close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

चुनावनामा 1984: सहानूभूति की 'आंधी' के बीच कांग्रेस ने दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी जीत

लोकसभा चुनाव 2019 में बहुमत हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे के साथ गठबंधन कर रहे हैं. वहीं 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले दम 404 सीटें जीती थीं. इस चुनाव में देश के करीब 11.54 करोड़ मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था.

चुनावनामा 1984: सहानूभूति की 'आंधी' के बीच कांग्रेस ने दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी जीत
1984 के लोकसभा चुनाव में 5312 में से 4263 उम्‍मीदवार अपनी जमानत बचाने में भी असफल रहे थे.

नई दिल्‍ली:  लोकसभा चुनाव 2019 में सभी राजनीतिक दल बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए गठबंधन का सहारा ले रहे हैं. देश में लंबे अरसे के बाद बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी बहुमत का आंकड़ा जुटा पाई थी. इस लोकसभा चुनाव में सभी की निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि कोई भी राजनीतिक दल बहुमत का जादूई आंकड़ा जुटा पाएगा या नहीं. यदि हम बहुमत के आंकड़ों की बात करे तो आजादी के बाद सबसे अब तक सबसी बड़ी जीत और सबसे मजबूत बहुमत का आंकड़ा 1984 के लोकसभा चुनाव में आया था. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 404 सीटों पर जीत दर्ज की थी. आजादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी भी इतना बड़ी सफलता हासिल करने में विफल रही थीं. चुनावनामा में आज आपको बताते हैं कि 1984 का वह लोकसभा चुनाव, जिसमें कांग्रेस ने 82 फीसदी सीटों पर जीत दर्ज की थी. 

यह भी पढ़ें: चुनावनामा: जब चुनाव से पहले दो फाड़ में बंट गई इंदिरा की कांग्रेस और जनता पार्टी...

यह भी पढ़ें: चुनावनामा 1980: 'जनता' सरकार की एक गलती से सहानभूति में बदली इंदिरा के प्रति जनता की नाराजगी

इंदिरा की हत्‍या के बाद देश में चली सहानभूति की लहर
आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी भले ही 1977 का लोकसभा चुनाव हार गई हों, लेकिन 1980 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने एक बार फिर सत्‍ता वापसी में कामयाब रहीं. इंदिरा के लिए यह कार्यकाल उनके लिए आसान नहीं था. इसकी बड़ी वजह थी पंजाब का आतंकवाद. आतंकवादी दिन ब दिन सरकार के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहे थे. इसी क्रम में, आतंकवादियों ने अमृतसर के स्‍वर्ण मंदिर पर अपना कब्‍जा जमा लिया था. स्‍वर्ण मंदिर को आतंकवादियों के चंगुल से छुड़ाने के लिए इंदिरा गांधी ने सेना को ऑपरेशन ब्‍लू स्‍टार चलाने का आदेश दिया. जिसके बाद, सेना ने स्‍वर्ण मंदिर में प्रदेश किया और आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया. इंदिरा के इस फैसले से सिख समुदार एक गुट नाराज हो गया. इसी नाराजगी का नतीजा था कि 31 अक्‍टूबर 1984 को इंदिरा की हत्‍या उनके अंगरक्षकों ने गोली मारकर कर दी.  

यह भी पढ़ें: चुनावनामा: 'छोटी बेटी के शहर' से इंदिरा को मिला था राजनैतिक पुनर्जीवन

यह भी पढ़ें: चुनावनामा: क्‍या गुजरात में बीजेपी दोहरा पाएगी 2014 का करिश्‍मा!

बड़े बेटे राजीव गांधी को मिली इंदिरा की सियासी गद्दी 
इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद उनके बड़े बेटे को उनकी सियासी गद्दी मिली. राजीव गांधी को देश के प्रधानमंत्री के दौरा पर शपथ दिलाई है. शपथ ग्रहण करने के बाद राजीव गांधी के सामने दो बड़ी चुनौतियां थीं. पहली चुनौती थी सिख समुदाय के खिलाफ चल रहे कत्‍लेआम को रोकना और दूसरा चंद महीनों बाद होने वाले लोक सभा चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाना. वहीं, इंदिरा की हत्‍या के बाद पूरे देश में न केवल शोक का माहौल था, बल्कि पूरे देश की सहानभूति राजीव गांधी के साथ थी. राजीव गांधी को इस सहानभूति का राजनीतिक फायदा मिला. राजीव के प्रति इस सहानभूति का ही असर था कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में वह सफलता हासिल की, जो कभी जवाहर लाल नेहरू और खुद इंदिरा गांधी भी हासिल नहीं कर सकीं थी. राजीव गांधी के नेतृत्‍व में कांग्रेस पार्टी ने एतिहासिक जीत दर्ज की. कांग्रेस की 1984 की जीत का रिकार्ड आज भी कायम है. 

यह भी पढ़ें: चुनावनामा: BJP के उदय के साथ 34 महीनों में बिखर गई देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार

यह भी पढ़ें: चुनावनामा 1977: कांग्रेस का अस्तित्‍व बचाने के लिए इंदिरा को लेनी पड़ी दक्षिण की शरण

491 सीटों पर लड़ा चुनाव और 404 पर दर्ज की जीत
1984 के इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 491 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार खड़े किए. इस चुनाव में सहानभूति की लहर का असर था कि कांग्रेस ने 404 सीटों पर एतिहासिक जीत दर्ज की. इस चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में कुल 11 करोड़ 54 लाख 78 हजार 267 मतदाताओं ने वोट किया. कांग्रेस करीब 82 फीसदी सीटें जीतने में कामयाब रही. 1984 के इस चुनाव में बीजेपी भी पहली बार अपना चुनाव लड़ रही थी. इस चुनाव में बीजेपी ने कुल 224 उम्‍मीदवार उतारे थे. जिसमें सिर्फ दो उम्‍मीदवारों को जीत मिली थी. वहीं इस चुनाव में सीपीआई को छह, आईसीएस को 4, जेएनपी को 10 और एलकेडी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. इस चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर 22 सीटों के साथ सीपीएम सामने आई थी. इस चुनाव में 5312 में से 4263 उम्‍मीदवार अपनी जमानत बचाने में भी असफल रहे थे.