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स्मार्टफोन की लत है नोमोफोबिया, नहीं छूटी लत तो हो सकती हैं ये 4 गंभीर बीमारियां

50 प्रतिशत उपभोक्ता मोबाइल पर गतिविधि शुरू करने के बाद फिर कंप्यूटर पर काम शुरू कर देते हैं. भारत में इस तरह स्क्रीन स्विच करना आम बात है. मोबाइल फोन का लंबे समय तक उपयोग गर्दन में दर्द, आंखों में सूखेपन, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम और अनिद्रा का कारण बन सकता है. 

स्मार्टफोन की लत है नोमोफोबिया, नहीं छूटी लत तो हो सकती हैं ये 4 गंभीर बीमारियां
लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल गर्दन, कंधे, पीठ, कोहनी, कलाई और अंगूठे के लंबे और पुराने दर्द सहित कई समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाता है.

नई दिल्ली: भारत में तकनीक की लत खतरनाक दर से बढ़ रही है और इस कारण युवा नोमोफोबिया का शिकार तेजी से हो रहे हैं. लगभग तीन वयस्क उपभोक्ता लगातार एक साथ एक से अधिक उपकरणों का उपयोग करते हैं और अपने 90 प्रतिशत कार्यदिवस उपकरणों के साथ बिताते हैं. यह बात एडोब के एक अध्ययन में सामने आई है.

अध्ययन के निष्कर्ष ने यह भी संकेत दिया कि 50 प्रतिशत उपभोक्ता मोबाइल पर गतिविधि शुरू करने के बाद फिर कंप्यूटर पर काम शुरू कर देते हैं. भारत में इस तरह स्क्रीन स्विच करना आम बात है. मोबाइल फोन का लंबे समय तक उपयोग गर्दन में दर्द, आंखों में सूखेपन, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम और अनिद्रा का कारण बन सकता है. 20 से 30 वर्ष की आयु के लगभग 60 प्रतिशत युवाओं को अपना मोबाइल फोन खोने की आशंका रहती है, जिसे नोमोफोबिया कहा जाता है.

उन्होंने कहा कि 30 प्रतिशत मामलों में स्मार्टफोन अभिभावक-बच्चे के बीच संघर्ष का एक कारण है. अक्सर बच्चे देर से उठते हैं और अंत में स्कूल नहीं जाते हैं. औसतन लोग सोने से पहले स्मार्ट फोन देखते हुए बिस्तर में 30 से 60 मिनट बिताते हैं. 

स्मार्टफोन की लत को रोकने के लिए कुछ टिप्स :
इलेक्ट्रॉनिक कर्फ्यू : मतलब सोने से 30 मिनट पहले किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग न करना.
फेसबुक की छुट्टी : हर तीन महीने में 7 दिन के लिए फेसबुक प्रयोग न करें.
सोशल मीडिया फास्ट : सप्ताह में एक बार एक पूरे दिन सोशल मीडिया से बचें.
अपने मोबाइल फोन का उपयोग केवल तब करें जब घर से बाहर हों. 
एक दिन में तीन घंटे से अधिक कंप्यूटर का उपयोग न करें.
अपने मोबाइल टॉक टाइम को एक दिन में दो घंटे से अधिक तक सीमित रखें.
अपने मोबाइल की बैटरी को एक दिन में एक से अधिक बार चार्ज न करें.