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Exclusive : इस चुनाव में ध्रुवीकरण स्वाभाविक, 2014 से ज़्यादा सीटें मिलेंगी : योगी आदित्यनाथ

 लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने इन दिनों चुनावी दौरे पर हैं. चुनाव कैंपेन के बीच Zee News संवाददाता विशाल पाण्डेय से योगी आदित्यनाथ ने ख़ास बातचीत की. 

Exclusive : इस चुनाव में ध्रुवीकरण स्वाभाविक, 2014 से ज़्यादा सीटें मिलेंगी : योगी आदित्यनाथ
योगी ने कहा कि वह 2019 के चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

लखनऊ: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने इन दिनों चुनावी दौरे पर हैं. पहले चरण का मतदान गुरुवार को होगा. बीजेपी के सामने 2014 का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है. चुनाव कैंपेन के बीच Zee News संवाददाता विशाल पाण्डेय से योगी आदित्यनाथ ने ख़ास बातचीत की. 

सवाल- विकास के मुद्दे पर तो आप चुनाव लड़ ही रहे हैं. इसके अलावा ऐसे कौन से बड़े मुद्दे हैं जो इस लोकसभा चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं?

जवाब- पूरे देश के अंदर मुद्दा तो विकास की ही है. मोदी जी के नेतृत्व में देश ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं. इन उपलब्धियों को लेकर और बीजेपी अपनी भावी नीतियों को लेकर चुनावी मैदान में है. विकास, सुशासन और राष्ट्रवाद हमारा मुद्दा है. लेकिन जो लोग विकास, सुशासन और राष्ट्रवाद पर विश्वास नहीं करते, वो लोग समाज को जाति, मज़हब के आधार पर बांटने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे किसी भी गलत प्रयासों को देश अब बर्दाश्त नहीं करेगा. पूरे देश के अंदर एक माहौल है कि एक कॉमन मैन पीएम के रूप में मोदी जी के फिर से चाहता है. स्वाभाविक रूप से बीजेपी मोदी जी के नाम पर, काम पर और 5 वर्ष की उपलब्धियों के आधार पर इस चुनावी मैदान में है. हमें जो देश के अंदर रूझान देखने को मिल रहे हैं, मैं उस रूझान के आधार पर कह सकता हूं कि बीजेपी को 2014 से ज़्यादा सीटें मिलेंगी. 

सवाल- आपका जो 2 साल का कार्यकाल यूपी में रहा है, उसकी ये सबसे बड़ी परीक्षा है. इस चुनाव को लेकर कैसी तैयारी आपकी है? क्या आपका सिलेबस पूरा हो चुका है या कुछ अधूरा है?
जवाब-
2019 के चुनाव के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं. हमारे सरकार के 2 वर्ष का कार्यकाल सपा बसपा के 20 वर्ष के कार्यकाल पर भारी पड़ता है. यूपी में कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन किया, उनसे बेहतर हमारा शासन रहा है. मोदी सरकार के 5 साल कांग्रेस के 55 सालों पर भारी पड़ता है. स्वभाविक है कि हमारे पास उपलब्धियों की एक लंबी फ़ेहरिस्त है, जिसके बल पर हम जनता के सामने है. जनता का व्यापक समर्थन बीजेपी को मिल रहा है.

सवाल- योगी जी, अगर यूपी की बात करें तो यहां पर सपा बसपा एक साथ आ गए हैं? क्या इस गठबंधन से बीजेपी को डर है या जीत का कॉन्फिडेंस है?
जवाब-
देखिए, चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़े जा रहे हैं. एक सामान्य व्यक्ति भी जानता है कि बुआ-बबुआ का गठजोड़ किस बात को लेकर है. यह गठबंधन भ्रष्टाचार का है और यूपी के विकास के बाधित करने वाला गठबंधन है. ये गठबंधन उन अराजक शक्तियों को बढ़ाना देने वाला है जिन्होंने प्रदेश के पहचान का संकट खड़ा किया था. यूपी में जो दंगा और अपराध करते थे, उन सभी का ये एक गठजोड़ है और जनता उनके नीयत को जानती है. इसलिए जनता इनके बहकावे में नहीं आने वाली है. इनके वंशवाद और जातिवादी राजनीति को सिरे से ख़ारिज करने वाली है. 
केंद्र सरकार और यूपी सरकार की उपलब्धि पर हमें यकीन है. इसी के दम पर बीजेपी फिर से केंद्र में सरकार बनाएगी.

सवाल- योगी जी, विपक्ष की पहली संयुक्त रैली देवबंद में हुई थी. मायावती के मुस्लिम मतदाताओं से अपील वाले भाषण को सांप्रदायिक क्यों ना माना जाए? 
जवाब-
दुर्भाग्य यही है कि कांग्रेस, सपा, बसपा और लोकदल अगर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान के खुले आम अपील करते हैं तो ये सेक्यूलर कहलाते हैं. यही अपील अगर हम कोई हिंदू मतदाता से करें तो हम सांप्रदायिक कहलाएँगे. जितने भी सेक्यूलर हैं, इस बयान पर सभी मौन बने हुए हैं. इन लोगों ने तुष्टिकरण की राजनीति से समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. 

कांग्रेस का हाथ देशद्रोहियों के साथ है. केरल में राहुल गांधी अपने नामांकन जुलूस में मुस्लिम लीग के झंडों के बीच में थे. इससे पहले डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है. यानि वो कहें तो वो सेक्यूलर और यही बात हम कहें तो हम कम्यूनल हो जाएंगे. ये कड़वा कड़वा दोह और मीठा मीठा गप नहीं चलेगा. 

मुझे लगता है कि मायावती का बयान और कांग्रेस का घोषणापत्र इस देश के दलित और आम मतदाताओं का अपमान है. मायावती का वक्तव्य तो इसलिए भी ख़तरनाक है कि जिस सहारनपुर में मायावती, अखिलेश, अजित सिंह एक मंच पर हैं, उसी सहारनपुर में कांशीराम जी के नाम पर एक मेडिकल कॉलेज बना था. अखिलेश ने अपनी सरकार में कांशीराम जी के मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर एक मुस्लिम के नाम पर रख दिया. कांशीराम जी दलित चेतना के सबसे बड़े केन्द्र बिंदू थे. दलितों का इससे बड़ा अपमान कहां हो सकता है. जो व्यक्ति कांशीराम का नाम हटाकर पूरे दलित समुदाय को अपमानित कर रहा हो वो मायावती जी के साथ मंच साझा कर रहा था. 

सवाल- क्या आप ये कहना चाह रहे हैं कि मायावती ने कांशीराम का अपमान किया?
जवाब- एकदम, जिस अखिलेश यादव ने कांशीराम के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम बदल दिया हो, वही अखिलेश यादव सहारनपुर में उनके साथ मंच साझा कर रहे हैं. क्या साबित करता है ये? भीमराव आंबेडकर की बातों के ठीक विपरीत मायावती का आचरण है. 

सवाल- आपने एक बार फिर बजरंग बली का नाम राजनीति में ला दिया. विपक्ष अब आपके ऊपर सांप्रदायिक धुर्वीकरण का आरोप लगा रहा है. 
जवाब- सांप्रदायिक धुर्वीकरण हमने नहीं कहा, सांप्रदायिक धुर्वीकरण वो लग करते हैं जो कहते हैं कि देश के अंदर देशद्रोह की घारा समाप्त कर देंगे, जम्मू कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट में सेना को दिए गए विशेष अधिकारों को समाप्त कर देंगे या जो लोग अपने नामांकन सभा में हरे रंग का झंडा ले जाकर ऐन केन प्रकेरण चुनाव जीतना चाहते हैं या वो लोग जो सरेआम मंचों से वकालत करते हैं कि हमें हर हाल में मुस्लिम वोट चाहिए. सांप्रदायिकता की राजनीति वो लोग कर रहे हैं. मेरी आस्था है, मैं बजरंगबली पर विश्वास करता हूँ. मेरी आस्था मेरा अधिकार है. मुझ पर कोई अपनी आस्था थोप नहीं सकता, स्वाभाविक रूप से हर हिंदू बजरंग बली को मानता है. जिसकी मर्ज़ी बजरंग बली के माने जिसकी मर्ज़ी ना माने. मुझे लगता है कि हमने कुछ भी गलत नहीं किया. लेकिन जो लोग सरेआम मंचों से मुस्लिम वोटों की वकालत करते हैं. अगर मायावती कहें कि उन्हें मुस्लिम वोट चाहिये तो वो सेक्यूलर और अगर बीजेपी कहे कि हमें हिंदू का वोट चाहिए तो कम्यूनल. ये नहीं चल सकता है. 

सवाल- क्या इस बार चुनाव में अली और बजरंग बली के नाम पर बंटवारा हो रहा है?
जवाब- देखिए, चुनाव का ध्रुवीकरण तो स्वाभाविक रुप से होगा. कांग्रेस का मैनिफैस्टो और गठबंधन की खिसियाहट इस चुनाव में ध्रुवीकरण करने के लिए बाध्य कर ही देगा. पश्चिमी यूपी में व्यापक अराजकता, गुंडागर्दी, दंगों से मुक्ति हमारी सरकार ने दिलाई है. हर अमन चैन पसंद व्यक्ति की पहली पसंद बीजेपी होगी.

सवाल- जो सपा बसपा का गठबंधन बना है, ये जातीय समीकरण पर काम कर रहा है. इसका एक ट्रेलर में गोरखपुर और फूलपुर में भी उपचुनाव में देखने को मिला. इस बार कैसे गोरखपुर जीतेंगे?
जवाब- यह आम चुनाव है. आम चुनाव में व्यक्ति प्रधानमंत्री को देखता है और मोदी जी इस पद के लिए यूपी और देश की पहली पसंद है. बीजेपी यूपी में 74+ के टारगेट को ज़रूर पूरा करेगी. 

सवाल- अभी भी यूपी में 12 सीटों पर बीजेपी ने प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है. गोरखपुर पर सभी की निगाहें हैं, यहाँ से कौन होगा प्रत्याशी. क्या कोई मठ से होगा या बाहर का प्रत्याशी होगा?
जवाब- मठ चुनाव के लिए नहीं है. हर गोरखपुर वाली हमारा सहयोगी है और हमारा कार्यकर्ता है. बीजेपी का कोई भी कार्यकर्ता गोरखपुर से प्रत्याशी होगा. 

सवाल- यूपी में प्रियंका वाड्रा बीजेपी के लिए कितनी बड़ी चैलेंज हैं? इसी के साथ एक और जुड़ा हुआ सवाल ये है कि प्रियंका अयोध्या जाकर हनुमानगढ़ी के दर्शन करती हैं और रामलला को विवादित बता बिना दर्शन किए वापिस आ जाती हैं ? आपकी क्या प्रतिक्रिया है?जवाब- प्रियंका वाड्रा का यूपी की राजनीति में कोई असर नहीं पड़ने वाला है. 2014 और 2017 में भी वो सक्रिय रही हैं, 2017 में दो लड़कों की जोड़ी उन्होंने ही तैयार कराई थी. जिसको जनता ने पूरी तरह ख़ारिज़ किया. वो कांग्रेस की नेता हैं और उनको कांग्रेस के लिए प्रचार करने का पूरा अधिकार है. अयोध्या में रामजन्म भूमि को दर्शन करना या करने का अघिकार उनका सुरक्षित है. लेकिन उन्हें जन्म भूमि को विवादित स्थान कहने का कोई अधिकार नहीं है. उस स्थान को विवादित कहना करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान है. 

सवाल- क्या आप दिल से ये तारीख़ बता पाएंगे कि राम मंदिर कब बनेगा?
जवाब- मामला सुप्रीम कोर्ट में है और हम भी संविधान के दायरे में रहकर ही समस्या का समाधान चाहते हैं. यथाशीघ्र समाधान चाहते हैं. हमें विश्वास है कि बहुत जल्द इस जनआस्था के विषय का समाधान निकलेगा. 

सवाल- जहां चुनाव होते हैं वहां प्रियंका राहुल मंदिर में दर्शन करने ज़रूर जाते हैं. अभी जगन्नाथ पुरी के सेवायतों ने राहुल प्रियंका को मंदिर में प्रवेश करने से मना कर दिया है. 
जवाब- पहली बात मंदिर में जाना या ना जाना सो प्रत्येक व्यक्ति का आधार है. दूसरा मंदिरों की भी अपनी परंपराएं हैं, बहुत सारे मंदिर ऐसे हैं जहाँ सिर्फ़ हिंदुओं को ही इजाज़त होती है. वहाँ की व्यवस्थाएं व परंपराएं ये सब चीज़ें तय करती हैं. वहां की जो परंपरा है, उसका पालन होना चाहिए. 

सवाल- आपने कहा कि इस बार अमेठी और आज़मगढ़ दोनों जीतेंगे, कैसे जीतेंगे और क्या प्लान है?
जवाब- दोनों जगह बीजेपी अपनी उपलब्धियों के दम पर जीतेगी. 

सवाल- लेकिन अखिलेश यादव का ये बयान आ रहा है कि बीजेपी सिर्फ़ 1 सीट यूपी में जीतेगी, क्या कहेंगे?
जवाब- वो मानते तो हैं. पहले चरण के चुनाव में सपा कहां है? 8 सीटों में से एक पर भी सपा नहीं है. बीजेपी पहले और दूसरे चरण की सभी 16 सीटों को जीत रही है. यूपी में 74+ सीटों पर बीजेपी विजय प्राप्त करेगी?

सवाल- विपक्षी दल ये भी कह रहे हैं कि आपने एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया?
जवाब-
मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए कांग्रेस, सपा और बसपा है ही, जब वहां से किसी को फ़ुर्सत होगी तब भाजपा इस पर सोचेगी. 

सवाल- आपको लगता है कि बीजेपी को मुस्लिम प्रत्याशियों की ज़रूरत नहीं है?
जवाब-
नहीं, ऐसा नहीं है. हमें तो भारत के 130 करोड़ लोगों के लिए काम करना है.

सवाल- योगी जी, आपने महबूबा मुफ़्ती का बयान सुना होगा, वो देश को तोड़ने की धमकी दे रही हैं.
जवाब-
इस प्रकार की धमकियों से कुछ नहीं होने वाला है. बीजेपी अपने संकल्प पत्र के अनुसार एक एक बात के प्रति प्रतिबद्ध है.

सवाल- एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सबूत मांगे जा रहे हैं. विपक्षी दल कह रहे हैं कि चुनावी फ़ायदे के लिए ये किया गया.
जवाब-
कांग्रेस और विपक्ष के अन्य दलों के जो चुनावी घोषणापत्र आ रहे हैं. बहुत दुर्भाग्य की बात है कि इन लोगों ने देश की बजाय अपने दलों को और वोट बैंक प्राथमिकता दी है. बीजेपी राष्ट्र सर्वप्रथम की नीति पर काम करती है. हमारी पहली प्राथमिकता देश है. 

सवाल- यूपी में कई सहयोगी दल आपको आंखे दिखा रहे हैं. आख़िरकार छोटे दल आपसे नाराज़ क्यों हो रहे हैं ?
जवाब-
हमसे कोई नाराज़ नहीं है, सभी लोग हमारे साथ में है और मिलकर काम कर रहे हैं.

सवाल- कितने सीटों की उम्मीद आपको है ?
जवाब-
74+ का लक्ष्य बीजेपी का है.

सवाल- अच्छा योगी जी वो 6 सीटें कौन सी है, जो आप हार रहे हैं?
जवाब-
(मुस्कुराते हुए) 74+ में 75 भी आता है और 80 भी आता है. 

सवाल- एक अंतिम सवाल, ये राजनीति से अलग हटकर है. क्या कभी आपकी प्रियंका, मायावती, अखिलेश या राहुल से मुलाक़ात होती है? क्या बातचीत होती है ?
जवाब-
सभी से मुलाक़ात होती है. किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है. ये राजनीतिक मूल्यों की लड़ाई है. मैं तो सभी का आदर करता हूं.

सवाल- राहुल गांधी की न्याय योजना का कितना असर है?
जवाब-
कुछ भी असर नहीं है. एक फीसदी भी असर नहीं है.