करुणानिधि के बाद एम.के. स्टालिन हैं DMK के उत्तराधिकारी, राजनीति में भी मजबूत पकड़

एम.के स्टालिन पहली बार इमरजेंसी के दौरान MISA के तहत जेल जाने को लेकर राजनीतिक रूप से चर्चा में आए थे. 1989 से अब तक वह 4 बार तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. 

करुणानिधि के बाद एम.के. स्टालिन हैं DMK के उत्तराधिकारी, राजनीति में भी मजबूत पकड़

नई दिल्ली: तमिलनाडू की राजनीति के पितामह रहे दिवंगत एम करुणानिधि के बेटे मुत्थुवेल करुणानिधि (MK) स्टालिन भी राज्य की राजनीति का मुख्य हिस्सा हैं. फिलहाल वह द्रविण मुन्नेत्र कणगम (DMK) के अध्यक्ष हैं. करुणानिधि के निधन के बाद अब डीएमके को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके ही कंधे पर है. 

राजनीतिक करियर
एम.के स्टालिन पहली बार इमरजेंसी के दौरान MISA के तहत जेल जाने को लेकर राजनीतिक रूप से चर्चा में आए थे. 1989 से अब तक वह 4 बार तमिलनाडु विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. वह साल 1996 से 2002 तक चेन्नई के मेयर भी रहे थे. 2009 से 2011 तक वह राज्य के पहले डिप्टी सीएम भी रहे. हालांकि, 2001 में उन्हें दोबारा से चेन्नई का मेयर चुना गया था लेकिन तत्तकालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने एक कानून बनाया था. जिसके मुताबिक एक व्यक्ति एक साथ दो सरकारी पदों पर नहीं रह सकता. उस वक्त स्टालिन राज्य के विधायक भी थे लेकिन हाई कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद कोर्ट ने कहा था कि कोई व्यक्ति लगातार दो बार मेयर नहीं बन सकता.

2006 में विधानसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्हें तमिलनाडु सरकार में ग्रामीण विकास एवं स्थानीय प्रशासन मंत्री बनाया गया. 3 जनवरी, 2013 को करुणानिधि ने स्टालिन को अपना उत्तराधि‍कारी घोषित किया था और इसके बाद यह साफ हो गया था कि करुणानिधि की मौत के बाद वही डीएमके के प्रेसिडेंट होंगे. जिसके बाद स्टालिन को 4 जनवरी, 2017 को डीएमके का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया. करुणानिधि के निधन के बाद 28 अगस्त, 2018 को स्टालिन को सर्वसम्मति से डीएमके का प्रमुख बनाया गया.

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