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कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री बाई फुले की जमानत जब्त, बहराइच में BJP के अक्षयवर लाल की जीत

कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री बाई फुले 34,383 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहीं और अपनी जमानत नहीं बचा सकीं. वह वर्ष 2014 में इसी सीट से सांसद चुनी गयी थीं.

कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री बाई फुले की जमानत जब्त, बहराइच में BJP के अक्षयवर लाल की जीत
अक्षयवर लाल को पांच लाख 25 हजार 512 मत मिले.

बहराइच (उप्र): बहराइच लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार अक्षयवर लाल विजयी घोषित कर दिये गये हैं. जिलाधिकारी शम्भू कुमार ने बताया कि लाल ने अपने निकटतम प्रत्याशी सपा-बसपा- रालोद गठबंधन के शब्बीर वाल्मीकि को लगभग एक लाख 28 हजार 669 मतों से हराया. अक्षयवर लाल को पांच लाख 25 हजार 512 मत मिले. वहीं, वाल्मीकि को तीन लाख 96 हजार 843 वोट हासिल हुए. कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री बाई फुले 34,383 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहीं और अपनी जमानत नहीं बचा सकीं.

वह वर्ष 2014 में इसी सीट से सांसद चुनी गयी थीं. वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गयी थीं.

बहराइच लोकसभा सीट यूपी की 56वीं लोकसभा सीट है, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. साल 2009 तक यह सीट सामान्य श्रेणी की थी, लेकिन 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में इस लोकसभा सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया. इस लोकसभा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की पांच विधानसभा सीटें आती हैं. साल 2014 में सावित्री बाई फुले यहां से चुनाव जीता था, जो अब बीजेपी से बागी हो गई हैं.

ऐसे मिला नाम
कई पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, यह धरती भगवान ब्रह्मा की राजधानी, ब्रह्मांड के निर्माता के रूप में प्रसिद्ध थी. इसे गंधर्व वन के हिस्से के रूप में भी जाना जाता था. ऐसी मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने यहां के वन क्षेत्र को ऋषियों और साधुओं की पूजा और तपस्या के लिए विकसित किया था. इसलिए इसे ब्रह्माच भी कहा जाता है. कुछ अन्य इतिहासकारों का मानना है कि मध्ययुगीन काल में यह जगह 'भर' राजवंश की राजधानी के रूप में विख्यात थी. इसलिए इसे 'भारिच' भी कहा गया जो आगे चलकर बहराइच के रूप में चर्चित हो गया.

2014 में ये था जनादेश
2014 में बीजेपी यहां कमल खिलाने में सफल हुई थी. बीजेपी की सावित्री बाई फुले ने यहां से जीत दर्ज की थी. उन्होंने सपा के शब्बीर अहमद को हराकर जीत हासिल की थी, हालांकि अब साध्वी सावित्री ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. 

ऐसा है राजनीतिक इतिहास
साल 1952 में यहां पहली बार चुनाव हुए थे. पहले आम चुनाव में बहराइच लोकसभा सीट पर रफी अहमद ने जीत हासिल की थी.