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बिहार : मोदी से नहीं आपस में ही लड़ता रह गया महागठबंधन, NDA ने दिखाई एकजुटता

महागठबंधन की बात करें तो चुनाव मैदान में ये कभी भी अपने नाम के अनुरूप नहीं दिखे. वहीं, एनडीए की बात करें तो इनके सभी शीर्ष नेता मंच से भी एकजुटता दिखाते रहे. 

बिहार : मोदी से नहीं आपस में ही लड़ता रह गया महागठबंधन, NDA ने दिखाई एकजुटता
बिहार में नहीं दिखी महागठबंधन की एकजुटता. (फाइल फोटो)

पटना : लोकसभा चुनाव में पूरे देश में बीजेपी का डंका बजा है. रुझानों में बीजेपी अकेली 300 से अधिक सीटें जीतती दिख रही है. वहीं, अगर बिहार की बात करें तो यहां की 40 लोकसभा सीटों पर बीजेपी, जेडीयू और लोजपा गठबंधन प्रचंड जीत दर्ज करती दिख रही है. 40 में से 39 सीट पर एनडीए बढ़त बनाए हुई है. वहीं, सिर्फ एक किशनगंज सीट पर कांग्रेस जीतती दिख रही है. रुझानों के मुताबिक, आरजेडी का खाता तक नहीं खुला है.

चुनाव खत्म हो चुके हैं. आकलनों का दौर जारी है. चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता की बात खूब हुई, लेकिन जब वाकई एकजुटता दिखाने का समय आया तो तस्वीर कुछ और दिखी. बिहार में आरजेडी, कांग्रेस, आरएलएसपी, हम और वीआईपी ने मिलकर महागठबंधन को शक्ल दिया. लेकिन ये मिलकर भी बीजेपी और एनडीए के विजयी रथ को रोकने में असफल रहे.

महागठबंधन की बात करें तो चुनाव मैदान में ये कभी भी अपने नाम के अनुरूप नहीं दिखे. वहीं, एनडीए की बात करें तो इनके सभी शीर्ष नेता मंच से भी एकजुटता दिखाते रहे. राहुल गांधी ने बिहार में पांच रैली और एक रोड शो किया. इनमें से सिर्फ दो रैली में तेजस्वी यादव उनके साथ मंच साझा किए. अगर आप मंच से भी साथ नहीं दिखते हैं तो जनता को कैसे बता पाएंगे कि एकजुट हैं.

राहुल गांधी के समस्तीपुर और पाटलिपुत्र की रैली में और पटना में शत्रुघ्न सिन्हा के लिए आयोजित रोड शो में ही सिर्फ तेजस्वी यादव शामिल हुए. वहीं, अगर हम बात एनडीए की करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में कुल 8 रैली की. इनमें से सिर्फ बक्सर को छोड़ दें तो सभी रैलियों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान भी साथ रहे और सभा को संबोधित किया.