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मध्य प्रदेशः मालवा-निमाड़ की 8 लोकसभा सीटों पर महा-मुकाबला कल, जानिए पूरा गणित

अंतिम चरण में मालवा-निमाड़ का मिजाज देखना होगा. हालाकि देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा के मतदाताओं की खामोशी ने पूरे प्रदेश में लहर, तूफान या आंधी जैसे शब्दों पर विराम लगा दिए हैं. निश्चित ही मतदाता देख, सुन और समझ सब रहा है लेकिन बोलने से बच रहा है.

मध्य प्रदेशः मालवा-निमाड़ की 8 लोकसभा सीटों पर महा-मुकाबला कल, जानिए पूरा गणित

नई दिल्लीः 19 मई को मध्य प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों पर मतदान के साथ चुनाव पूरे हो जाएंगे और 29 सीटों का तीन दिन तक विश्लेषण चलेगा. अंतिम चरण में मालवा-निमाड़ का मिजाज देखना होगा. हालाकि देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा के मतदाताओं की खामोशी ने पूरे प्रदेश में लहर, तूफान या आंधी जैसे शब्दों पर विराम लगा दिए हैं. निश्चित ही मतदाता देख, सुन और समझ सब रहा है लेकिन बोलने से बच रहा है. जाहिर है इस बार मतदाता नहीं नतीजे बोलेंगे 23 मई को.

देवास (अनुसूचित जाति) लोकसभा सीट
देवास (अनुसूचित जाति) लोकसभा सीट में सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा में है. दोनों ही प्रत्याशी नए हैं. जहां कांग्रेस ने पद्मश्री से नवाजे गए प्रहलाद टिपानिया (कबीर के भजनों के अंतर्राष्ट्रीय गायक) को उतारा है, तो वहीं भाजपा ने कांग्रेस के न्याय का जवाब देने सिविल जज की नौकरी छोड़कर राजनीतिज्ञ बने महेंद्र सिंह सोलंकी पर दांव आजमाया है. 

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यहां 24.29 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति तथा 2.69 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है. 2009 परिसीमन से पहले सीट का नाम शाजापुर था बाद में कुछ विधानसभाएं जोड़ी गईं तो कुछ हटाई गईं लेकिन मतदाताओं का मिजाज नहीं बदला. अब तक 3-3 बार जनसंघ और कांग्रेस 7 बार भाजपा और 1 बार भारतीय लोकदल को जीत मिली. जीत का अंतर सबसे कम 1.2 प्रतिशत 1957 में तो सबसे ज्यादा 24.5 प्रतिशत 2014 में रहा. 8 विधानसभा क्षेत्रों में शाजापुर, कालापीपल, सोनकच्छ, हाटपिपल्या में कांग्रेस तो आगर, आष्टा, शुजालपुर, देवास में भाजपा काबिज है.

उज्जैन (अनुसूचित जाति) सीट
उज्जैन (अनुसूचित जाति) सीट यूं का गढ़ मानी जाती है. महाकाल की नगरी है और 12 ज्योर्तिलिंगों में एक है. एक मिथक भी है कि जो सरकार सिंहस्थ कराती है उसकी विदाई हो जाती है. भाजपा ने मौजूदा सांसद चिंतामणि मालवीय के स्थान पर युवा चेहरा अनिल फिरोजिया जो खटीक समाज से हैं को आगे रखा है. वहीं, कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और बलाई समाज जो अक्सर निर्णायक होता है, के बाबूलाल मालवीय को चुनावी रण में उतारकर भाजपा से यह सीट छीनने की रणनीति तैयार की है.

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यहां 26 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति तथा 2.3 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है. कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशी दोनों ही पूर्व विधायक हैं, लेकिन लोकसभा के चुनाव में पहली बार आमने सामने हैं. अब तक भाजपा 7 कांग्रेस 5 जनसंघ 2 तथा 1 बार लोकदल ने चुनाव जीता है. यहां 8 विधानसभा क्षेत्रों में नागदा-खाचरौद, बड़नगर, आलोट, तराना, घट्टिया में कांग्रेस तो महिदपुर, उज्जैन दक्षिण, उज्जैन उत्तर में भाजपा काबिज है.

मंदसौर (सामान्य) लोकसभा सीट
मंदसौर (सामान्य) सीट बेहद हाईप्रोफाइल है. यह हिंदू और जैन मंदिरों के लिए भी विख्यात है. यहां राहुल ब्रिगेड की मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस से जबकि भाजपा से मौजूदा सांसद सुधीर गुप्ता हैं. आरएसएस के गढ़ मंदसौर में 14 में 11 चुनाव भाजपा जीती तो केवल 3 कांग्रेस जीत पाई. यहां 16.78 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति तथा 5.36 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है.

किसान आंदोलन के दौरान 6 जून, 1917 को पुलिस की गोलियों से 6 किसानों की मौत के बाद भी 8 विधानसभा सीटों में 7 पर भाजपा की जीत काफी कुछ कहती है. विधानसभा जावरा, नीमच, मंदसौर, गरोठ, जावद, मल्हारगढ़, मनासा में भाजपा तो केवल सुवासरा में कांग्रेस काबिज है.

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रतलाम (अनुसूचित जनजाति) लोकसभा सीट
रतलाम (अनुसूचित जनजाति) लोकसभा सीट को 2009 से पूर्व झाबुआ नाम से जाता था. यहां 73.54 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति तथा 4.51 प्रतिशत अनुसूचित जाति की है. कांग्रेस का मजबूत गढ़ है. 14 बार कांग्रेस तो 2 बार भाजपा को जीत मिली. पांच बार के सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के दबदबे वाली सीट पर कांग्रेस से वो ही उम्मीदवार हैं, जबकि भाजपा ने इंजीनियर से नेता बने एस डामोर को उतारा है, जिन्होंने कांतिलाल के बेटे विक्रांत भूरिया को 2018 के विधानसभा चुनाव में करीब 10 हजार मतों से हराया था.

धार (अनुसूचित जनजाति) लोकसभा सीट
धार (अनुसूचित जनजाति) लोकसभा सीट महत्वपूर्ण है. धार को परमार राजा भोज ने बसाया वहीं बेरन पहाड़ियां और झीलों तथा हरे-भरे वृक्षों ने खूबसूरत बनाया. 1967 से अस्तित्व में आने के बाद कांग्रेस 7 बार 3-3 बार जनसंघ और भाजपा तथा 1 बार भारतीय लोकदल जीती. भाजपा ने मौजूदा सांसद सावित्री ठाकुर की जगह दो बार सांसद रहे छतरसिंह दरबार को जबकि कांग्रेस ने दिनेश गिरवाल को प्रत्याशी बनाया है जो जिला पंचायत से बड़ा कोई चुनाव नहीं लड़े हैं. कांग्रेस ने 3 बार सांसद रहे गजेंद्रसिंह राजूखेड़ी का टिकट काटा है.

मजेदार यह कि 2014 में भाजपा सारे विधानसभाओं में 1 लाख 4 हजार 328 मतों से जीती जबकि हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से 2 लाख से ज्यादा मत मिले. इसी आंकड़े के सहारे जीत का मैजिक ढ़ूढ़ा जा रहा है. यहां 51.42 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति 7.66 प्रतिशत अनुसूचित जाति की है. आठ विधानसभा क्षेत्रों में सरदारपुर, मनवार, बदनावर, गंधवानी, धरमपुरी, कुक्षी में कांग्रेस तो डॉ.अंबेडकरनगर-महू तथा धार में भाजपा काबिज है. निश्चित ही मुकाबला कड़ा लेकिन दिलचस्प होगा.

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इंदौर (सामान्य) लोकसभा सीट
इंदौर (सामान्य) लोकसभा सीट सुमित्रा महाजन के चलते हमेशा सुर्खियों में रही. इंदौरी भी मानते हैं कि यह चुनाव महज रस्म अदायगी है. नरेंद्र मोदी और प्रियंका के रोड शो के बाद कार्यकर्ताओं में थोड़ा जोश जरूर दिखा, लेकिन सच यह है कि सांसदी की दौड़ में भाजपा और कांग्रेस के निगम पार्षदी चुनाव जीते प्रत्याशी मैदान में हैं. कांग्रेस ने पंकज सिंघवी पर दांव खेला है जो 21 साल बाद दोबारा लोकसभा मैदान में हैं और 1998 में सुमित्रा महाजन से 49852 मतों से हारे थे.

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यहां 16.75 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति 4.21 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है. भाजपा ने शंकर लालवानी को टिकट दिया जिन्हें ताई का उत्तारधिकारी बता मोदी के नाम पर वोट मांगा जा रहा है. कांग्रेस ने इंदौर के विकास का घोषणापत्र जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, यातयात खेल, इंदौर मेट्रो सहित इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य मुद्दों पर अपना विजन रख मतदाताओं का भरोसा जीतने की कोशिश की है.

खरगोन (अनुसूचित जनजाति) सीट
खरगोन (अनुसूचित जनजाति) सीट भारत को उत्तर से दक्षिण में जोड़ने वाले रास्ते पर बसा है. यहां से कांग्रेस के डॉ. गोविंद मुजाल्दा तो भाजपा के गजेंद्र पटेल के बीच मुकाबल है. यहां से अब तक भाजपा 7, कांग्रेस 5, जनसंघ 2 और भारतीय लोकदल ने 1 बार जीत हासिल की है. अमूमन कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुकाबला रहा है, लेकिन 2 बार से लगातार भाजपा काबिज है और हैट्रिक की कोशिशें जारी है.

यहां 53.56 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की और 9.02 प्रतिशत अनुसूचित जाति की है. देपालपुर, इंदौर-1, सांवेर, राऊ में कांग्रेस तो इंदौर-2, इंदौर-3, इंदौर-4 और इंदौर-5 में भाजपा काबिज है. नतीजे बताएंगे कि खरगोन किसके साथ जाता है.

खंडवा (सामान्य) लोकसभा सीट
खंडवा (सामान्य) लोकसभा सीट नर्मदा और ताप्ती नदी घाटी के मध्य है. ओमकारेश्वर पवित्र दर्शनीय स्थल है जो भारत के 12 ज्योतिर्लिगों में शामिल है. फिल्म अभिनेता कुमार किशोर कुमार की जन्म स्थली भी है. इसका पुराना नाम खांडववन था जो धीरे-धीरे खंडवा हो गया. यहां पर मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा. सबसे ज्यादा जीतने वाले भाजपा के नंदकुमार चौहान हैं जो फिर भाजपा के प्रत्याशी हैं. कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को मैदान में उतारा है. 

दिलचस्प यह कि दोनों ही अपनी-अपनी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं. यहां 35.13 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति 10.85 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति की है. कांग्रेस को 7 तो भाजपा को 6 तथा 1 बार भारतीय लोकदल को जीत मिली. 8 विधानसभा सीटों में मंधाता, बड़वाह, नेपानगर, भीकनगांव में कांग्रेस तो खंडवा, पंधाना, बागली में भाजपा तथा बुरहानपुर में निर्दलीय काबिज हैं. ऐसे में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला होता रहा.