लोकसभा चुनाव 2019: बिहार के 40 लोकसभा सीटों में 26 ऐसे प्रत्याशी जो बचाने उतरे हैं विरासत

बिहार की 40 में से 26 सीटें ऐसी हैं, जिन पर वंशवाद हावी है. इसमें 15 ऐसी सीटें हैं, जिन पर नेताओं के बेटे चुनाव मैदान में हैं. 

लोकसभा चुनाव 2019: बिहार के 40 लोकसभा सीटों में 26 ऐसे प्रत्याशी जो बचाने उतरे हैं विरासत
बिहार में 15 ऐसी सीटें हैं, जिन पर नेताओं के बेटे चुनाव मैदान में हैं.

पटनाः लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीति में भले ही वंशवाद का मुद्दे उठता रहा है, लेकिन अब जब चुनाव हो रहे हैं, तो हर दल में वंशवादी प्रत्याशी दिख रहे हैं. बेटा, बेटी, पत्नी और बहू तक चुनावी मैदान में हैं. बिहार की 40 में से 26 सीटें ऐसी हैं, जिन पर वंशवाद हावी है. इसमें 15 ऐसी सीटें हैं, जिन पर नेताओं के बेटे चुनाव मैदान में हैं. जो अपनी विरासत को बचाने के लिए उतरे हैं.

एक समय था, कांग्रेस पार्टी को वंशवाद के मुद्दे पर घेरा जाता था, लेकिन अब ये मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए सुविधावाला हो चला है, क्योंकि ऐसा कोई राजनीतिक दल नहीं है, जिसमें वंशवाद हावी नहीं हो. कांग्रेस के साथ भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों ने जो प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे हैं.

इनमें तमाम ऐसे हैं, जो राजनीतिक घरानों से आते हैं, जिनके भाई और पिता राजनीति में लंबी पारी खेल चुके हैं. राजद की बात करें, तो लालू प्रसाद की बड़ी बेटी मीसा भारती चुनाव मैदान में हैं. समधी चंद्रिका राय को सारण सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया है, जो खुद पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा राय के बेटे हैं और बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं. 

जदयू ने सीवान से कविता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है, जिनके सास जगमातो देवी विधायक रही हैं और पति अजय सिंह भी राजनीति में सक्रिय हैं. सीतामढ़ी से जदयू के टिकट पर लड़ रहे सुनील कुमार पिंटू के पिता भी दो बार विधायक रह चुके हैं, हालांकि जदयू के नेता इसे वंशवाद नहीं मानते हैं. 

केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से भाजपा के प्रत्याशी रविशंकर प्रसाद के पिता ठाकुर प्रसाद की गिनती जनसंघ के बड़े नेताओं में होती थी. लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान इस बार भले ही चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनके दो भाई और बेटे चिराग चुनाव मैदान में हैं. उनके दल के हिस्से में आयी 6 में से 3 सीटों पर परिवार के लोग ही चुनाव लड़ रहे हैं. 

वहीं, कांग्रेस ने वाल्मिकीनगर से पूर्व सीएम केदार पांडेय के पोते शाश्वत केदार को प्रत्याशी बनाया गया है. शाश्वत के पिता मनोज पांडेय भी सांसद रह चुके हैं. ऐसे ही सासाराम से पूर्व उप प्रधानमंत्री जनजीवन राम की बेटी मीरा कुमार चुनाव मैदान में हैं. सुपौल सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में रंजीत रंजन चुनाव लड़ रही हैं, जो निवर्तमान सांसद पप्पू यादव की पत्नी हैं. पप्पू यादव खुद भी मधेपुरा से किस्तम आजमा रहे हैं. 

राजनीतिक दल भले ही कुछ कहें और दलील दें, लेकिन चुनाव से पहले तक विभिन्न दल नए लोगों को राजनीति में लाने की वकालत करते हैं, लेकिन जब टिकट देने की बारी आती है, तो जिताऊ प्रत्याशी के नाम पर नये लोगों के नाम को खारिज कर वंशवाद को आगे बढ़ानेवालों पर ही दांव लगाया जाता है. ये राजनीति में एक सच्चाई बनती जा रही है.