रायजंग लोकसभा सीट पर कांग्रेस-सीपीएम की जंग का फायदा उठाने की कवायद में बीजेपी

रायगंज लोकसभा सीट के इतिहास की बात करें तो यहां पर कांग्रेस ने एक लंबी पारी खेली है. 1952-1977 तक यहां कांग्रेस का वर्चस्व रहा.

रायजंग लोकसभा सीट पर कांग्रेस-सीपीएम की जंग का फायदा उठाने की कवायद में बीजेपी
फाइल फोटो.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की रायगंज लोकसभा सीट प्रदेश की अहम राजनीतिक पैठव वाली सीट मानी जाती है. 2014 में तृणमूल और बीजेपी की जंग में इस सीट पर सीपीएम के मोहम्मद सलीम ने जीत दर्ज की थी, उन्हें 3,17,515 वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस की दीपा दास मुंशी 3,15,881 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रही थीं.

शुरुआती दौर में रहा कांग्रेस का वर्चस्व
रायगंज लोकसभा सीट के इतिहास की बात करें तो यहां पर कांग्रेस ने एक लंबी पारी खेली है. 1952-1977 तक यहां कांग्रेस का वर्चस्व रहा. उसके बाद 1977 में BLD के मोहम्‍मद हायत अली, और 1980 में कांग्रेस ने पासा पलटे हुए गेंद अपने खाते में लाने में कामयाब रही. कांग्रेस के वर्चस्व कम हुआ, तो सीपीएम ने यहां पर कब्जा जमाया और 1991 से 1998 सत्ता संभाली, हालांकि 1999 में कांग्रेस ने दोबारा जीत दर्ज की. 

इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं, जिनमें हेमंतबाद, इस्लामपुर, रायगंज, करण दिघी, चकुलिया, गोपालपोखर व कालियागंज शामिल हैं. हेमंतबाद और कालियागंज अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं.