लोकसभा चुनाव 2019: हमीरपुर में होगी कांटे की टक्कर, महागठबंधन के बाद रोचक हुई लड़ाई

हमीरपुर वर्तमान में यूपी का 34वां जिला है, जिसे पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत फंड मिलता है. राजनीतिक रूप से इस संसदीय सीट पर सपा, बसपा, कांग्रेस और बीजेपी चारों पार्टियां जीत दर्ज कर चुकी हैं.

लोकसभा चुनाव 2019: हमीरपुर में होगी कांटे की टक्कर, महागठबंधन के बाद रोचक हुई लड़ाई
हमीरपुर लोकसभा सीट पर आजादी के बाद पहली बार साल 1952 में लोकसभा चुनाव हुआ था.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 47वें नंबर की सीट को हमीरपुर की सीट के नाम से जाना जाता है. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की हमीरपुर लोकसभा सीट चित्रकूट धाम बांदा मंडल का हिस्सा है. कई आश्रम और मंदिर हमीरपुर में हैं, जिसकी वजह से ये प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं. मेहर बाबा मंदिर, गायत्री तपोभूमि, बांके बिहारी मंदिर, ब्रह्मानंद धाम, आदि कई धाम यहां हैं. हमीरपुर वर्तमान में यूपी का 34वां जिला है, जिसे पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत फंड मिलता है. राजनीतिक रूप से इस संसदीय सीट पर सपा, बसपा, कांग्रेस और बीजेपी चारों पार्टियां जीत दर्ज कर चुकी हैं.

2014 में ये था जनाधार
साल 2014 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी से कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने सपा के बिशंभर प्रसाद निषाद को चुनावी मैदान में मात दी थी. बीजेपी के कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल पहले, सपा के बिशंभर प्रसाद निषाद दूसरे, बीएसपी के राकेश कुमार गोस्वामी तीसरे और कांग्रेस की प्रतिमा लोधी चौथे स्थान पर रही थीं. कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल को 4,53,884 वोट मिले थे, जबकि सपा के बिशंभर प्रसाद निषाद को 1,87,096 वोट मिले थे.

 

ऐसा है राजनीतिक इतिहास
हमीरपुर लोकसभा सीट पर आजादी के बाद पहली बार साल 1952 में लोकसभा चुनाव हुआ था और कांग्रेस के मनुलाल द्विवेदी जीतकर सांसद पहुंचे थे. साल 1952 से लेकर 1971 तक इस सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दबदबा रहा. साल 1991 में विश्वनाथ शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी को हमीरपुर में पहली जीत दिलाई. इसके बाद बीजेपी ने यहां लगातार तीन बार जीत दर्ज की. साल 1999 में बीएसपी प्रत्याशी अशोक चंदेल ने इस सीट से विजयी हुए. साल 2004 में समाजवादी पार्टी ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की. साल 2009 में इस सीट पर बीएसपी ने फिर वापसी की. साल 2014 में बीजेपी ने फिर इस सीट पर कब्जा किया और लोगों ने कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल को अपना सांसद चुनकर लोकसभा तक पहुंचाया.