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पालिका अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री तक, ऐसा रहा है दिग्विजय सिंह का राजनीतिक सफर

2013 में उनकी पत्नी का कैंसर के चलते निधन हो गया. जिसके बाद सिंह उन्होंने राज्यसभा टीवी की एंकर अमृता राय से विवाह कर लिया. जिसके बाद उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन अपनी मर्जी के मालिक कहे जाने वाले दिग्विजय  सिंह को इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ा.

पालिका अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री तक, ऐसा रहा है दिग्विजय सिंह का राजनीतिक सफर
16 सालों बाद दिग्विजय सिंह ने राजनीति में वापसी की

नई दिल्लीः कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक ऐसे राजनेता हैं, जो अक्सर ही कभी अपनी पर्सनल तो कभी प्रोफेशनल लाइफ को लेकर चर्चा में बने रहे हैं. दिग्विजय सिंह, पर अक्सर ही आरोपों की बारिश होती रही है, लेकिन उन पर इन आरोपों का असर न के बराबर ही रहा. उनके बारे में यह भी कहा जाता है उन्हें जो करना है, वह करते हैं. वह इसके लिए पार्टी में किसी की अनुमति का इंतजार नहीं करते. मुख्यमंत्री रहने के दौरान दिग्विजय सिंह कभी जनेऊ पहने पूजा अर्चना में व्यस्त नजर आए तो कभी संघ को आड़े हाथों लेते दिखाई देते नजर आए.

जीवन परिचय
28 फरवरी 1947 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्में दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज से मैकिनकल इंजीनियरिंग से स्नातक करने के बाद इन्होंने श्री गोविंददास सेकरसरिया प्रोद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान इंदौर में दाखिला लिया. उनके पिता बलभद्र सिंह राघोगढ़ के राजा थे. राघोगढ़ ग्वालियर स्टेट के अधीन था. दिग्विजय सिंह की पहली शादी आशा दिग्विजय सिंह से हुई, जिससे उनकी दो बेटियां और एक बेटा है. लेकिन 2013 में उनकी पत्नी का कैंसर के चलते निधन हो गया. जिसके बाद सिंह उन्होंने राज्यसभा टीवी की एंकर अमृता राय से विवाह कर लिया. जिसके बाद उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन अपनी मर्जी के मालिक कहे जाने वाले दिग्विजय  सिंह को इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ा.

राजनीतिक जीवन
दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राघोगढ़ नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष के रूप में की. इसी बीच उन्होंने 1970 में कांग्रेस का साथ पकड़ लिया औऱ पार्टी से जुड़कर इसके लिए काम करने का फैसला लिया. इस बीच 1977 में वह मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में खड़े हुए और राघोगढ़ से विधायक चुने गए. इस दौरान उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और सिंचाई क्षेत्र का विकास किया.

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1984 में लोकसभा चुनाव में राजगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से सांसद के रूप में चुने जाने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश की कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया. लेकिन इसके बाद 1989 में उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र से हाथ धोना पड़ा. 1993 में वे फिर से विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और उन्होंने इसमें जीत भी हासिल की. इस दौरान दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री पदभार संभालने का भी मौका मिला.

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1998 में हुए चुनाव में सिंह को फिर से मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला और 2003 तक उन्होंने इस पद को संभाला. हालांकि इसके बाद के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वह अब चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन 16 सालों बाद दिग्विजय सिंह ने वापसी की और 2019 के लोकसभा चुनाव में वह भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उनके सामने बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा चुनौती बनकर उभरी हैं.