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लोकसभा चुनाव 2019: किसकी होगी श्रावस्ती? बीजेपी पर दूसरी बार कमल खिलाने की चुनौती

बुद्धकालीन भारत के समय इसकी गिनती 16 महाजनपदों में हुआ करती थी. बौद्ध मान्यता के अनुसार अवत्थ श्रावस्ती नाम के एक ऋषि यहां रहते थे, जिनके नाम पर इस नगर का नाम श्रावस्ती पड़ा. महाभारत के अनुसार श्रावस्ती नाम श्रावस्त नाम के एक राजा के नाम पर रखा गया.

लोकसभा चुनाव 2019: किसकी होगी श्रावस्ती? बीजेपी पर दूसरी बार कमल खिलाने की चुनौती
इस शहर की पहचान बौद्ध स्थल के रूप में है और यहां पर दुनियाभर के बौद्ध श्रद्धालु आते हैं.

नई दिल्ली: श्रावस्ती लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 58वें नंबर की सीट है. इस लोकसभा सीट में यूपी की पांच विधानसभा सीटें आती हैं. हिमालय की तलहटी में बसा श्रावस्ती जिला नेपाल सीमा के करीब है. इस शहर की पहचान बौद्ध स्थल के रूप में है और यहां पर दुनियाभर के बौद्ध श्रद्धालु आते हैं. साल 2008 में परिसीमन के बाद यह निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्व में आया, 2009 में यहां पहली बार चुनाव हुए. 2014 में बीजेपी ददन मिश्रा ने यहां से जीत दर्ज की. 

ऐसे मिला नाम
प्राचीन काल में श्रावस्ती कोशल महाजनपद का एक प्रमुख नगर हुआ करता था. महात्मा बुद्ध के जीवनकाल में यह कोशल देश की राजधानी थी. बुद्धकालीन भारत के समय इसकी गिनती 16 महाजनपदों में हुआ करती थी. बौद्ध मान्यता के अनुसार अवत्थ श्रावस्ती नाम के एक ऋषि यहां रहते थे, जिनके नाम पर इस नगर का नाम श्रावस्ती पड़ा. महाभारत के अनुसार श्रावस्ती नाम श्रावस्त नाम के एक राजा के नाम पर रखा गया.

 

2014 का ऐसा था जनादेश
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के दद्दन मिश्रा ने चुनाव में जीत हासिल की थी. उन्होंने सपा के अतीक अहमद को चुनावी दंगल में मात दी थी. बहुजन समाज पार्टी के लालजी वर्मा तीसरे स्थान पर रहे थे. वहीं, पीस पार्टी चौथे, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी क्रमश: पांचवें और छठे स्थान पर रहे थे. 

ऐसा है राजनीतिक इतिहास 
साल 2008 में परिसीमन के बाद यह निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्त्व में आया, 2009 में यहां पहली बार चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस के विनय कुमार पाण्डेय उर्फ विष्णु ने बहुजन समाज पार्टी के रिहाज जहीर को हराया और श्रावस्ती के पहले सांसद बनने का रिकार्ड अपने नाम किया. लेकिन साल 2014 में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के ददन मिश्रा का कब्जा हो गया.