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लोकसभा चुनाव 2019 : 'कांच की नगरी' है फिरोजाबाद, चाचा-भतीजे में है चुनावी जंग

कांच की नगरी के रूप में विख्‍यात फिरोजाबाद में सपा से अलग होकर अपनी पार्टी बनाकर शिवपाल यादव मैदान में हैं तो सपा-बसपा-रालोद गठबंधन से अक्षय यादव मैदान में हैं. फिरोजाबाद में कांच की चूडि़यों के कारखाने हैं.

लोकसभा चुनाव 2019 : 'कांच की नगरी' है फिरोजाबाद, चाचा-भतीजे में है चुनावी जंग
कांच की चूडि़यों के कारखाने हैं फिरोजाबाद में. फाइल फोटो

नई दिल्‍ली : लोकसभा चुनाव 2019 (lok sabha elections 2019) का परिणाम 23 मई को आ रहा है. उत्‍तर प्रदेश की एक लोकसभा सीट ऐसी है, जहां चाचा-भतीजे के बीच ही चुनावी जंग है. यह सीट है फिरोजाबाद. कांच की नगरी के रूप में विख्‍यात फिरोजाबाद में सपा से अलग होकर अपनी पार्टी बनाकर शिवपाल यादव मैदान में हैं तो सपा-बसपा-रालोद गठबंधन से अक्षय यादव मैदान में हैं. फिरोजाबाद में कांच की चूडि़यों के कारखाने हैं.

फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में यादव वोटर की संख्या 4.31 लाख के करीब है. 2.10 लाख जाटव, 1.65 लाख ठाकुर, 1.47 लाख ब्राह्मण, 1.56 लाख मुस्लिम और 1.21 लाख लोधी मतदाता हैं. कुल मतदाताओं की संख्या 17,45,526 है. महिला मतदाता 734,206 और पुरुष मतदाता 902,532 हैं. यहां यादव वोटर निर्णायक भूमिका में हैं. जसरना और सिरसागंज में उनकी तदाद लगभग 1.5 लाख है. लेकिन उनमें बिखराव भी होगा.

 

शिवपाल यादव संगठन की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं. सपा के पुराने कार्यकर्ताओं में उनकी आज भी पकड़ है. विपक्ष के नेता और अलग-अलग सरकारों में मंत्री रहे शिवपाल को भी यहां भारी समर्थन मिल रहा है. यह बात अलग है कि कुछ उनके विरोध में भी हैं. अब शिवपाल के मैदान में उतरने से यह सीट सपा के लिए आसान नहीं रह गई है.

ये है राजनीतिक इतिहास
1957 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी. साल 1967 में सम्‍युक्‍त सोशलिस्ट पार्टी ने यहां से चुनाव जीता. 1971 में पहली बार कांग्रेस ने यहां पर जीती. 1977 में भारतीय लोकदल यहां आया. 1980 में निर्दलीय के पास यह सीट गई. 1984 में कांग्रेस ने फिर जीत हासिल की. 1989 में यहां जनता दल ने बाजी मारी. 1991 के बाद लगातार तीन बार यहां बीजेपी ने कांग्रेस को करारी चुनावी पटखनी दी. बीजेपी के प्रभु दयाल कठेरिया ने यहां 1998 तक जीत की हैट्रिक लगाई. 

1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन ने बड़ी जीत हासिल की. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 2009 से इस सीट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, हालांकि चुनाव के बाद उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया था. 2009 के उपचुनाव में कांग्रेस की टिकट पर राजबब्‍बर यहां से जीते थे. 2014 में समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव ने यहां से बड़ी जीत हासिल की.