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लोकसभा चुनाव 2019: धौरहरा सीट पर क्या दोबारा खिलेगा कमल या कांग्रेस करेगी वापसी !

साल 2008 में परिसीमन के बाद धौरहरा लोकसभा सीट वर्चस्व में आई. साल 2009 में यहां पहली बार लोकसभा के चुनाव हुए.

लोकसभा चुनाव 2019: धौरहरा सीट पर क्या दोबारा खिलेगा कमल या कांग्रेस करेगी वापसी !
फाइल फोटो

नई दिल्ली: लखीमपुर खीरी का हिस्सा धौरहरा लोकसभा क्षेत्र सीतापुर और बहराइच से सटा हुआ है. साल 2008 में परिसीमन के बाद धौरहरा लोकसभा सीट वर्चस्व में आई. साल 2009 में यहां पहली बार लोकसभा के चुनाव हुए. साल 2014 में चली मोदी लहर के कारण इस सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी ने अपना कमल खिलाया. बीजेपी की रेखा वर्मा पर लोगों ने भरोसा किया और उन्हें संसद तक पहुंचाया. 

2014 में ये था समीकरण
साल 2014 में बीजेपी की तरफ से रेखा ने करीब 34 फीसदी वोट हासिल किए और बड़ी जीत दर्ज की. साल 2014 में बहुजन समाज पार्टी दूसरे, समाजवादी पार्टी तीसरे और कांग्रेस की ओर से पूर्व सांसद जितिन प्रसाद चौथे नंबर पर रहे थे. 2014 के चुनाव के मुताबिक, यहां पर करीब 17 लाख मतदाता हैं, जिन्होंने अपना मत दिया था. 

 

क्या है सीट राजनीतिक इतिहास
धौरहरा लोकसभा सीट का इतिहास काफी लंबा तो नहीं है. अभी तक यहां सिर्फ दो बार के लोकसभा चुनाव हुए हैं. साल 2009 यहां पहली बार चुनाव हुए तो कांग्रेस नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद चुनाव जीते थे. जितिन प्रसाद शाहजहांपुर से चुनाव जीत कर यहां आए थे और पहले ही चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की. साल 2014 में कांग्रेस की उम्मीदों पर जनता ने पानी फेरा और बीजेपी का कमल यहां खिलाया. 2014 के चुनाव में कांग्रेस ने दोबारा जितिन प्रसादको ही प्रत्याशी बनाया, लेकिन जनता ने उन्हें चौथे पायदान पर रखा. उन्हें सिर्फ 16 फीसदी वोट हासिल हुए थे.