सोशल मीडिया पर नियंत्रण के लिये चुनाव आयोग को अलग से कानून की जरूरत नहीं : कुरैशी

कुरैशी ने सोमवार को ‘‘बेलगाम सोशल मीडिया और चुनाव’’ विषय पर संगोष्ठी में अपनी बातें कही.

सोशल मीडिया पर नियंत्रण के लिये चुनाव आयोग को अलग से कानून की जरूरत नहीं : कुरैशी
उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया भी मीडिया की ही श्रेणी में आता है'. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने चुनाव में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने में चुनाव आयोग के पास कानूनी अधिकार नहीं होने की मजबूरी को खारिज करते हुये कहा है कि मौजूदा व्यवस्था में ही इसे नियंत्रित किया जा सकता है. 

कुरैशी ने सोमवार को ‘‘बेलगाम सोशल मीडिया और चुनाव’’ विषय पर संगोष्ठी में कहा, ‘‘सोशल मीडिया भी मीडिया की ही श्रेणी में आता है, जिस प्रकार निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के पास मीडिया के नियंत्रण के लिये नियम कानून हैं, उसी प्रकार सोशल मीडिया को भी इन्हीं नियमों के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है. इसलिये सोशल मीडिया पर नियंत्रण के लिये अलग से कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है.’’ 

कुरैशी ने पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण हालात में आये बदलाव का हवाला देते हुये कहा कि पहले सोशल मीडिया कंपनियां सरकार से बात ही नहीं करती थीं अब इन कंपनियों ने स्वयं ‘कोड ऑफ एथिक्स’ खुद पर लागू किया है. आयोग ने भी अपने दिशानिर्देशों में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से सोशल मीडिया अकांउट की जानकारी, सोशल मीडिया पर खर्च का ब्योरा और प्रचार सामग्री के पूर्व प्रमाणन की शर्तों को लागू किया है. 

इस दौरान उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस की लीगल सेल के सचिव के सी मित्तल, चुनाव आयोग के पूर्व विधिक सलाहकार एस के मेहदीरत्ता और वकील विराग गुप्ता भी मौजूद थे. गुप्ता ने हालांकि सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा खुद पर लागू की गयी आचार संहिता की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुये कहा कि आयोग को सौंपे गये कोड ऑफ एथिक्स पर किसी कंपनी के प्रतिनिधि के हस्ताक्षर भी नहीं हैं. 

कुरैशी ने मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार थमने के दौरान (साइलेंस पीरियड) सोशल मीडिया पर भी प्रचार को प्रतिबंधित करने सहित अन्य पहल को अच्छी शुरुआत बताया. उन्होंने कहा कि चुनाव में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये आयोग को प्रबल इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ना चाहिये. 

इस दौरान मेहदीरत्ता ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये चुनाव आयोग को कानूनी रूप से और अधिक अधिकार संपन्न बनाने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में आयोग सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये दिशा-निर्देश तो बना सकता है लेकिन इन्हें लागू करने में असमर्थ साबित होता है.