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बिहार : 'आधी आबादी' तय करेगी प्रत्याशियों की किस्मत, वोटिंग में महिलाएं रहीं अव्वल

बिहार में लोकसभा चुनाव के सभी सात चरणों में मतदान हुआ. इस दौरान सभी सात चरणों में औसत 57.46 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया.

बिहार : 'आधी आबादी' तय करेगी प्रत्याशियों की किस्मत, वोटिंग में महिलाएं रहीं अव्वल
बिहार के 40 लोकसभा सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक रही.

पटना : बिहार की विधानसभा हो या देश की संसद, सभी जगह महिला सदस्यों की संख्या भले ही पुरुषों से कम हो, लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार की महिलाओं ने सरकार चुनने में जमकर अपनी भागीदारी निभाई है. इस लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने पुरुष मतदाताओं की तुलना में 4.66 प्रतिशत अधिक मतदान किया है.

बिहार में लोकसभा चुनाव के सभी सात चरणों में मतदान हुआ. इस दौरान सभी सात चरणों में औसत 57.46 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया. इसमें 55.26 प्रतिशत पुरुष मदाताओं ने अपनी भगीदारी निभाई, जबकि 59.92 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया. बिहार राज्य निवार्वचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बिहार में 57.66 प्रतिशत महिला मतदाताओं ने मतदान किया था.

आंकड़ों के अनुसार, सुपौल संसदीय क्षेत्र में महिला मतदाताओं ने सर्वाधिक 71.64 प्रतिशत मतदान किया. सुपौल लोकसभा क्षेत्र में 60.21 प्रतिशत पुरुष मतदाताओं ने मतदान किया. 

बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवास कहते हैं, 'यह महिलाओं की राजनीति में दिलचस्पी को दर्शाता है. निर्वाचन विभाग ने भी महिला मतदाताओं को मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की थी. चुनाव आयोग महिलाओं के इस उत्साह का स्वागत करता है.'

निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता जागरूकता के लिए मुंगेर जिला के ब्रांड एंबेसडर बनाए गए अभिनेता राजन कुमार ने कहा, 'यह बहुत बड़ा अंतर है. महिलाएं अब राजनीति को लेकर संजीदा हुई हैं. ऐसा नहीं कि पहले महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था, लेकिन पुरुष और महिला के मतदान में बहुत अंतर होता था. आज महिलाएं घरों से निकलकर पंक्तिबद्ध अपनी बारी का इंतजार कर वोट दे रही हैं.'

कुमार कहते हैं, 'मैंने 101 ग्राम पंचायतों में जाकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया, जिसमें ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति द्वारा संचालित 'जीविका' परियोजना की महिला सदस्यों का बहुत बड़ा योगदान है.'

जीविका से जुड़ी वंदना देवी और कविता चौधरी कहती हैं कि महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है, इसे नकारा नहीं जा सकता. उन्होंने कहा, 'आज महिलाएं, लड़कियां अच्छी शिक्षा ग्रहण कर नौकरी करने की बात करती हैं. महिलाओं में बदलाव हुआ है. यह अलग बात है कि राजनीति में अब तक उन्हें उतना महत्व नहीं दिया गया है, परंतु अब इस बदलाव के साथ राजनीतिक दलों पर भी दबाव पड़ेगा.'

बिहार की राजनीति को जानने वाले पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एनके चौधरी कहते हैं, 'केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, कई सरकारी योजनाएं महिलाओं के लिए विशेष रूप से प्रारंभ की गई हैं. इससे महिलाओं के सशक्तिकरण में मदद मिली है. बिहार में ग्राम पंचायत चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देना भी महिलाओं को राजनीति की ओर प्रेरित किया है.'

महिलाओं में मतदान को लेकर जागरूक करने वाली संस्था 'नव भारती सेवा न्यास' की सचिव प्रीति सुमन कहती हैं, 'इसमें कोई शक नहीं कि महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है, परंतु इसका दूसरा पहलू पुरुषों के पलायन से भी जोड़ा जा सकता है. बिहार से बड़ी संख्या में पुरुष रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं. ऐसे में यह आसान नहीं कि वे केवल मतदान के लिए वापस अपने गांव आएं.'

सुमन हालांकि यह भी कहती हैं, 'महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. महिलाएं राजनीति को लेकर ऊर्जावान भी हैं और राजनीति की समझ भी रखती हैं. राजनीतिक दलों को ऐसी जागरूक और ऊर्जावान महिलाओं को आगे लाने की कोशिश करनी चाहिए.'