जर्नल ऑफ पीरियोडोंटल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पीरियडोंटाइटिस से जूझ रहे लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है. डॉक्टर्स ने मसूड़ों की सूजन और आर्टरियल इनफ्लेमेशन (धमनियों में सूजन) के बीच एक मजबूत कनेक्शन पाया है, जो हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल से जुड़ी दूसरी बीमारियों का कारण हो सकता है.

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304 लोगों पर किया गया Test

इस स्टडी की शुरुआत में 304 वॉलंटियर्स की धमनियों और मसूड़ों का टोमोग्राफी स्कैन किया गया. चार साल बाद फिर से इन लोगों की स्कैनिंग की गई तो 13 लोगों में दिल से संबंधित बीमारियों का जोखिम ज्यादा देखा गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि पीरियोडोंटल इन्फ्लेमेशन से ग्रसित लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है.

ऐसे मरीजों को नहीं कोई खतरा 

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि पीरियोडोंटल रोगों से पहले जिन लोगों को हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो रही थीं, उनमें दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा नहीं था. जिन लोगों के मसूड़ों में सूजन देखी गई, केवल उन्हीं में ऐसी दिक्कत पाई गई. शोधकर्ता मानते हैं कि पीरियोडोंटल इन्फ्लेमेशन हड्डियों के माध्यम से संकेत देने वाली कोशिकाओं को एक्टिवेट करती है, जिससे धमनियों में इन्फ्लेममेश की समस्या बढ़ जाती है.

शोधकर्ताओं ने दी ये चेतावनी 

शोधकर्ता चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति दिल से जुड़ी बीमारियों के प्रति संवेदनशील है तो उसे पीरियोडोंटल डिसीज को इग्नोर नहीं करना चाहिए. आप चाहें तो इसके लिए डेंटिस्ट की मदद भी ले सकते हैं. डेंटिस्ट आपके मसूड़ों की जांच करने के बाद संभावित खतरों के बारे में बता सकता है और वक्त रहते उसका इलाज करा सकते हैं. इसलिए यदि आपको भी ऐसे संकेत मिलते हैं, तो तुरंत आपके डॉक्टर से संपर्क करें.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इनकी पुष्टि नहीं करता है.)

 

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