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लोकसभा चुनाव 2019: 'पीतल नगरी' मुरादाबाद में 2014 में पहली बार खिला था कमल

मुरादाबाद लोकसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या भले ही हिंदुओं की तुलना में कम है, लेकिन मुस्लिम मतदाता हमेशा से निर्णायक की भूमिका में रहे हैं. 

लोकसभा चुनाव 2019: 'पीतल नगरी' मुरादाबाद में 2014 में पहली बार खिला था कमल
यूपी की मुरादाबाद लोकसभा सीट का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है.

मुरादाबाद: मुरादाबाद संसदीय सीट के अंतर्गत पांच विधानसभा सीट हैं. इस सीट पर मुस्लिमों की एक बड़ी संख्या है और जीत-हार में निर्णायक भूमिका भी निभाता है. यहां का पीतल कारोबार दुनिया भर में मशहूर लेकिन तंगहाल भी है. क्रिकेट से राजनीति में आए मोहम्मद अजहरुद्दीन कांग्रेस के टिकट पर 2009 में इस सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे. 2014 में बीजेपी के कुंवर सर्वेश कुमार यहां से चुनाव जीते और सांसद चुने गए. लोकसभा की सियासत पर गौर करने वाली बात है कि बसपा आज तक अपना खाता नहीं खोल पाई है.

मुरादाबाद लोकसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या भले ही हिंदुओं की तुलना में कम है, लेकिन मुस्लिम मतदाता हमेशा से निर्णायक की भूमिका में रहे हैं. मुस्लिम वोटरों के ध्रुवीकरण के चलते ही राजनीतिक दलों ने मुस्लिम प्रत्याशियों पर दाव खेलकर जीत दर्ज की है. यूपी की मुरादाबाद लोकसभा सीट का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है, अकबर के शासन काल के दौरान मुरादाबाद चौपाल परगना के कार्यालय के रूप में विकसित हुआ था.

मुस्लिम वोटर से बनाते हैं जीत का आधार
मुरादाबाद लोकसभा में पांच विधानसभाएं शामिल हैं. इनमें चार विधानसभाएं मुरादाबाद जिले और एक बिजनौर की शामिल है. लोकसभा में 18,68,715 वोटर हैं. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक लोकसभा में 47.12 फीसदी मुस्लिम और 52.14 फीसदी हिंदू मतदाता हैं. मुस्लिम वोटरों का प्रतिशत हमेशा हिंदू मतदाताओं से कम रहा है. इसके बाद भी मुस्लिम वोटर ही प्रत्याशी की जीत का आधार बने हैं. 

क्या है राजनीतिक इतिहास
1952 से 2014 तक के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो मुरादाबाद से अधिकतर पार्टियों ने मुस्लिम प्रत्याशियों को ही चुनाव मैदान में उतारा है. कई बार तो राजनीतिक दलों को बाहरी मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा और रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की. 1977 के बाद से 2014 तक मात्र दो हिंदू प्रत्याशियों ने सांसद तक का सफर तय किया है. इनमें मौजूदा सांसद कुंवर सर्वेश कुमार और 1999 में चंद्र विजय सिंह शामिल रहे हैं. 
1991 में जनता दल के गुलाम मोहम्मद खान, सपा नेता डॉ शफीकुर्रहमान बर्क साल से 1996-98 में सांसद चुने गए. 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में अखिल भारतीय लोकतंत्रिक कांग्रेस के चंद्र विजय सिंह सांसद बने. 2004 में डॉ शफीकुर्रहमान बर्क फिर सांसद बनें, 2009 में क्रिकेट से राजनीति में आए मोहम्मद अजहरुद्दीन कांग्रेस के टिकट पर लड़े और चुनाव जीते, 2014 में बीजेपी का सांसद कुंवर सर्वेश कुमार जीते औक सांसद बनें. 

2014 में क्या था समीकरण
बीजेपी के कुंवर सर्वेश कुमार 4,85,224 वोट के साथ विजयी रहे. सपा के डॉ. एसटी हसन दूसरे नंबर पर रहें, जिन्हें 3,97,720 वोट मिले. बसपा के मो. याकूब  तीसरे नंबर पर रहे, इन्हें 1,60,945 वोट मिले. वहीं कांग्रेस की नूर बानो को मात्र 19, 732 वोट मिले थे. कुंवर सर्वेश कुमार सिंह भारतीय जनता पार्टी के पहले सांसद हैं, जो मुरादाबाद में जीते हैं.