पलामू लोकसभा सीट: बीजेपी-आरजेडी में हो सकती है भारी टक्कर, सबकी निगाहें टिकीं

एक ओर जहां सत्ता पर काबिज बीजेपी 2014 की शानदार जीत को दोहराना चाहती है तो वहीं, दूसरी ओर विपक्ष भी बीजेपी को केंद्र से हटाने में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहता है.

पलामू लोकसभा सीट: बीजेपी-आरजेडी में हो सकती है भारी टक्कर, सबकी निगाहें टिकीं
2019 लोकसभा से पहले पलामू में भी लोगों के बीच यही चर्चा का विषय है कि कौन सी पार्टी किसे वोट देगी.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

पलामू: 2000 में बिहार से अलग होने के बाद झारखंड नया राज्य बना और कई राजनीतिक समीकरण भी बदले. फिलहाल देशभर में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र और विपक्ष दोनों ही अपनी तैयारियों में जुट गए हैं. एक ओर जहां सत्ता पर काबिज बीजेपी 2014 की शानदार जीत को दोहराना चाहती है तो वहीं, दूसरी ओर विपक्ष भी बीजेपी को केंद्र से हटाने में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहता है. जिसके चलते केंद्र से लेकर राज्यों तक की राजनीति गरमाई हुई है. 

बात अगर पलामू सीट की करें तो यह दो जिलों के कुछ हिस्सों को मिलाकर बना हुआ है जिसका मुख्यालय मेदनीनगर है. इस सीट से 1951 और 1957 का चुनाव कांग्रेस के गजेंद्र प्रसाद सिन्हा ने जीता. 1962 में स्वतंत्र पार्टी के शशांक मंजरी जीतीं. 1967 और 1971 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर कमला कुमार जीतीं. 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर रामदेनी राम जीतीं. इसके बाद फिर 1980 और 1984 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर कमला कुमारी जीतीं.

 

1989 में जनता दल के टिकट पर जोरावर राम जीते. 1991 में बीजेपी के टिकट पर राम देव राम जीते. 1996, 1998 और 1999 का चुनाव बीजेपी के टिकट पर ब्रज मोहन राम जीतने में कामयाब हुए. 2004 में इस सीट आरजेडी के टिकट पर मनोज कुमार और 2006 के उपचुनाव में उसके ही टिकट पर गुरान राम जीते. 2009 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के कामेश्वर बैठा जीते. 2014 में बीजेपी के विष्णू दयाल राम जीतकर संसद पहुंचे.

2014 लोकसभा चुनाव में  बीजेपी के विष्णु दयाल राम ने करीब 2.50 लाख से अधिक मतों से आरजेडी के मनोज कुमार को हराया था. विष्णू दयाल राम को 4.76 लाख और मनोज कुमार को 2.12 लाख वोट मिले थे.

देखने वाली बात ये है कि कौन सी पार्टी यहां से मतदाताओं को रिझा पाती है. 2019 लोकसभा से पहले पलामू में भी लोगों के बीच यही चर्चा का विषय है कि कौन सी पार्टी किसे वोट देगी.