बागपत लोकसभा सीट: जयंत चौधरी पर अपने दादा-पिता की विरासत को बचाने का चुनौती

बागपत लोकसभा सीट: जयंत चौधरी पर अपने दादा-पिता की विरासत को बचाने का चुनौती

राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. जयंत चौधरी आरएलडी का युवा चेहरा हैं. 

बागपत लोकसभा सीट: जयंत चौधरी पर अपने दादा-पिता की विरासत को बचाने का चुनौती

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election Results 2019) के नतीजे 23 मई को सबके सामने आने वाले हैं. नेताओं के दिलों की धड़कन तेज हो चली है. जाटलैंड के नाम से जाने जाना वाले बागपत लोकसभा सीट पर इस बार दिग्गजों की साख भी दांव पर लगी है. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में हारने के बाद अजित सिंह ने बागपत से अपने बेटे जयंत चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि खुद मुजफ्फरनगर से चुनावी मैदान में हैं. जयंत चौधरी पर अपने दादा और पिता की विरासत को बचाकर रखने का दबाव है. 

संभालेंगे पिता की विरासत
राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. जयंत चौधरी आरएलडी का युवा चेहरा हैं, अब जयंत चौधरी के कंधों पर राजनीतिक विरासत की जिम्मेदारी है. 

पिता की तरह विदेश में की है पढ़ाई
साल 1978 में जन्मे जयंत चौधरी ने भी अपने पिता अजित सिंह की तरह विदेश में पढ़ाई की है. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ग्रेजुएट जयंत चौधरी की शादी 2003 में हुई और उनके दो बेटियां हैं. पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह परिवार की तीसरी पीढ़ी यानी जयंत चौधरी बागपत लोकसभा सीट से मैदान में हैं. 2019 लोकसभा चुनाव में अजित सिंह मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि बागपत लोकसभा सीट से जयंत सिंह चुनावी मैदान में हैं.

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मथुरा से लड़ते थे चुनाव
आरएलडी के लिए बागपत की पारिवारिक सीट से उतरी हैं. लेकिन जयंत चौधरी मथुरा से चुनाव लड़ते आए हैं. साल 2009 में  जयंत चौधरी ने मथुरा लोकसभा सीट से बीएसपी के श्याम सुंदर शर्मा को हराया था. साल 2014 में मोदी की लहर में जयंत यह सीट बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी से गंवा बैठे थे.

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