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रतलाम लोकसभा सीट: दिलीप सिंह की मौत से एक ही साल में मुरझाया 2014 में खिला कमल

यहां पहले कांग्रेस का एक छत्र राज्य था. अब तक हुए 16 चुनावों में यहां 14 बार BJP ने ही जीत दर्ज कराई है. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी के दिलीप सिंह भूरिया ने यहां जीत हासिल की थी. 

रतलाम लोकसभा सीट: दिलीप सिंह की मौत से एक ही साल में मुरझाया 2014 में खिला कमल
फाइल फोटो

नई दिल्लीः कभी झाबुआ के नाम से जानी जाने वाली रतलाम लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती थी. यहां पहले कांग्रेस का एक छत्र राज्य था. अब तक हुए 16 चुनावों में यहां 14 बार BJP ने ही जीत दर्ज कराई है. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी के दिलीप सिंह भूरिया ने यहां जीत हासिल की थी. बता दें दिलीप सिंह भूरिया कभी कांग्रेस का हिस्सा थे, लेकिन 2014 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और रतलाम में जीत दर्ज कराई. आदिवासी नेता दिलीप सिंह ने यहां कांग्रेस में रहते हुए लगातार पांच बार रतलाम का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा से चुनाव लड़ने का फैसला किया और जीते भी. ऐसे में अब उनकी मृत्यु के बाद भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं.

राजनीतिक इतिहास
रतलाम लोकसभा सीट को कभी झाबुआ के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2008 में हुए परिसीमन में इसका नाम बदलकर रतलाम कर दिया गया. 2009 में यहां कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने जीत हासिल की थी, लेकिन 2014 में मोदी लहर के चलते भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया ने यहां जीत हासिल की. वहीं दिलीप सिंह भूरिया की मौत के चलते यहां हुए उपचुनाव में उनकी बेटी निर्मला भूरिया ने भाजपा का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन कांतिलाल भूरिया के सामने हार का सामना करना पड़ा.

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2014 के राजनीतिक समीकरण
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के दिलीप सिंह भूरिया ने यहां से जीत हासिल की. उन्होंने कुल 1,08,457 वोटों के अंतर से भाजपा को जीत दिलाई थी. दिलीप सिंह को इस चुनाव में 5,45,980 तो कांतिलाल भूरिया को 4,37,523 वोट मिले थे. वहीं दिलीप सिंह भूरिया की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने दिलीप सिंह भूरिया की बेटी निर्मला भूरिया को 88,877 मतों के अंतर से हराया था और एक बार फिर कांग्रेस का राज स्थापित किया था.

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सांसद का रिपोर्ट कार्ड
सांसद कांतिलाल भूरिया को उनके निर्वाचन क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए 13.63 करोड़ की राशि आवंटित हुई, जिसमें से उन्होंने 10.05 करोड़ खर्च कर दिए, जबकि बाकि की राशि बिना खर्च किए रह गए. संसद में भूरिया की उपस्थिति 54 फीसदी रही. इस दौरान उन्होंने 1 डिबेट में हिस्सा लिया और एक भी सवाल नहीं किया.