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लोकसभा चुनाव: राजेश खन्ना ने आखिर कभी क्यों नहीं की 1991 के बाद शत्रुघ्न सिन्हा से बात!

चुनाव में तो कई लोग आपस में प्रतिद्वंदी होते हैं, लेकिन कभी-कभी इन प्रतिद्वंदियों में पूरे जीवन के लिए ही बैर हो जाता है, ऐसा ही कुछ हुआ था 1991 के लोकसभा दंगल के बाद हुए उपचुनाव में. 

लोकसभा चुनाव: राजेश खन्ना ने आखिर कभी क्यों नहीं की 1991 के बाद शत्रुघ्न सिन्हा से बात!
शत्रुघ्न ने भी यह बात कभी नहीं सोची होगी यह चुनाव पूरे जीवन के लिए उनसे उनका दोस्त छीन लेगा. फोटो साभार: फाइल फोटो

नई दिल्ली: चुनाव में तो कई लोग आपस में प्रतिद्वंदी होते हैं, लेकिन कभी-कभी इन प्रतिद्वंदियों में पूरे जीवन के लिए ही बैर हो जाता है, ऐसा ही कुछ हुआ था 1991 के लोकसभा दंगल के बाद हुए उपचुनाव में. जब फ़िल्मी दुनिया से आये दो सितारों और बेहतरीन दोस्तों के बीच दिल्ली की लोकसभा सीट को लेकर कुछ ऐसी ठनी की दोस्ती कभी न मिटने वाली दुश्मनी में बदल गई.  

बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना का पूरे देश में रुतबा कुछ ऐसा था कि जहां दूसरी राजनीतिक सभाओं में पार्टी का नाम गूंजता था वहीं  काका की सभा में उनके चाहने वाले पलकें बिछाकर अपने हीरो की एक झलक देखने के लिए बेताब होते थे. काका का स्टारडम इतना तगड़ा था कि उनके खिलाफ बीजेपी ने भी अपना बॉलीवुड स्टार छेनू यानि शत्रुघ्न सिन्हा को खड़ा किया था. 

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लेकिन शत्रुघ्न ने भी यह बात कभी नहीं सोची होगी यह चुनाव पूरे जीवन के लिए उनसे उनका दोस्त छीन लेगा. सुनने में थोड़ा अजीब है लेकिन यह बात सच है कि बॉलीवुड सुपर स्टार राजेश खन्ना को शत्रुघ्न का अपने खिलाफ प्रतिद्वंदी बनना इतना बुरा लगा था की जीतने के बाद भी कभी राजेश ने उनसे बात नहीं की.    

अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी आत्मकथा 'ऐनीथिंग बट खामोश' में इस बात का खुलासा किया है. साल 2016 में किताब की लॉचिंग के मौके पर खुद शत्रुघन ने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती बताया था. सिन्हा का कहना है कि इसके लिए उन्होंने दिग्गज अभिनेता से बाद में माफी भी मांगी थी. 

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दिग्गज अभिनेता ने उस दौर की दुख भरी यादों को भी साझा किया. सिन्हा ने यह भी बताया था कि, 'चुनाव हारने के बाद मैं बहुत रोया था. मेरे लिए प्रचार करने आडवाणी जी एक भी बार नहीं आए थे, इससे भी मेरा दिल टूट गया था. वह दौर मेरे लिए बेहद खराब था। राजनीति के सबसे क्रूर चेहरे को मैंने उस दौरान देखा था.' 

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