जानें, राजस्थान के लोकसभा चुनाव में जीत का समीकरण, इन मुद्दों पर BJP कांग्रेस को कर सकती है क्लीन बोल्ड

राज्य में 1984 के चुनाव के दौरान कांग्रेस ने तो, 2014 के चुनाव के दौरान बीजेपी सारी सीटें जीतने में कामयाब रही.

जानें, राजस्थान के लोकसभा चुनाव में जीत का समीकरण, इन मुद्दों पर BJP कांग्रेस को कर सकती है क्लीन बोल्ड
चुनाव प्रचार के लिए मुद्दों और रणनीति के साथ सभी दल तैयार हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:राजस्थान में लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस अपनी-अपनी ताकत झोंक रहे हैं. लेकिन, यहां जीत के लिए अलग ही समीकरण बनता दिख रहा है. माना जाता है कि राज्य में जिसकी सरकार होती है उनका पलड़ा भारी होता है. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में बीजेपी ने 25 सीटें जीती थी. वहीं, इस बार के चुनाव में बीजेपी की क्लीन स्वैप करने की योजना सफल होते नहीं दिख रही है. 

अब तक राजनीतिक परिपाटी पर गौर करे तो साफ पता चलता है कि जिस दल की राज्य में सरकार होती है, उसी दल का पलड़ा लोकसभा चुनाव में भी भारी रहता है. लेकिन बीजेपी के लिए गुटबाटी में उलझी कांग्रेस काफी उम्मीदें भी बढ़ा रही है.

वैसे राज्य विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान बीजेपी-कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. चुनावी मैदान में कड़ी टक्कर भी हुई. जिसके बाद कांग्रेस ने बीजेपी को मामूली वोट-प्रतिशत के अंतर से शिकस्त देने में कामयाब रही. विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस 100 सीटों पर जीतने वाली कांग्रेस के लिए राहत की बात वसुंधरा गुट में चल रही गुटबाजी रही. माना जाता रहा कि राजे के खिलाफ बीजेपी और संघ में मौजूद घड़े ने वसुंधरा का जमकर विरोध किया जिसके कारण उनकी हार हुई. विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के पक्ष में 39.3% मत पड़े. वहीं, बीजेपी के पक्ष में 38.8% मतदान हुआ था.

बीजेपी में जारी है गुटबाजी
राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बीजेपी ने चुनाव हारने वाले सीएम को केंद्रीय कमिटी में जगह देकर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की ओर इशारा किया था. ताकि वसुंधरा से नाराज असंतुष्ट खेमे की नाराजगी को दूर किया जा सके. लेकिन बीजेपी में गुटबाजी अब भी जारी है.

कांग्रेस भी बीजेपी को मात देने के लिए कर रहा तैयारी 
1984 के चुनाव में लोकसभा चुनाव में सारे 25 सीटें जीतने वाली कांग्रेस भी इस बार बीजेपी को चुनौती देने के लिए रणनीति तैयार कर रही है. जहां बीजेपी ने 16 उम्मीदवार अबतक घोषित हो चुके है. लेकिन कांग्रेस ने अपनी लिस्ट अबतक जारी नहीं की है. कांग्रेस बीजेपी को चुनौती देने के लिए अपनी रणनीति को पुख्ता कर रही है. 

कांग्रेस में भी जारी है गुटबाजी 
राज्य कांग्रेस में गहलोत और सचिन के खेमे में लंबे समय से लडाई जारी है. विधानसभा चुनाव के दौरान इसका खामियाजा पार्टी के लिए जरूरी सीटे नहीं जीतकर भुगतना पड़ा. कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि अगर पार्टी में जारी गतिरोध पर लगाम नहीं लगाया गया तो कांग्रेस को बीजेपी को चुनौती देना काफी मुश्किल होगा.

बीजेपी एयर स्ट्राइक तो कांग्रेस कर्जमाफी के मुद्दे पर लड़ेगी चुनाव

कांग्रेस ने राज्य में चुनाव जीतने के बाद कर्जमाफी की घोषणा को पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाने की पहल की है. किसानों की कर्जमाफी के अलावा, वृद्धों के लिए पेंशन के मुद्दे पर वह चुनावी जीत पुख्ता करने का प्रयास करेगी. वैसे राज्य में गहलोत सरकार ने 19 लाख किसानों का 7000 करोड़ का कर्ज माफ कर चुकी है.  

वहीं, बीजेपी एयर स्ट्राइल और आरक्षण के मुद्दे पर आम जनों के बीच जाएगी. पुलवामा हमले के बाद पीएम मोदी ने अपने पहले राजस्थान दौरे के दौरान टोंक में चुनावी सभा की थी. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस को इन मुद्दों पर आड़े हाथ लिया था. अपने दूसरे चुनावी दौरे के दौरान उन्होंने चुरू में रैली की थी. उसी दिन भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइल किया था. सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर भी बीजेपी अपने कोर वोटर को अपने पाले में करने का प्रयास करेगी.

इन चेहरों को चुनाव प्रचार के लिए उतार सकती है बीजेपी-कांग्रेस
राज्य में चुनाव प्रचार के लिए बीजेपी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी, गुलाबचंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, अरूण चतुर्वेदी, अशोक परमानी को उतारने जा रही है. इसके अलावा केंद्रीय नेतृत्व से पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, विजय गोयल, प्रकाश जावड़ेकर और सुंधाशु त्रिवेदी चुनाव प्रचार के लिए मौजूद रहेंगे. लेकिन राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान आक्रामक प्रचार करने वाले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम की अबतक कोई भी सुचना नहीं मिली है. वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ता राजस्थान पीसीसी से लगातार राहुल गांधी, सोनिया के अलावा प्रियंका को भी चुनाव प्रचार में बुलाने की मांग कर रहे हैं.