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EXCLUSIVE: नतीज़ों से पहले ही विपक्ष ने गोलबंदी शुरू की, लेकिन साफ दिख रही फूट

चंद्रबाबू नायडू ने राहुल गांधी और ममता बनर्जी से मिलकर 21 तारीख़ को बैठक का प्लान भी किया, लेकिन अभी ये प्लान नतीजों के बाद तक टलता नज़र आ रहा है. राहुल गांधी ने चंद्रबाबू नायडू को गठबंधन के लिए बाकी दलों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है. चंद्रबाबू नायडू के मुताबिक 22 विपक्षी दल उनके साथ हैं और जरूरत पड़ने पर ये सरकार के खिलाफ़ एक साथ खड़े दिखेंगे.

EXCLUSIVE: नतीज़ों से पहले ही विपक्ष ने गोलबंदी शुरू की, लेकिन साफ दिख रही फूट
दरअसल क्षेत्रीय दल एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं. उन्हें 1996 के लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के आसार नज़र आ रहे हैं, जब देवेगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला था.(फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: लोकसभा चुनाव (lok sabha elections 2019) के नतीजे तो 23 मई को आएंगे, लेकिन विपक्षी दलों में हलचल अभी से तेज हो गई है. एक तरफ़ चंद्रबाबू नायडू बीजपी के खिलाफ़ कांग्रेस के साथ मिलकर सहयोगी दलों की तलाश में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ़ तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव गैर बीजपी और गैर कांग्रेसी दलों को जोड़ने में जुट गए हैं.

21 मई को बैठक प्रस्‍तावित
चंद्रबाबू नायडू ने राहुल गांधी और ममता बनर्जी से मिलकर 21 तारीख़ को बैठक का प्लान भी किया, लेकिन अभी ये प्लान नतीजों के बाद तक टलता नज़र आ रहा है. राहुल गांधी ने चंद्रबाबू नायडू को गठबंधन के लिए बाकी दलों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है. चंद्रबाबू नायडू के मुताबिक 22 विपक्षी दल उनके साथ हैं और जरूरत पड़ने पर ये सरकार के खिलाफ़ एक साथ खड़े दिखेंगे. लेकिन प्रधानमंत्री पद को लेकर भी इन सभी दलों में एक राय होगी, ये कहना मुश्किल है.

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उधर के चंद्रशेखर राव (KCR) चेन्नई में द्रमुक (DMK) प्रमुख स्टालिन से मिलकर क्षेत्रीय दलों के गठबंधन को लेकर बात करेंगे, साथ ही आने वाले एक दो दिन में KCR जेडीएस प्रमुख देवेगौड़ा से मिलकर भी गैर बीजपी और गैर कांग्रेसी गठबंधन बनाने की कवायद में जुट गए हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि चंद्रशेखर राव तो कांग्रेस के नेतृत्‍व वाले (UPA) के सहयोगी दलों में ही सेंध लगा रहे हैं. देखना ये होगा कि इस काम में वो सफ़ल हो पाते हैं या नहीं.

1996 जैसे हालात के आसार
दरअसल क्षेत्रीय दल एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं. उन्हें 1996 के लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के आसार नज़र आ रहे हैं, जब देवेगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला था.

हालांकि इससे एक बात तो साफ़ है कि सरकार के खिलाफ विपक्ष में एकजुटता से कहीं ज्यादा फूट दिखाई दे रही है. वहीं दूसरी तरफ बीजपी और NDA सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नज़र आ रहे हैं. जाहिर है 23 मई तक इस तरह के कयासों और कोशिशों का दौर जारी रहेगा.