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हावड़ा में त्रिकोणीय है मुकाबला, क्या बीजेपी दे पाएगी TMC को गढ़ में टक्कर?

किसी भी अन्य पार्टी के लिए इस सीट से फतेह हासिल करना इसलिए भी हैं, क्योंकि यहां प्रसून बनर्जी से जमीनी स्तर पर काम किया है. जनता के बीच में प्रभावशाली छवि बनाने और उसे कायम रखने के लिए प्रसून बनर्जी अपनी पूरी ताकत को झोंका है. प्रसून जितना जनता के बीच एक्टिव हैं, उतना ही ससंद में भी

हावड़ा में त्रिकोणीय है मुकाबला, क्या बीजेपी दे पाएगी TMC को गढ़ में टक्कर?
फाइल फोटो.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों के रण क्षेत्र में इस बार सबकी निगाहें पश्चिम बंगाल पर टिंकी हुई हैं. तृणमूल कांग्रेस की सरकार सत्ता में आने के बाद बीजेपी के लिए इस रण को जीतना एक चुनौती है. हावड़ा लोकसभा सीट पर समीकरण बैठना और फिस उस पर फतेह हासिल करना आसान नहीं है. इस सीट से तृणमूल कांग्रेस के प्रसून बनर्जी सांसद है. साल 2014 के चुनाव में प्रसून बनर्जी ने दूसरी बार जीत हासिल की थी. उन्होंने सीपीएम के श्रीदीप भट्टाचार्य को 196,956 वोटों के अंतर से मात दी थी. 

2014 में हुआ था 75 फीसदी मतदान
साल 2014 के लोकसभा चुनाव के समय हावड़ा में कुल 1,505,099 मतदाता थे जिनमें 802,653 पुरुष और महिला वोटरों की संख्या 702,446 थी. 2014 के लोकसभा चुनाव के 1,125,399 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया जिनमे 621,783 पुरुष और 503,616 महिला मतदाताओं ने वोट डाले. इस तरह 2014 में इस सीट पर कुल 75 प्रतिशत मतदान हुआ था. हावड़ा की कुल जनसंख्या 2,112,447 थी. इसमें ग्रामीण आबादी 7.04% और शहरी आबादी 92.96% है.

जनता और संसद दोनों जगह एक छवि
किसी भी अन्य पार्टी के लिए इस सीट से फतेह हासिल करना इसलिए भी हैं, क्योंकि यहां प्रसून बनर्जी से जमीनी स्तर पर काम किया है. जनता के बीच में प्रभावशाली छवि बनाने और उसे कायम रखने के लिए प्रसून बनर्जी अपनी पूरी ताकत को झोंका है. प्रसून जितना जनता के बीच एक्टिव हैं, उतना ही ससंद में भी. अपने कार्यकाल के दौरान प्रसूद ने हमेशा संसद की हर कार्रवाई में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की है. अब तक उन्होंने 61 सवाल संसद में पूछे हैं. 

"लोड़बो, जीतबो" की तर्ज़ पर अपनी पूरी ताकत झोंक चुकी पार्टियां हर पैतरा अपनाने की कोशिश कर रही है. वामदलों के साथ सत्ता पर काबिज और सियासी पारी खेलने वाली ममता बनर्जी को चुनौती देने के लिए बीजेपी पूरी ताकत लगा चुकी है. पार्टी के सूत्रों की मानें तो इस बार बंगाल में बीजेपी ने 22 सीटें जितने का लक्ष्य निर्धारित किया है. 

क्या कहता है हावड़ा का समीकरण
हावड़ा संसदीय सीट पर 1971 से ही सीपीआई (एम) का दबदबा रहा है. 2004 में जीत से पहले पार्टी 1984, 1996 में कांग्रेस और 1998 में टीएमसी से हारी थी. सीपीआई (एम) के मजबूत गढ़ में 2009 में टीएमसी ने सेंध लगाई और पार्टी की अंबिका बनर्जी सांसद चुनी गईं. अंबिका बनर्जी के निधन से 2013 में रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव में भी टीएमसी की ही जीत हुई और पार्टी के प्रसून बनर्जी सांसद बने. 2014 के मुकाबले इस बार यहां पर टीएमसी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है. तो वहीं कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय़ बना दिया है.