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लोकसभा चुनाव 2019: दुर्ग बीजेपी का रहा है मजबूत किला, अब है कांटे की टक्कर

 दुर्ग लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के लिए अब मुश्किल मुकाबले वाली सीट है लेकिन एक दौर था जब यह बीजेपी का सबसे मजबूत किला था. बीजेपी ने साल 1996 से 2009 तक दुर्ग लोकसभा सीट से लगातार 5 बार जीत दर्ज की थी. वहीं पिछले चुनाव से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है

लोकसभा चुनाव 2019: दुर्ग बीजेपी का रहा है मजबूत किला, अब है कांटे की टक्कर

नई दिल्ली: दुर्ग लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के लिए अब मुश्किल मुकाबले वाली सीट है लेकिन एक दौर था जब यह बीजेपी का सबसे मजबूत किला था. बीजेपी ने साल 1996 से 2009 तक दुर्ग लोकसभा सीट से लगातार 5 बार जीत दर्ज की थी. वहीं पिछले चुनाव से इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. इस चुनाव में दुर्ग लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने विजय बघेल और कांग्रेस पार्टी ने प्रतिमा चंद्रकार चुनाव मैदान में हैं. 

इनके अलावा बहुजन समाज पार्टी ने गीताजंलि सिंह, भारतीय किसान पार्टी ने अनुराग सिंह, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्यूनिस्ट) ने आत्मा राम साहू, शिवसेना ने कमलेश कुमार, इंडिया प्रजा बंधु पार्टी ने ट्रेस्सा डेविड, भारत प्रभात पार्टी ने पीतांबर लाल निशाद को चुनाव मैदान में उतारा है. दुर्ग लोकसभा सीट पर इस बार कुल 21 प्रत्याशी चुनाव के मैदान में उतरे हैं.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बड़े ही बारीक अंतर से इस सीट को बीजेपी ने खो दिया था. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के ताम्रध्वज साहू ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरोज पांडे को हराया था. ताम्रध्वज साहू को 5 लाख 70 हजार 687 वोट मिले थे, वहीं भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी सरोज पांडे को 5 लाख 53 हजार 839 वोटों ही मिल सके थे. 

वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव को देखें तो भारतीय जनता पार्टी की सरोज पांडे ने जीत हासिल की थी. उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप चौबे को हराया था. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में सरोज पांडे को 2 लाख 83 हजार 170 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के प्रदीप चौबे को 2 लाख 73 हजार 216 हासिल हुए थे. साल 2009 के चुनाव में दुर्ग लोकसभा सीट पर कुल 55.90 फीसदी वोट पड़े थे.

बीजेपी ने साल 1996 से 2009 तक दुर्ग लोकसभा सीट से लगातार 5 बार जीत दर्ज की, जिनमें से चार बार तारा चंद साहू ने जीत हासिल की. साल 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तारा चंद साहू को बीजेपी द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. नतीजतन उन्होंने राज्य में तीसरा मोर्चा खोल दिया और छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच (CSM) की स्थापना की. इसके लिए उन्होंने गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी दलों को एकजुट करने की कोशिश की. उन्होंने 2009 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. हालांकि, वे तीसरे पायदान पर रहे.

छत्तीसगढ़ के पश्चिम में स्थित दुर्ग जिला राज्य का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है. यह राज्य के सबसे महत्वपूर्ण और विकसित शहरों में से एक है. दुर्ग के पास भिलाई स्थित भिलाई स्टील प्लांट भारत का पहला और स्टील रेल का मुख्य उत्पादक है. महाभारत के प्रसिद्ध संगीतमय वर्णन 'पंडवानी' भी इस क्षेत्र की अहम पहचान है.

दुर्ग जिले का गठन एक जनवरी 1906 को रायपुर और बिलासपुर जिलों के कुछ हिस्सों को मिलाकर कि‍या गया. उस समय राजनांदगांव और कबीरधाम (कवर्धा) जिले भी दुर्ग जिले के हिस्से हुआ करते थे. 26 जनवरी 1973 को जिला दुर्ग का विभाजन हुआ और अलग राजनांदगांव जिला अस्तित्व में आया. 6 जुलाई 1998 को जिला राजनांदगांव भी विभाजित हो गया और नया कबीरधाम जिला अस्तित्व में आया.