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दमदम लोकसभा सीट पर अब तक कोई पार्टी नहीं दिखा पाई है अपना दम, हर बार बदलती है रंग

राजनीतिक गणित के हिसाब से बात की जाए तो 1977 के लोकसभा चुनावों के बाद से यहां अब तक सबसे ज्यादा 5 बार माकपा ने जीत दर्ज की है.

दमदम लोकसभा सीट पर अब तक कोई पार्टी नहीं दिखा पाई है अपना दम, हर बार बदलती है रंग
फाइल फोटो.

ऩई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की दमदम लोकसभा सीट देश की उन सीटों में शुमार है, जहां पर कोई भी पार्टी ज्यादा समय तक अपना दम नहीं दिखा पाई है. इस सीट पर बीजेपी सहित विरोधी पार्टियां यहां पर केवल पांच चुनाव ही जीत पाई हैं. 

राजनीतिक गणित के हिसाब से बात की जाए तो 1977 के लोकसभा चुनावों के बाद से यहां अब तक सबसे ज्यादा 5 बार माकपा ने जीत दर्ज की है. यहां 1977 में सबसे पहली बार चुनाव हुए थे. उन चुनावों में भारतीय लोक दल के टिकट पर अशोक कृष्ण दत्त सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचे थे. 1980 के चुनाव में माकपा के उम्मीदवार निरेन घोष चुने गए थे. 

1984 के चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी और उसके उम्मीदवार आशुतोष लाहा संसद पहुंचे थे. इसके बाद माकपा के 1989, 1991 और 1996 के लोकसभा चुनावों में माकपा के निर्मल कांति चटर्जी चुनाव जीतते रहे. इसी तरह 1998 और 1999 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के तपन सिकदर चुनाव जीते. 2004 के चुनाव में माकपा के अमिताव नंदी सांसद चुने गए. इसके बाद 2009 में तृणमूल कांग्रेस पहली बार यहां से जीत दर्ज करने में कामयाब रही. 

हांलाकि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस की टक्कर का उम्मीदवार उतारकर बीजेपी ने 2014 की कहानी को दोहराया है और मुकाबले को रोमांचक कर दिया है.