लोकसभा चुनाव 2019: मुलायम की कर्मस्थली है इटावा, क्या BJP फिर कर पाएगी कमाल?

मौजूदा समय में इटावा लोकसभा सीट से बीजेपी के अशोक कुमार दोहरे सांसद हैं. यूपी में महागठबंधन होने के बाद इस सीट पर चुनावी जंग और तेज हो गई है.

लोकसभा चुनाव 2019: मुलायम की कर्मस्थली है इटावा, क्या BJP फिर कर पाएगी कमाल?
ये इलाका समाजवादी राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की इटावा हॉट सीट में एक मानी जाती है और मुख्यता इसकी पहचान समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव की कर्मस्थली के रूप में की जाती है. उत्तर प्रदेश की इटावा लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. ये इलाका समाजवादी राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है, लेकिन इसके बाद भी साल 2014 में सपा ने इस सीट को बीजेपी के हाथों खो बैठी. मौजूदा समय में इटावा लोकसभा सीट से बीजेपी के अशोक कुमार दोहरे सांसद हैं. यूपी में महागठबंधन होने के बाद इस सीट पर चुनावी जंग और तेज हो गई है. 
 
2014 का चुनावी रण
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इटावा संसदीय सीट पर 55.04 फीसदी मतदान हुआ था. मोदी लहर में ये सीट बीजेपी निकालने में कामयाब हुई. इस सीट पर बीजेपी के अशोक कुमार दोहरे ने सपा के प्रेमदास कठेरिया को मात दी थी. इस सीट पर बीएसपी तीसरे और कांग्रेस चौथे स्थान पर रही थी. बीजेपी के सांसद अशोक कुमार दोहरे को 4,39,646 वोट मिले थे, जबकि सपा के प्रेमदास कठेरिया को 2,66,700 वोट मिले थे.

 

क्या कहता राजनीति इतिहास
आजादी के बाद पहली बार साल 1957 में हुए चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के अर्जुन सिंह भदौरिया यहां के पहले एमपी चुने गए थे. उस वक्त ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. लेकिन, साल 1967 में यह सीट परिसीमन के बाद सामान्य हो गई. साल 1971 में यहां कांग्रेस का परचम लहराया और साल 1977 में अर्जुन सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर यहां जीत दर्ज की. साल 1996 तक अलग-अलग पार्टियों के प्रत्याशी यहां से जीतकर सांसद बने. 1980 में जनता पार्टी से राम सिंह शाक्य ने जीत का परचम फहराया. साल 1984 में रघुराज सिंह चौधरी कांग्रेस से जीते, पर 1989 में राम सिंह शाक्य जनता दल से उतरे और जीत हासिल की और 1991 में बसपा से कांशीराम ने विजय दर्ज की. साल 1996 में राम सिंह शाक्य से सपा उतरे और एक बार फिर जीतने में कामयाब रहे. साल 1998 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां खाता खोला और पहली बार सुखदा मिश्र यहां से महिला सांसद चुनी गईं. साल 1999 और 2004 रघुराज सिंह शाक्य सपा से जीत हासिल की. साल 2009 में परिसीमन के बाद इटावा की सीट वापस से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई. और सपा के प्रेमदास कठेरिया ने जीत दर्ज की. साल 2014 में ये सीट मोदी लहर में दूसरी बार बीजेपी के पास पहुंची औऱ अशोक कुमार दोहरे लोकसभा में पहुंचे.