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चुनावनामा 1996: जब 16 साल संघर्ष के बाद मिली सत्‍ता 13 दिनों में चली गई...

1996 से 1998 के बीच देश ने तीन प्रधानमंत्री देखे. इन प्रधानमंत्रियों में अटल बिहारी वाजपेयी, एचडी देवेगौड़ा और आईके गुजराल का नाम शामिल है. 

चुनावनामा 1996: जब 16 साल संघर्ष के बाद मिली सत्‍ता 13 दिनों में चली गई...
1996 से 1998 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी, एचडी देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजरात ने प्रधानमंत्री का पद संभाला.

नई दिल्‍ली: लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को सत्‍ता से दूर करने के लिए इन दिनों सभी विपक्षी दल एक सुर में बोल रहे हैं. कुछ ऐसी ही स्थिति बीजेपी के सामने 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान पैदा हुई थी. जब‍ 16 साल के संघर्ष के बाद बीजेपी 161 सीटें जीत कर सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी. चूंकि 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पास 161 सर्वाधिक सांसद थे, लिहाजा सरकार बनाने का पहला मौका अटल बिहारी वाजपेयी को मिला. हालांकि, यह बात दीगर है कि संसद में विस्‍वास मत हासिल न कर पाने के चलते अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व वाली बीजेपी की सरकार महज 13 दिनों में गिर गई. लिहाजा, आज हम चुनावनामा में 1996 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद देश में उत्‍पन्‍न हुए राजनैतिक परिदृश्‍य के बारे में बात कर रहे हैं. 

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अल्‍पमत में होने के बावजूद राव की सरकार ने पूरे किए 5 साल
1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 232 संसदीय सीट जीतकर देश की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्‍या के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पद के लिए अपना अगला उम्‍मीदवार पीवी नरसिंह राव का चुना. लोकसभा में अल्‍पमत में होने के बावजूद पीवी नरसिंह राव के नेतृत्‍व वाली कांग्रेस सरकार ने 5 साल सफलता पूर्वक पूरे किए. वहीं, इस समायावधि में बीजेपी का राम मंदिर के मुद्दे को न के केवल राजनैतिक आंदोलन के रूप में खड़ा कर दिया, बल्कि पांच राज्‍यों में अपनी सरकार बनाने में भी सफल हो गए. 1992 में बाबरी मस्जिद टूटने के बाद पीवी नरसिंह राव की सरकार ने बीजेपी की इन पांचों राज्‍यों की सरकार को बर्खास्‍त कर दिया था. 1996 में इसका राजनैतिक फायदा सीधे तौर पर बीजेपी को मिला. 

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16 साल के संघर्ष के बाद बीजेपी को मिली केंद्र की सत्‍ता 
1980 में गठन के बाद बीजेपी ने अपना पहला चुनाव 1984 में लड़ा था. 1984 के इस चुनाव में बीजेपी को महज दो सीटें ही हासिल हुई थी. इसके बाद, देश के हर लोकसभा के साथ बीजेपी के सांसदों का आंकड़ा संसद में बढ़ता गया. 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सर्वाधिक 161 सीटों पर जीत दर्ज की और संख्‍याबल में देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई. इस चुनाव में कांग्रेस 141 सीटें जीतकर दूसरे पायदान में खड़ी थी. इसके अलावा, ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) को 4, सीपीआई को 12, सीपीएम को 32, जनता दल को 46 और समता पार्टी को 8 सीटें हासिल हुई थीं. 1996 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में बीजेपी की पहली सरकार गठित हुई. बहुमत न होने के चलते यह सरकार महज 13 दिनों में गिर गई. 

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दो साल के अल्‍प समय में देश ने देखे थे तीन प्रधानमंत्री 
अटल बिहारी वाजपेयी के इस्‍तीफे के बाद संयुक्‍त मोर्चा गठबंधन बना. संयुक्‍त मोर्चा में शामिल होने वाली पार्टियों में नेशनल फ्रंट, वाम दल, तमिल कांग्रेस, डीएमके, असम गण परिषद सहित कई छोटे दल शामिल थे. इस गठबंधन की अगुवाई जनता दल के नेता एचडी देवेगौड़ा कर रहे थे. कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद एचडी देवेगौड़ा ने एक जून 1996 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. एचडी देवेगौड़ा की सरकार ने महज 11 महीने में दम तोड़ दिया. जिसके बाद 21 अप्रैल 1997 में इंद्र कुमार गुजरात को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. इंद्र कुमार गुजराल की सरकार मुश्‍किल से एक साल ही चल पाई. संयुक्‍त मोर्चे में फूट के चलते देश में एक बार फिर 1998 में लोकसभा चुनाव कराए गए.