लोकसभा चुनाव 2019: क्या कन्याकुमारी में वापसी कर पाएगी DMK?

पी राधाकृष्ण ने अपने अपने विपक्षी नेता श्री कुमार को इस चुनाव में एक लाख 28 हजार 662 मतों से पराजित किया था.

लोकसभा चुनाव 2019: क्या कन्याकुमारी में वापसी कर पाएगी DMK?

साल 2008 के परिसीमन के बाद कन्याकुमारी लोकसभा सीट अस्तित्व में आई, यहां साल 2009 में आम चुनाव हुए जिसमें DMK ने जीत दर्ज की थी. यहां से जे हेलेन डेविडसन (J. Helen Davidson) सांसद चुने गए थे. 2014 के आम चुनाव में यहां से बीजेपी ने जीत दर्ज की. दक्षिण भारत में राजनीति के परिप्रेक्ष्य से यह भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा मौका था. बीजेपी को यहां मोदी लहर का काफी फायदा मिला. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पी.राधाकृष्णन को जीत मिली थी. उन्हें 3,72,906 वोट मिले थे. 

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पी राधाकृष्णन ने अपने अपने विपक्षी नेता श्री कुमार को 2014 के चुनाव में एक लाख 28 हजार 662 मतों से पराजित किया था. भाजपा को इस चुनाव में 37.60 प्रतिशत और कांग्रेस को 24.64 प्रतिशत मत मिले थे. अन्नाद्रमुक तीसरे स्थान पर रही और उसे 17.78 प्रतिशत मत ही मिले. तमिलनाडु की कन्याकुमारी लोकसभा सीट में हमेशा ही समुदाय और जाति कारक समीकरण चुनावों में अहम रोल निभाते हैं. यहां की आबादी 18,70,374 है, जिसमें से 17.67 % लोग गांवों में और 82.33 % लोग शहरों में निवास करते हैं, यहां 3.97 % लोग एससी वर्ग के हैं. यहां 48.65 % लोग हिंदू धर्म में, 4.20 % प्रतितशत लोग इस्लाम धर्म के हैं और 46.85 % लोग ईसाई धर्म में यकीन रखते हैं.

कन्याकुमारी में 45 % ईसाई समुदाय के लोग और 55 प्रतिशत नादर समुदाय के लोग हैं. तमिलनाडु में भाजपा ने 2014 का लोकसभा चुनाव 6 क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर लड़ा था. तब राज्य में एनडीए को दो सीट मिली थीं. इनमें भाजपा और पट्टाली मक्कल कांची (पीएमके) की एक-एक सीट शामिल है. बता दें कि दक्षिण भारत में सबसे अधिक 39 लोकसभा सीटें तमिलनाडु में हैं, इनमें से 37 सीटें अकेले एआईएडीएमके को मिली थीं. डीएमके और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था. राज्य में एनडीए का वोट शेयर 18.5% और एआईएडीएमके का 44.3% शेयर था.