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अगर रुझान ही बने परिणाम तो कांग्रेस को फिर से नहीं मिलेगा नेता प्रतिपक्ष का पद

नेता विपक्ष के लिए कम से कम 55 सीटों की जरूरत होती है. एकबार फिर रुझानों में कांग्रेस इससे पिछड़ रही है.

अगर रुझान ही बने परिणाम तो कांग्रेस को फिर से नहीं मिलेगा नेता प्रतिपक्ष का पद
बीजेपी अकेले सरकार बनाती हुई दिख रही है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों को लेकर जो अब तक रुझान आए हैं उसमें BJP पूर्ण बहुमत के सरकार बनाती दिख रही है. इस बार बीजेपी को 2014 के मुकाबले ज्यादा बड़ा जनादेश मिलने की पूरी संभावना है. इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर सभी 542 सीटों के रुझान आ चुके हैं. दोपहर 12 बजे अकेले बीजेपी 292 सीटों पर बढ़त बनाए हुई है. कांग्रेस केवल 50 सीटों पर बढ़त बनाए हुई है. ऐसे में एकबार फिर से सत्ता विपक्ष का संकट मंडरा रहा है.

जी न्यूज पर जो ट्रेंड दिख रहा है उसमें NDA 344 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. वहीं, UPA 88 सीटों और अन्य 110 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी सीट पर बीजेपी की स्मृति ईरानी से पीछे चल रहे हैं.

आपका याद होगा 2014 में जब पहली बार प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनी थी, तब नेता विपक्ष का मामला जोर-शोर से उठा था. कांग्रेस मात्र 40 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी. लोकसभा में कुल 543 सीटे हैं. तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मल्लिकार्जुन खड़गे को इसलिए नेता प्रतिपक्ष का पद देने से इनकार कर दिया, क्योंकि पार्टी के पास जरूरी आंकड़ें नहीं थे.

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सुमित्रा महाजन ने कहा था नियम और परंपरा के मुताबिक नेता प्रतिपक्ष घोषित करने के लिए पार्टी के पास कम से कम सदन की 10 फीसदी सीटें होनी चाहिए. मतलब, परंपरा और नियम के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष का दर्ज पाने के लिए पार्टी के कम से कम 55 सांसद होने चाहिए. रुझानों के मुताबिक, एकबार फिर से 2014 की स्थिति दोहराने जा रही है.

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बता दें, 2014 में भी जब यह मुद्दा जोर-शोर से उठा था तब सुमित्रा महाजन ने कहा था कि यह पहली बार नहीं हो रहा है. इससे पूर्व 1980 और 1984 में भी कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं था. वजह ये थी कि विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी. उस दौरान यह भी कहा गया था कि पहली, दूसरी, तीसरी, पांचवीं, छठी, सातवीं और आठवीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद रिक्त रहा था.