गया लोकसभा : 4 बार मिली थी BJP को सफलता, सीट शेयरिंग में JDU के खाते में गई सीट

इस लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की तरफ से यह सीट जीतन राम मांझी की पार्टी हम के खाते में गई है.

गया लोकसभा : 4 बार मिली थी BJP को सफलता, सीट शेयरिंग में JDU के खाते में गई सीट
गया सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं जीतन राम मांझी. (फाइल फोटो)

गया : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के चुनाव लड़ने के कारण बिहार का गया लोकसभा सीट हाईप्रोफाइल हो गया है. 2019 की लड़ाई में उनका मुकाबला जनता दल यूनाइटेड (जीडीयू) उम्मीदवार विजय कुमार मांझी से है. लगभग 17 लाख मतदाताओं वाले इस सीट पर कुल 8,79,308 पुरुष मतदाता हैं. वहीं, महिला मतदाताओं की संख्या 8,19,405 है.

2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में गई थी. बीजेपी ने यहां से हरी मांझी को टिकट दिया था. 3,26,230 के साथ वह जीत दर्ज करने में सफल रहे थे. वहीं, आरजेडी ने यहां से रामजी मांझी को चुनावी मैदान में उतारा था. उन्हें कुल 2,10,726 वोट मिले थे. इस चुनाव में महागठबंधन की तरफ से यह सीट जीतन राम मांझी की पार्टी हम के खाते में गई है. वह खुद इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. 2014 में वह जेडीयू उम्मीदवार की तौर पर चुनावी मैदान में थे. उन्हें कुल 1,31,828 मत प्राप्त हुए थे. वह तीसरे स्थान पर रहे थे.

गया में जातीय समीकरण पर गौर करें तो यहां सर्वाधिक वोट मांझी की है. यहां मांझी की आबादी कुल 3 लाख 10 हजार है. इसके अलावा कुशवाहा 2 लाख की आबादी के साथ दूसरे नंबर पर है. वहीं, मुस्लिमों की आबादी भी दो लाख के करीब है. गया में राजपूत 1.25 लाख और भूमिहार 1.50 लाख के करीब हैं.

गया लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की कुल 6 सीटें आती हैं. इनमें से चार पर महागठबंधन और दो पर एनडीए का कब्जा है. आजादी के बाद पांच बार इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी. 1989 से लगातार तीन बार जनता दल ने जीत दर्ज की थी. 1998 और 1999 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने जीता था. 2004 में आरजेडी के राजेश कुमार मांझी चुनाव जीते थे. 2009 और 2014 की लड़ाई में बीजेपी को सफलता मिली.

विजय कुमार मांझी का सियासी सफरनामा
विजय कुमार मांझी साल 2005 में पहली बार विधायक बने थे. वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं. वह आरजेडी की पूर्व सांसद भगवतिया देवी के छोटे बेटे हैं. उनकी बहन भी आरजेडी की विधायक हैं. इस चुनाव में वह जेडीयू की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

जीतन राम मांझी का सियासी सफरनामा
जीतन राम मांझी वर्ष 1980 में पहली बार विधायक चुने गए थे. 1985, 1990 और 1996 में भी विधायक बने. साल 2008 में बिहार में नीतीश कुमार की कैबिनेट मंत्री बने. साल 2014 में वह बिहार के मुख्यमंत्री भी बने. लेकिन 20 फरवरी 2015 को इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का गठन किया.