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हजारीबाग लोकसभा सीट:आसान नहीं होगा जयंत सिन्हा के किले को भेदना, दिलचस्प मुकाबला

हजारीबाग सीट से फिलहाल यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा सांसद हैं.

हजारीबाग लोकसभा सीट:आसान नहीं होगा जयंत सिन्हा के किले को भेदना, दिलचस्प मुकाबला
यशवंत सिन्हा ने हावार्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की है. (फाइल फोटो)

हजारीबाग: 2000 में बिहार से अलग होने के बाद झारखंड नया राज्य बना और कई राजनीतिक समीकरण भी बदले. फिलहाल देशभर में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र और विपक्ष दोनों ही अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. एक ओर जहां सत्ता पर काबिज बीजेपी 2014 की शानदार जीत को दोहराना चाहती है तो वहीं, दूसरी ओर विपक्ष भी बीजेपी को केंद्र से हटाने में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहता है. जिसके चलते केंद्र से लेकर राज्यों तक की राजनीति गरमाई हुई है. 

अगर बात हजारीबाग सीट की करें तो यहां से फिलहाल यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा सांसद हैं. खुद यशवंत सिन्हा भी इस सीट से सांसद रहे हैं. हजारीबाग प्रकृति की गोद में बसा बेहद खूबसूरत शहर है. 1968 से पहले हजारीबाग में निर्दलीय प्रत्याशियों का बोलबाला रहा है. 1968 चुनाव में पहली बार यहां से कांग्रेस ने जीत दर्ज की. 1971 में कांग्रेस तो 1977 और 1980 में जनता पार्टी ने यहां से जीत का स्वाद चखा.

 

1984 में कांग्रेस ने यहां से फिर से जीत दर्ज की. 1989 में बीजेपी, 1991 में कम्यूनिस्ट पार्टी,1996 में बीजेपी ने जीत दर्ज की. 1998 और 1999 का चुनाव बीजेपी के यशवंत सिन्हा ने जीता. 2004 में कम्यूनिस्ट पार्टी के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता जीते. 2009 में इस सीट से बीजेपी के टिकट पर यशवंत सिन्हा जीते. 2014 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा ने यहां से जीत दर्ज की. 

 जयंत सिन्हा ने अभी तक अपने सांसद निधि से क्षेत्र के विकास के लिए दिए गए 21.54 करोड़ में 21.08 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. इनमें से 0.46 करोड़ रुपए अभी खर्च नहीं किए गए हैं. उन्होंने 105 फीसदी अपने निधि को खर्च किया है.

जयंत सिन्हा ने 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह को चार लाख से अधिक मतों से हराया था. यशवंत सिन्हा ने हावार्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की है और उनके किले को भेदना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा.