अमेरिका से की कानून की पढ़ाई, अब इस वजह से चर्चा में हैं कुमार शानू

अमेरिका से कानून की पढाई कर लौटने वाला वह वकील जो पटना में अपने सामाजिक कायों के कारण बना चर्चा का विषय

अमेरिका से की कानून की पढ़ाई, अब इस वजह से चर्चा में हैं कुमार शानू

नई दिल्ली: बिहार के ही रहने वाले कुमार शानू को वैसे तो सूचना के अधिकार (RTI) और जनहित याचिका (PIL) के प्रभावी उपयोग के लिए जाना जाता है लेकिन हाल के दिनों में वह अन्य कारणों की वजह से लगातार चर्चा में बने थे.

पिछले दिनों पटना में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से हालात बहुत खराब हो गए थे.इसके प्रभाव से हजारों लोग अपने घरों में बंद रहने के लिए मजबूर थे. नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स(NDRF) की टीमें पटना में लोगो को उनके घरों से बाहर निकलने के लिए तैनात थीं. कुछ लोगों की नज़रें उसी NDRF के जवानों के साथ दिन-रात काम कर रहे 24-25 साल के कुमार शानू नामक एक लड़के पर पड़ गई.

इसी साल अमेरिका के प्रतिष्ठित फ्लेचर स्कूल से कानून की उच्च शिक्षा प्राप्त कर बिहार लौटे हैं शानू
जैसे ही नाव से घर-घर जा कर लोगो को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने वाले शानू की वास्तविक पहचान का पता चला, लोग हैरत में आ गए. नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के डायरेक्टर जनरल सत्या प्रधान ने स्वयं शानू को ट्वीट कर धन्यवाद किया. शानू का ना सिर्फ छात्रवृति पर अमेरिका के फ्लेचर स्कूल ऑफ़ लॉ एंड डिप्लोमेसी में चयन हुआ बल्कि वहाँ छात्रसंघ चुनाव जीत छात्रहित में उन्होंने अनेक कदम उठाए. उनकी नेतृत्व क्षमता और अध्ययन के दौरान सामुदायिक एवं नागरिक सेवा के लिए उन्हें उनके विश्वविद्यालय ने सम्मानित भी किया.

जनहित के कई मामलों में हुई है जीत
कुमार शानू की गिनती भारत में सूचना के अधिकार और जनहित के लिए अदालतों में कार्य करने वाले कुछ गिने चुने वकीलों में होती है. भारत के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(CBSE) समेत अनेक शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा RTI के तहत उत्तरपुस्तिका नहीं मुहैया कराने के खिलाफ शानू की उच्चतम न्यायालय में लड़ाई ने लाखों छात्रों को उनके "मौलिक अधिकार" का प्रयोग करने में सक्षम बनाया है. इसके अलावा, उच्चतम न्यायलय और दिल्ली उच्च न्यायलय में इनके अनेको क़ानूनी मामलों का राष्ट्रव्यापी असर होता रहा है. शानू सरकार को भी कानूनी मुद्दों पर सलाह देते रहे हैं.

ऐसी शिक्षा व्यर्थ है अगर अपनी मिट्टी और लोगों की समस्याओं से मुंंह मोड़ लिया
अमेरिका से हमेशा के लिए बिहार लौट जाने के बारे में पूछने पर शानू कहते हैं “अब जीवन में पहले से कही ज्यादा चुनौतियाँ आएँगी. कुछ लोग मेरे निर्णय को बेवकूफी की संज्ञा भी दें रहे हैं. अगर साधारण परिवार के बच्चों की शिक्षा के लिए संघर्ष करना, लोगो की मूलभूत चिकित्सा सुविधाओं के लिए कार्य करना, छोटी अदालतों में वंचितों के न्याय के लिए लड़ना बेवकूफी है तो मुझे बेवकूफ कहलाने में गर्व की अनुभूति होगी. इसी मिट्टी में पैदा हुए और दुनिया के सर्वोत्तम शैक्षिक संस्थानों में ज्ञान अर्जित करने वाले हम जैसे लोग अगर अपनी मिट्टी और लोगो की समस्याओं से मुँह मोड़ लेंगे तो ऐसी शिक्षा व्यर्थ है“