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राजस्थान: बीजेपी के सोलह सिपहसालार हुए तय, 9 का अभी भी इंतजार!

राजस्थान में टिकट वितरण की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों और आम लोगों के बीच कैंडिडेट को लेकर चर्चा तेज है.

राजस्थान: बीजेपी के सोलह सिपहसालार हुए तय, 9 का अभी भी इंतजार!
प्रदेश में मिशन-25 के लक्ष्य के साथ BJP उतरी है.

शशि मोहन, जयपुर: राजस्थान में नरेन्द्र मोदी के सोलह सिपहसालारों के चेहरे सबके सामने आ गए हैं. बीजेपी की पहली लिस्ट में इन लोगों को टिकट दे दिया गया है और इसके जरिये पार्टी ने मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश भी की है. लेकिन अभी 9 सीट पर पार्टी के चेहरों का इन्तज़ार है. इन 9 सीट में उपचुनाव में हारी अलवर की सीट भी शामिल है. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर क्या कारण रहे जो पार्टी को 9 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान रोकना पड़ा?

14 चेहरे मौजूदा सांसदों के
पहली बार साल 2014 के लोकसभा चुनाव में ऐसा मौका पड़ा जब बीजेपी लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीट जीती. पार्टी एक बार फिर से प्रदेश में मिशन-25 को दोहराना चाहती है. इसके लिए बीजेपी ने अपने 16 चेहरे तय भी कर दिये हैं. इन सोलह सिपहसालारों में 14 चेहरे तो मौजूदा सांसदों के ही हैं. 

अजमेर और झुझुनूं में पार्टी ने बदला चेहरा 
अमजेर और झुझुनूं पर पार्टी ने चेहरे बदल दिये हैं. 9 सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशियों के नाम तय होने हैं और राजस्थान में पार्टी के लोकसभा चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं की बाकी के नौ नाम भी जल्द ही जारी कर दिये जाएंगे.

9 उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज
पच्चीस में से नौ टिकिट रोके जाने के बाद चर्चा इस बात की है कि आखिर इन नौ सीटों पर नाम रोके क्यों गए हैं? इस लिस्ट में मोदी सरकार के मन्त्री सीआर चौधरी का नाम भी शुमार है. नागौर से सांसद चौधरी का नाम पहली लिस्ट में नहीं आने के बाद चर्चा इस बात की है कि क्या यहां से पार्टी के मन में किसी और चेहरे को जगह देने की मंशा है? यहां से पार्टी के पास सीआर चौधरी के साथ ही लक्ष्मण मुण्डेर का नाम भी है. नागौर के कार्यकर्ताओं के साथ ही कुछ जगह नेताओं में सीआर चौधरी को लेकर नाराज़गी बताई जाती है, लेकिन इस मसले पर खुलकर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है. इतना ज़रूर तय है कि पार्टी यहां से कोई बड़ा जाट चेहरा ही उतारना चाहती है.

चूरू से मौजूदा सांसद राहुल कस्वां का नाम भी पहली लिस्ट में नहीं आया है. यहां चर्चा इस बात की है कि चूरू का टिकट अटकने के पीछे राजेन्द्र राठौड़ हैं या खुद राहुल कस्वां? सवाल यह भी कि कहीं पूर्व सांसद राम सिंह कस्वां के सांसद पुत्र को अमित शाह की सभा में की गई गलती भारी तो नहीं पड़ने वाली?

 दरअसल विधानसभा चुनाव से पहले 30 नवम्बर को चूरू के सुजागनढ़ में हुई सभा में अमित शाह के भाषण के दौरान राहुल कस्वां मंच पर बात कर रहे थे और उसी दौरान अमित शाह ने उन्हें चुप रहने के लिए टोका भी था. चर्चा यह भी है कि इसी अनुशासनहीनता के कारण उनका टिकट काट दिया गया.