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इस राज्य में सबसे ज्यादा वोटरों ने दबाया नोटा का बटन, लाखों मतदाताओं को पसंद नहीं आए उम्मीदवार

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, बिहार में 40 लोकसभा सीटों पर हुए कुल मतदान में दो फीसदी लोगों ने नोटा का चयन किया. दमन और दीव में 1.7 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 1.49 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 1.44 फीसदी मतदाताओं ने नोटा को चुना. पंजाब के 1.54 लाख से अधिक मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. राज्य में कांग्रेस ने आम चुनाव में 13 लोकसभा सीटों में से आठ जीतकर शानदार जीत दर्ज की है.

इस राज्य में सबसे ज्यादा वोटरों ने दबाया नोटा का बटन, लाखों मतदाताओं को पसंद नहीं आए उम्मीदवार
बिहार के 8.17 लाख और राजस्थान में 3.27 लाख मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों में देश में सबसे ज्यादा बिहार की जनता ने नोटा का बटन दबाकर अपने उम्मीदवारों को खारिज किया. बिहार के 8.17 लाख मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया. इसी तरह, राजस्थान में 3.27 लाख मतदाताओं ने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प चुना. राजस्थान में नोटा में डाले गए मत भाकपा, माकपा, और बसपा के उम्मीदवारों को मिले वोटों से ज्यादा रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनावों में भी लगभग इतने ही यानी 327902 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य के 3 लाख 27 हजार 559 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. यह राज्य की 25 लोकसभा सीटों में डाले गए कुल मतों के 1.01 प्रतिशत के बराबर है. 

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, बिहार में 40 लोकसभा सीटों पर हुए कुल मतदान में दो फीसदी लोगों ने नोटा का चयन किया. दमन और दीव में 1.7 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 1.49 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 1.44 फीसदी मतदाताओं ने नोटा को चुना. पंजाब के 1.54 लाख से अधिक मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. राज्य में कांग्रेस ने आम चुनाव में 13 लोकसभा सीटों में से आठ जीतकर शानदार जीत दर्ज की है. निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 1,54,423 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना. यह कुल पड़े मतों का 1.12 प्रतिशत है.

आंकड़ों के मुताबिक, 13 लोकसभा सीटों में से फरीदकोट सीट पर सबसे ज्यादा मतदाताओं ने उम्मीदवारों को खारिज किया. फरीदकोट में कुल 19,246 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में लगभग सभी सीटों पर नोटा पांचवें स्थान पर रहा. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आम चुनावों में 45,000 से अधिक मतदाताओं ने नोटा विकल्प को चुना जो 2014 के आम चुनाव में इस श्रेणी में डाले गए मतों से 6,200 अधिक है. नोटा के तहत डाले गए वोट कुल वोटों का 0.53 फीसदी है. चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, उत्तरी पश्चिम (आरक्षित) सीट पर सबसे अधिक 10,210 नोटा वोट डाले गए. इस सीट पर सबसे कम उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे जबकि यहां सबसे अधिक मतदाता हैं.

महाराष्ट्र में 2014 के लोकसभा चुनावों की तुलना में 2019 में ज्यादा वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना. चुनाव आयोग के आंकड़ों से यह पता चला है. राज्य में 4,86,902 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना जबकि 2014 के चुनावों में 4,83,459 वोटरों ने नोटा का बटन दबाया था. महाराष्ट्र में पालघर लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 29,479 लोगों ने नोटा का बटन दबाया जबकि नक्सल प्रभावित गढ़चिरोली-चिमूर सीट पर 24,599 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना.

असम में लोकसभा चुनावों में 1,78,353 वोटरों ने नोटा का बटन दबाया जो पिछले चुनावों में नोटा के आंकड़ों से 31,296 ज्यादा हैं. राज्य में 0.99 फीसदी लोगों ने नोटा का बटन दबाया. राज्य में डिब्रूगढ़ सीट पर सबसे ज्यादा वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में एक साथ हुए लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में 13,000 से ज्यादा वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना. राज्य में करीब 13,283 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना. 

भारत में उम्मीदवारों की सूची में नोटा को 2013 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद शामिल किया गया था. इससे मतदाताओं को एक ऐसा विकल्प मिला कि अगर वह अपने क्षेत्र के किसी उम्मीदवार को पसंद नहीं करते हैं तो वह अपना मतदान नोटा पर कर सकते हैं. 16वीं लोकसभा के चुनाव में 2014 में पहली बार संसदीय चुनाव में नोटा की शुरुआत हुई. इसमें करीब 60 लाख मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को चुना. यह लोकसभा चुनाव में हुए कुल मतदान का 1.1 फीसदी था.