महाराजगंज में सपा-बसपा को नहीं मिल पा रहा है उम्मीदवार, जनादेश दोहराना चाहती है BJP

बीजेपी ने 2014 में इस सीट पर पार्टी को जीत दिलाने वाले पंकज चौधरी पर ही दांव लगाया है. वहीं, कांग्रेस ने पूर्व सांसद दिवंगत हर्षवर्धन की पुत्री और और पूर्व मीडियाकर्मी सुप्रिया श्रीनेत को प्रत्याशी घोषित किया है.

महाराजगंज में सपा-बसपा को नहीं मिल पा रहा है उम्मीदवार, जनादेश दोहराना चाहती है BJP
महाराजगंज सीट पर लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होना है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) का सियारी रण अपने चरम पर है. वहीं, उत्तर प्रदेश की महाराजगंज लोकसभा सीट पर चुनाव बड़ा दिलचस्प होने वाला है. दरअसल, ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण महाराजगंज लोकसभा सीट पर अभीतक सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने उम्मीदवार की घोषणा ही नहीं की है. बीजेपी ने 2014 में इस सीट पर पार्टी को जीत दिलाने वाले पंकज चौधरी पर ही दांव खेला है. वहीं, कांग्रेस ने पूर्व सांसद दिवंगत हर्षवर्धन की पुत्री और और पूर्व मीडियाकर्मी सुप्रिया श्रीनेत को प्रत्याशी घोषित किया है. महाराजगंज सीट पर लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होना है.  

 

 

2014 के आम चुनाव में बीजेपी को मिली थी जीत
2014 में हुए आम चुनाव में महाराजगंज लोकसभा सीट से बीजेपी की टिकट पर पंकज चौधरी ने 4,71,542 वोट पाकर जीत दर्ज करते हुए संसद पहुंचने में कामयाबी हासिल की थी. बीजेपी सांसद पंकज चौधरी ने बसपा के प्रत्याशी काशी नाथ शुक्ला को करीब ढाई लाख वोटों से हराया था. काशी नाथ शुक्ला को 2,31,084 वोट मिले थे. वहीं, इस सीट पर बसपा प्रत्याशी अखिलेश सिंह को 2,13,974 वोट मिले थे. महाराजगंज लोकसभा सीट पर कुल मतदाता संख्या 1,743,131 है. इनमें 9,46,234 पुरुष मतदाता और 7,96,767 महिला मतदाता हैं. 

ऐसा है राजनीतिक इतिहास
महाराजगंज लोकसभा सीट पर अभीतक 14 बार आम चुनाव हुए हैं. इनमें बीजेपी ने 5, कांग्रेस ने 5, बीएलडी ने 1, सपा 1 जेडीयू ने 1 और एक बार निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है.  लोकसभा सीट पर पहली बार 1962 में चुनाव हुआ था. इस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी महादेव प्रसाद ने जीत दर्ज की थी. 1971 में इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सिब्बन लाल सक्सेना ने जीत दर्ज की थी. 1989 में इस सीट से जेडीयू उम्मीदवार के तौर पर हर्षवर्धन ने जीत दर्ज की थी. वे बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे और 2009 में एकबार फिर से सांसद बने थे. वहीं, 1999 में इस सीट से इकलौती बार सपा प्रत्याशी अखिलेश सिंह चुनाव जीते थे.