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मेनका गांधी लड़ सकती हैं करनाल से चुनाव, पीलीभीत से उतर सकते हैं वरुण गांधी

बिहार में नवादा सीट के बीजेपी के सहयोगी लोजपा के खाते में जाने की संभावना व्‍यक्‍त की जा रही है.

मेनका गांधी लड़ सकती हैं करनाल से चुनाव, पीलीभीत से उतर सकते हैं वरुण गांधी

नई दिल्‍ली: आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी अपनी परंपरागत सीट पीलीभीत छोड़कर इस बार हरियाणा के करनाल से लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं. उनकी जगह पुत्र वरुण गांधी पीलीभीत से चुनाव लड़ सकते हैं. वरुण गांधी इस वक्‍त सुल्‍तानपुर से बीजेपी सांसद हैं. इसी तरह बिहार में नवादा सीट के बीजेपी के सहयोगी लोजपा के खाते में जाने की संभावना व्‍यक्‍त की जा रही है. अभी इस सीट से बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सांसद हैं. लोजपा के पास इस सीट के जाने के बाद गिरिराज सिंह बेगूसराय से चुनाव लड़ सकते है. इस बारे में अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह लेंगे.

गठबंधन की जंग: भाजपा ने विपक्षी दलों पर बनाई बढ़त
इस बीच लोकसभा चुनावों के लिए कई अहम राज्यों में गठबंधन बनाने के लिए प्रतिबद्ध भाजपा ने चुनाव के लिए कांग्रेस समेत अपने विरोधियों पर शुरुआती बढ़त हासिल कर ली है. चुनाव में छोटे सहयोगियों द्वारा एक-एक प्रतिशत वोट जुटाने का भी अंतिम नतीजों पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है. हालांकि भाजपा के अपने कुछ सहयोगियों से कई बार असहज रिश्ते हुए है लेकिन कई नेताओं का मानना है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इन दलों को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं जैसा कि उसने बिहार में सीटों के बंटवारे पर उदार रुख अपनाया.

तमिलनाडु जैसे बड़े राज्य में कम प्रभाव होने के बावजूद उसने सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक से गठबंधन करके अपना संख्याबल बढ़ाया. बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहां गठबंधन महत्वपूर्ण साबित होगा, वहां भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने पहले ही जगह बना ली है जबकि कांग्रेस अब भी अपने सहयोगियों के साथ समझौते पर काम कर रही है.

उत्तर प्रदेश में भाजपा के दो सहयोगियों अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने अपनी समस्याएं जताई है लेकिन भगवा पार्टी के नेताओं ने भरोसा जताया कि वे राजग में बने रहेंगे. सत्तारूढ़ पार्टी के प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा कि भाजपा और विपक्ष के बीच अंतर आम तौर पर उद्देश्य में है जिसमें भगवा गठबंधन अपने विरोधियों के विपरीत है. विपक्ष के पास ‘‘नेतृत्व को लेकर कोई स्पष्टता नहीं’’ है.

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे पास नेतृत्व को लेकर स्पष्टता है और हमारा एजेंडा विकास पर आधारित है.’’ महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना क्रमश: 25 और 23 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हो गई. शिवसेना अकेले चुनाव लड़ने की धमकी दे रही थी लेकिन उसे लोकसभा के साथ विधानसभा चुनावों में और सीटों की पेशकश देकर साध लिया गया.

कांग्रेस ने अभी महाराष्ट्र में अपने सहयोगी राकांपा और कर्नाटक में जद(एस) के साथ सीटों के बंटवारे पर सहमति कायम नहीं की है. उल्‍लेखनीय है कि लोकसभा की 543 सीटों पर चुनाव सात चरणों में 11 अप्रैल से शुरू होंगे और 19 मई तक चलेंगे. मतगणता 23 मई को होगी.

(इनपुट: एजेंसी भाषा से भी)