लोकसभा चुनाव 2019: 1999 में बीजेपी ने तिरुपति में खोला था खाता, क्या कर पाएगी वापसी?

आंध्रप्रदेश की तिरुपति सीट पर बीजेपी ने 1999 में अपना खाता खोला था लेकिन तब से पार्टी को जीत नहीं मिली.  2014 में उम्मीद थी कि बीजेपी इस सीट पर वापसी कर लेगी लेकिन वाईएसआर कांग्रेस ने 37,425 वोट से इस सीट पर कब्जा जमा लिया.

लोकसभा चुनाव 2019: 1999 में बीजेपी ने तिरुपति में खोला था खाता, क्या कर पाएगी वापसी?
बीजेपी करीब 20 साल से इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई है...

तिरुपति: लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण का मतदान 11 अपैल को होगा. तिरुपति सीट पर भी इसी दिन वोट डाले जाएंगे. आंध्रप्रदेश की तिरुपति सीट पर बीजेपी ने 1999 में अपना खाता खोला था लेकिन तब से पार्टी को जीत नहीं मिली. इस तरह से पार्टी करीब 20 साल से इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई. पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से वाईएसआर कांग्रेस के प्रत्याशी ने किला फतह किया था. यह सीट अनुसूचित जाति के लि आरक्षित है. 

तिरुपति लोकसभा क्षेत्र में हिंदुओं का सबसे मशहूर तीर्थस्थल तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर स्थित है जहां प्रति वर्ष लाखों लोग में देशभर से दर्शन के लिए आते हैं. वायएसआर के सामने इस सीट पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है. टीडीपी से उसे कड़ी टक्कर मिल सकती है. टीडीपी ने पनबाका लक्ष्मी को उम्मीदवार बनाया है. वाईएसआर कांग्रेस ने बल्ली दुर्गाप्रसा राव पर भरोसा जताया है. वहीं, बीजेपी ने बोम्मी श्रीहरि राव तो कांग्रेस ने चिंतामोहन को उम्मीदवार बनाया है.

कई नई पार्टियां भी मैदान में
आंध्रप्रदेश में इस बार कईं नई पार्टियों के मैदान में आने से मुकाबला रोचक हो गया है. हालांकि मुख्य मुकाबला टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच माना जा रहा है. 2014 में वाईएसआर कांग्रेस के उम्मीदवार वारा प्रसाद राव ने बीजेपी उम्मीदवार कुरुमांची जयराम को हराया था. कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही थी. कांग्रेस ने एक बार फिर से चिंता मोहन को टिकट दिया था जो 2014 में चुनाव हार गए थे. उन्हें महज 33,000 वोट मिले थे. ऐसे में उनके सामने बड़ी चुनौती है.

 

बहुत कम अंतर से बीजेपी हारी थी पिछला चुनाव
बीजेपी ने इस सीट पर पहली बार 1999 में खाता खोला था. बीजेपी के नंदीपाकू वेंकटस्वामी ने कांग्रेस के चिंतामोहन को 12,497 वोट से हराकार चुनाव जीता था. यह पहला मौका था जब बीजेपी को इस सीट पर जीत मिली थी. 2004 के चुनाव में जनता ने बीजेपी का साथ नहीं दिया और कांग्रेस उम्मीदवार चिंतामोहन को जीत मिली. 2009 में भी कांग्रेस के चिंतामोहन ने इस सीट पर जीत का परचम लहराया. 2014 में उम्मीद थी कि बीजेपी इस सीट पर वापसी कर लेगी लेकिन वाईएसआर कांग्रेस ने 37,425 वोट से इस सीट पर कब्जा जमा लिया.