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गोड्डा लोकसभा सीट: बीजेपी का गढ़ है यह क्षेत्र, दिलचस्प होगा 2019 का मुकाबला

 गोड्डा और कांग्रेस में हमेशा से कड़ी टक्कर होती है. गोड्डा में मुख्य रूप से मुस्लिम और पिछड़ी जातियों का बोलबाला है. 

गोड्डा लोकसभा सीट: बीजेपी का गढ़ है यह क्षेत्र, दिलचस्प होगा 2019 का मुकाबला
इस लोकसभा चुनाव में यह सीट जेविएम के खाते में गई है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

गोड्डा: 2000 में बिहार से अलग होने के बाद झारखंड नया राज्य बना और कई राजनीतिक समीकरण भी बदले. फिलहाल देशभर में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र और विपक्ष दोनों ही अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. एक ओर जहां सत्ता पर काबिज बीजेपी 2014 की शानदार जीत को दोहराना चाहती है तो वहीं, दूसरी ओर विपक्ष भी बीजेपी को केंद्र से हटाने में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहता है. जिसके चलते केंद्र से लेकर राज्यों तक की राजनीति गरमाई हुई है. 

अगर बात गोड्डा लोकसभा सीट की करें तो यह इस क्षेत्र में कोयले का भरपूर खादान है. गोड्डा का रिकॉर्ड कुछ ऐसा है कि यहां से बीजेपी पिछले 7 लोकसभा चुनावों में से 6 चुनावों में जीत दर्ज की है. हालांकि गोड्डा और कांग्रेस में हमेशा से कड़ी टक्कर होती है. गोड्डा में मुख्य रूप से मुस्लिम और पिछड़ी जातियों का बोलबाला है. 

 

1962 और 1967 में यहां से कांग्रेस ने जीत दर्ज की. 1971 में कांग्रेस तो 1977 में यहां से लोकदल ने जीत दर्ज की. 1980 और 1984 में इस सीट से मौलाना समीनुद्दीन जीते. 1989 में इस सीट पर बीजेपी के जनार्दन यादव जीते. 1991 में झामुमो के सुरज मंडल जीते. इसके बाद बीजेपी ने वापसी की. 1996, 1998 और 1999 का चुनाव बीजेपी के टिकट पर जगदंबी प्रसाद यादव जीते.

 2000 का चुनाव बीजेपी के ही टिकट पर प्रदीप यादव जीते. 2004 में कांग्रेस ने वापसी की और उसके टिकट पर फुरकान अंसारी जीते. 2009 और 2014 में बीजेपी के निशिकांत दूबे जीते. इस लोकसभा चुनाव में यह सीट जेविएम के खाते में गई है. जेविएम ने यहां से प्रदीप यादव को उम्मीदवार बनाया है,